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पिता की जूतों की दुकान से सीखा हुनर, 21 साल की उम्र में मात्र 5 हजार लगा बना दी 1 करोड़ की कंपनी

दुबई, यूएस और जापान से हैं हुसैन की कंपनी के क्लाइंट्स

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नई दिल्ली. अक्सर कहा जाता है कि हुनर किसी उम्र की मोहताज नहीं होती है। यह कहावत भोपाल के हुसैन सैफी पर हूबहू लागू होती है। हुसैन उन चुनिंदा बच्चों में से थे, जिसने महज 12 साल की उम्र में C++ और एचटीएमएल (HTML) सीखना शुरू कर दिया था। हुसैन अपने पिता की जूतों की दुकान में यू-ट्यूब ट्यूटोरियल की मदद से कोडिंग सीखा करते थे। हुसैन बताते हैं कि स्कूल के दिनों में ही उन्होंने अपनी बेबसाइट बना ली थी, जहां से पाइरेटेड फिल्में डाउनलोड की जा सकती थी, तब तक उन्हें यह पता नहीं था कि यह एक गैरकानूनी काम है। लीगल नोटिस मिलने के बाद हुसैन ने वेबसाइट बंद कर दी और सही रास्ते से आगे बढ़ने की कसम खाई।  

 

लोकल रेस्टोरेंट की वेबसाइट बनाने के बदले मिले थे 5 हजार रुपए

हुसैन 2015 में 18 साल की उम्र में फ़्रीलांस डिवेलपर के तौर पर काम करना शुरू किया था। हुसैन फ्रीलांसिंग सिर्फ इसलिए करते थे, जिससे कि वह खुद से इंटरनेट का बिल दे सकें। उन्होंने फ्रीलांसिंग के दिनों में एक लोकल फास्ट-फूड ब्रैंड के आउटलेट पर बर्गर खा रहे थे। हुसैन ने उस आउटलेट के मालिक को इंटरनेट और वेबसाइट की मदद से अपने बर्गर की बिक्री बढ़ाने की सलाह दी। रेस्टोरेंट मालिक ने हुसैन से ही बेबसाइट बनाने की अपील की। इस बेबसाइट के बदले हुसैन को रेस्टोरेंट मालिक की ओर से 5 हजार रुपए दिए गए। 

 

विदेशों से है हुसैन की कंपनी के क्लाइंट

हुसैन ने 5 हज़ार रुपए से 2015 में अपने स्टार्टअप, हैकर कर्नल (HackerKernel) की शुरुआत की और आज की तारीख़ में हुसैन का स्टार्टअप 1 करोड़ रुपए का रेवेन्यू जनरेट कर रहा है। हुसैन की कंपनी में 25 इंजीनियर काम करते हैं और हुसैन का स्टार्टअप 200 से भी अधिक कंपनियों को अपनी सुविधाएं मुहैया करा रहा है। उनकी क्लाइंट लिस्ट में एडुज़िना, ज़िंगफाई और मैडक्यू जैसे बड़े नाम भी शामिल हैं। देश ही नहीं, दुबई, यूएस और जापान में भी उनकी कंपनी के क्लाइंट्स मौजूद हैं। 

 

सफल स्टार्टअप के मालिक हैं हुसैन 

हुसैन अब 21 साल के हो गए हैं। उन्होंने कम्प्यूटर ऐप्लिकेशन में ग्रैजुएशन पूरा किया है। भोपाल एक सफल स्टार्टअप्स के मालिक हैं। यह एक सॉफ़्टवेयर सर्विस स्टार्टअप है, जो वेबसाइट और ऐप बनाते हैं। इसकी मदद से वो छोटे और मध्यम स्तरीय उद्योगों की ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म पर एक प्रभावी मौजूदगी दर्ज कराने में मदद करता है।

तीन दोस्तों संग मिलकर स्टार्टअप को बढ़ाया आगे 

हुसैन बताते हैं कि शुरुआत में उनके पास छोटे-छोटे प्रोजेक्ट आते थे। इन प्रोजेक्ट्स के 15-20 हज़ार रुपए मासिक फ़ीस चार्ज करते थे। जब उनका काम काफ़ी बढ़ गया तो उन्होंने अपने दोस्त रितिक सोनी की मदद ली।  शुरू किया। कुछ ही समय में भोपाल और इंदौर के स्टार्टअप्स हैकर कर्नल के पास बतौर क्लाइंट आने लगे। इसके बाद 2016 में हुसैन के दूसरे सहयोगी यश डाबी ने भी उनके साथ करना शुरू कर दिया और कंपनी मोबाइल ऐप्लिकेशन्स भी बनाने लगी। 

 

अगर आप Hacker Kernel से जुड़ना चाहते हैं या और कुछ जानना चाहते हैं, तो आप http://hackerkernel.com/ से संपर्क कर सकते हैं। 

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