संकट /देश का पोल्ट्री व्यवसाय आर्थिक संकट में, केंद्र सरकार से राहत पैकेज की मांग 

  • देश का पोल्ट्री उद्योग प्रतिमाह करोड़ों रुपए के गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा है
  • विगत 20 सालों में कभी भी किसी एक साल के अन्तर्गत पशु आहार की कीमतें इस तरह नहीं बढ़ी है ना ही इस तरह कभी पोल्ट्री उत्पाद की बाजार कीमत में कमी आयी है

Moneybhaskar.com

Sep 05,2019 04:25:52 PM IST

नई दिल्ली. देश का पोल्ट्री उद्योग प्रतिमाह करोड़ों रुपए के गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा है। मध्यभारत में छत्तीसगढ के राजनांदगांव स्थित देश की जानी-मानी पोल्ट्री उत्पादन में अग्रणी कंपनी इंडियान ब्रॉयलर (आई.बी.) ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर और सेंट्रल पोल्ट्री डेव्हलपमेंट एण्ड एडवाईजरी काउंसिल, भारत सरकार के पूर्व सदस्य श्री बहादुर अली जी ने बताया कि पिछले दो माह से पशु आहार मक्का, कनकी और राइस ब्रान की कीमत लगभग 50 प्रतिशत बढ़ने और पोल्ट्री उत्पाद की बाजार कीमत औसत 35 प्रतिशत कम होने की वजह से देष के पोल्ट्री फाम्र्स गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहे है। इस समय देश में आर्थिक मंदी के कारण उपभोक्ता भी स्वयं के खर्चों में लगातार कमी कर रहा है जिसका सीधा असर पोल्ट्री उत्पादकों की खपत में भी हो रहा है।

करोड़ों रुपए पोल्ट्री व्यवसायियों पर बकाया है

देश के पोल्ट्री फार्मरों को अपने उत्पादन मूल्य से 25 प्रतिशत कम मूल्य में व्यवसाय करना पड़ रहा है और इस तरह पशुआहार के बढ़ती कीमत और पोल्ट्री उत्पाद के गिरती कीमत को देख पशु आहार सप्लायर्स पोल्ट्री फाम्र्स को पशु आहार की सप्लाई कम या बंद कर रहे है साथ ही आगे सप्लाई करने से डर भी रहे है क्योंकि इनके करोड़ों रुपए पोल्ट्री व्यवसायियों पर बकाया है।

पिछले वर्ष कम बारिश के कारण कृषि उत्पादन प्रभावित हुआ था

विगत 20 सालों में कभी भी किसी एक साल के अन्तर्गत पशु आहार की कीमतें इस तरह नहीं बढ़ी है ना ही इस तरह कभी पोल्ट्री उत्पाद की बाजार कीमत में कमी आयी है। पिछले वर्ष कम बारिश के कारण कृषि उत्पादन प्रभावित हुआ था। पोल्ट्री फार्मर्स द्वारा इस स्थिति को समझते हुए पिछले 06 माह से केन्द्र सरकार से ड्यूटी फ्री मक्का आयात करने की अनुमति मांगी जा रही है परन्तु अभी तक अनुमति ना मिलने के कारण स्थानीय पशु आहार की कीमत में लगभग 50 प्रतिशत वृद्धि हो गयी है।

5 लाख लोग और अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित होने वाले लगभग 20 लाख लोगों को राहत महसूस हो सके

ऐसी स्थिति में पूरे देश के पोल्ट्री फार्मर राज्य/केन्द्र सरकार से पोल्ट्री उद्योग को बचाने की अपील करते हुये मांग कर रहे हैं कि देश की मूलभूत आवश्यकताओं के तहत जल्द से जल्द पोल्ट्री राहत पैकेज दिये जाये ताकि देश के किसानों व पोल्ट्री व्यवसाय में प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित होने वाले लगभग 5 लाख लोग और अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित होने वाले लगभग 20 लाख लोगों को राहत महसूस हो सके। पशुपालन ही ऐसा क्षेत्र है जो केंद्र सरकार की किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य में अहम योगदान दे सकता है। अन्यथा बेरोजगारी की समस्या के साथ-साथ अन्य समस्याओं का भी सामना करना पड़ेगा।

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