राहत के संकेत /जून में कम हो सकती है आपके लोन की ईएमआई, रिजर्व बैंक घटा सकता है रेपो रेट

money bhaskar

May 15,2019 05:19:00 PM IST

नई दिल्ली. भारतीय रिजर्व बैंक(RBI) 6 जून को मौद्रिक नीति की अगली समीक्षा जारी करेगा। इसी बीच SBI ने अपनी रिसर्च रिपोर्ट में कहा है कि अर्थव्यवस्था में सुस्ती को देखते हुए आरबीआई को रेपो रेट में 0.25% से ज्यादा कटौती करनी चाहिए। एसबीआई की इस रिसर्च का अर्थशास्त्रियों ने भी समर्थन किया है। उनके मुताबिक महंगाई की वर्तमान स्थिति और ग्रोथ के लिए रेपो रेट घटाना जरूरी है। यदि एसबीआई की सलाह पर आरबीआई रेपो रेट में कमी करता है तो इसका सीधा फायदा लोगों को मिलेगा। उनका होम लोन सस्ता हो जाएगा। गौरतलब है कि पिछली दो समीक्षा में आरबीआई ने रेपो रेट 0.25-0.25% घटाया था। अभी यह 6% है। बैंक जिस ब्याज पर रिजर्व बैंक से कम समय के लिए कर्ज लेते हैं उसे रेपो रेट कहा जाता है।

384 में 330 कंपनियों के रिवेन्यू में गिरावट

मंगलवार को जारी ईकोरैप रिपोर्ट में कहा गया है कि आर्थिक सुस्ती के कारण शेयर बाजार में बेचैनी बढ़ी है। रिपोर्ट में मार्च तिमाही के लिए कंपनियों के नतीजों का विश्लेषण भी किया गया है। इसके मुताबिक 384 कंपनियों में से 330 कंपनियों के रिवेन्यू और प्रॉफिट में गिरावट आई है। टेलीकॉम उपकरण, इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपर, एग्रो केमिकल, पेट्रोकेमिकल और कास्टिंग कंपनियां ज्यादा प्रभावित हुई हैं। निर्यात पर निर्भर करने वाली दवा कंपनियों के नतीजे भी कमजोर रहने के आसार हैं।

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मानसून की स्थिति पर भी निर्भर होगा बाजार

आईसीआईसीआई बैंक द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट में भी कहा गया है कि मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) के लिये दर में कटौती की गुंजाइश बनी हुई है। हालांकि, उसने कहा है कि यह मानसून की स्थिति पर निर्भर करेगा। मानसून के करीब सामान्य रहने का अनुमान व्यक्त किया गया है। यह देखना होगा कि इसका खाद्य पदार्थों के दाम पर क्या असर पड़ता है और पेट्रोलियम पदार्थ किस दायरे में रहते हैं।

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सुस्ती का संकेत

आईसीआईसीआई बैंक का रिसर्च डिफ्यूजन इंडेक्स पिछले वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में औद्योगिक गतिविधियों में सुस्ती की तरफ संकेत देता है, जबकि सेवा क्षेत्र के बारे में इसमें मिला जुला रुख दिखाई देता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कमजोर पड़ते वैश्विक व्यापार और उपभोक्ता वस्तुओं की बढ़ती कीमतें ग्रामीण क्षेत्र की गतिविधियों में आती सुस्ती को देखते हुये अनुकूल नहीं दिखाई देती हैं। आईसीआईसीआई बैंक ने कहा है कि इन संकेतकों के आधार पर हमारा मानना है कि 2018-19 की चौथी तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर 6.2- 6.6 प्रतिशत के आसपास रहेगी और चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में यह मामूली बढ़कर 6.5 प्रतिशत रह सकती है।

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ऊंची ब्याज दर निवेश में रोड़ा

एसबीआई की रिपोर्ट के मुताबिक निर्यात पर निर्भर रहने वाली मेडीसिन बनाने वाली कंपनियां भी कमजोर वृद्धि दिखा सकती है। कुल मिलाकर रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा सुस्ती का दौर अस्थाई हो सकता है बशर्ते कि इस बीच उचित नीतियों को अपनाया जाए। उदाहरण के तौर पर ऊंची वास्तविक ब्याज दरें निवेश के रास्ते में बड़ी अड़चन खड़ी कर रही हैं।

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