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ग्रोथ / यूरोपीय देशों को भारतीय अंगूर भाए, निर्यात 31% बढ़ा, फिर भी किसानों को हुआ घाटा

रूस, चीन और अन्य देशों में भी 25 से 30 फीसदी तक निर्यात में इजाफा होने की उम्मीद

European countries like Indian grapes, exports increase by 31%, still losses to farmers

नई दिल्ली.  भारतीय अंगूरों की मिठास दुनिया को भा रही है। खासकर यूरोपीय देशों को। इसके चलते इस साल यूरोप में अंगूरों के निर्यात में अप्रत्याशित 31 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। यही नहीं, रूस, चीन और अन्य देशों के निर्यात में भी लगभग 25 फीसदी से 30 फीसदी की वृद्धि होने की उम्मीद है। इसके बाद भी अंगूर की ज्यादा पैदावार होने की वजह से किसानों को अंगूर के दाम कम मिले। 


1900 करोड़ रुपए के अंगूर खरीदे यूरोपवासियों ने 

कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य विकास एजेंसी (एपीडा) के अनुसार भारत का अंगूर निर्यात 2018-19 में 1,21,469 टन हो गया। 2017-18 में यह 92,286 टन था।  भारत से यूरोप को हुए अंगूर निर्यात में नीदरलैंड, यूके और जर्मनी की हिस्सेदारी 90 फीसदी रही। 2017-18 में भारत ने यूरोप को 1,900 करोड़ रुपये के अंगूर का निर्यात किया था। अक्टूबर से मई तक चलने वाले फसल सीजन में भारत ने मार्च से मई की अवधि में यूरोप में सफेद अंगूरों (ह्वाइट ग्रेप्स) के बाजार में अपनी हिस्सेदारी 70 फीसदी कर दी है। निर्यातक अब अच्छी गुणवत्ता वाले रंगीन किस्मों (कलर वैराइटी मसलन काले आदि) पर फोकस कर रहे हैं। इनकी अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अधिक मांग है।

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10 की बजाय 7 यूरो ही मिली कीमत 


नासिक स्थित सह्याद्री फार्म्स के अध्यक्ष विलास शिंदे ने बताया कि फरवरी के मध्य से मार्च तक अंगूर की कीमतें ज्यादा सप्लाई के कारण मार्च में कम हो गई थीं। 5 किलो अंगूर के एक बॉक्स के लिए 9 से 10 यूरो के अपेक्षित मूल्य के मुकाबले हमें 5 से 7 यूरो की कीमत पर बेचना पड़ा। यह कंपनी भारत की शीर्ष निर्यातक है। शिंदे ने कहा कि यूरोप में कीमतों में गिरावट के कारण, किसानों को अंगूर का भाव औसतन 15 रुपये प्रति किलो कम मिले। हालांकि अप्रैल में हालात में सुधार आया। ऑल इंडिया ग्रेप एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष जगन्नाथ खापर ने कहा कि उनक मानना है कि रूस और अन्य देशों को अंगूर के निर्यात में 25-30 फीसदी की वृद्धि होनी चाहिए।  एपीडा ने इन देशों के आंकड़ों अब तक जारी नहीं किये हैं।

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