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  • On September 9, Consumer Affairs convened meeting to consider bottled water sales

बैठक /बोतलबंद पानी की बिक्री पर होगा विचार, 9 सितंबर को उपभोक्ता मामले ने बैठक बुलाई

  • सरकार 2 अक्टूबर से प्लास्टिक पर पूरी तरह रोक लगाना चाहती है
  • प्रधानमंत्री मोदी ने 15 अगस्त को प्लास्टिक के इस्तेमाल पर रोक का आह्वान किया था

Moneybhaskar.com

Sep 04,2019 02:56:51 PM IST

नई दिल्ली। बोतल बंद पानी एवं पेप्सी-कोक जैसे पेय पदार्थ आने वाले समय में कैसे बिकेंगे, इसको लेकर सरकार ऊहापोह में हैं। अभी बोतल बंद पानी हो या पेप्सी-कोक के पेय पदार्थ, सबके सब सिंगल यूज प्लास्टिक की बोतल में बेचे जाते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्लास्टिक के इस्तेमाल पर रोक के आह्वान के बाद बोतल बंद पानी बेचने वाली और पेय पदार्थ बेचने वाली कंपनियां असमंजस की स्थिति में आ गई है। वहीं सरकार को भी इसका विकल्प फिलहाल नजर नहीं आ रहा है। ऐसे में, उपभोक्ता मामले मंत्रालय ने 9 सितंबर को इसका विकल्प तलाशने के लिए बैठक बुलाई है।

पैक बंद पेयजल उद्योग सहित विभिन्न उद्योगों के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया जाएगा

उपभोक्ता मामले के मंत्री राम विलास पासवान ने एकल उपयोग वाले प्लास्टिक पर चिंता व्यक्त करते हुए बताया कि इसका विकल्प खोजने के लिए नौ सितंबर को एक बैठक बुलाई गई है। इसमें पैक बंद पेयजल उद्योग सहित विभिन्न उद्योगों के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया जाएगा। मंत्री ने बताया कि भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) को भी कुछ विकल्प सुझाने के लिए कहा जाएगा। भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) किस तरह से मानकों को तय करता है, उनके कार्यान्वयन और प्रयोगशालाओं के कामकाज को कैसे आंकता है, इसका आकलन करने के लिए दो अलग-अलग बैठकें भी बुलाई गई हैं। पासवान ने कहा कि प्रधानमंत्री ने अपने स्वतंत्रता दिवस के भाषण में प्लास्टिक के उपयोग में कमी लाने का आह्वान किया था, इसलिए मंत्रालय इस मुद्दे पर ध्यान देगा।

आवश्यक वस्तु के कानून में भी होगा बदलाव

केंद्र सरकार ने राज्यों से छह दशक पुराने आवश्यक वस्तु कानून के कुछ कड़े प्रावधानों को नरम बनाने समेत उसे सरल करने के बारे में सुझाव मांगे हैं। इस समय इसमें कुछ ऐसे प्रावधान हैं जिनमें मामूली जुर्म में भी जेल की सजा है। पासवान ने राज्यों को केंद्रीय बफर स्टॉक से दालों और प्याज उठा कर उसे खुदरा बाजार में उतारने का आग्रह किया है ताकि इनकी कीमतों को नियंत्रण में रखा जा सके। उन्होंने कहा कि 14 राज्यों में जनवरी 2020 से अंतर-राज्य राशन कार्ड पोर्टेबिलिटी शुरू होने की उम्मीद है और उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि 'वन नेशन वन राशन कार्ड' (एक राष्ट्र, एक राशनकार्ड) की जो परिकल्पना की गई है उसे अगले साल जून तक हासिल कर लिया जाएगा।

केंद्र के पास 27 लाख टन दालों और 56,000 टन प्याज का बफर स्टॉक है

एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि पासवान ने सुझाव दिया कि ‘‘राज्य आवश्यक वस्तु कानून को सरल बनाने पर गौर कर सकते हैं, जिसमें दंड के प्रावधानों में संशोधन भी शामिल हैं। इस सरलीकरण से ‘कारोबार में आसानी’ होगी और निवेश को बढ़ावा मिलेगा।’’ प्याज और दालों के बारे में मंत्री ने कहा, ‘‘हमारे पास दालों और प्याज का पर्याप्त बफर स्टॉक है। हमने सभी राज्यों / केंद्रशासित प्रदेशों से कहा है कि वे अपनी मांग बतायें और बफर स्टॉक से दालों और प्याज को उठायें।’’ मंत्री ने बताया कि केंद्र के पास 27 लाख टन दालों और 56,000 टन प्याज का बफर स्टॉक है, जिसे विभिन्न राज्य राशन की दुकानों, सहकारी समितियों, राज्य सरकार की एजेंसियों एवं विपणन महासंघ के माध्यम से प्रत्यक्ष खुदरा बिक्री के लिए उठा सकते हैं।

चार राज्यों के पास पहले से ही ऐसा कोष मौजूद है

उपभोक्ता मामलों के सचिव ए के श्रीवास्तव ने कहा कि इसमें केंद्र सरकार की तर्ज पर राज्यों को भी 'मूल्य स्थिरीकरण कोष' बनाने की सलाह दी गई है। उन्होंने कहा कि चार राज्यों के पास पहले से ही ऐसा कोष मौजूद है। आवश्यक वस्तु कानून के बारे में सचिव ने कहा, ‘‘कानून में दंडात्मक प्रावधान हैं जो सख्त और पुराने हैं। हमने राज्यों से सुझाव मांगे हैं कि इसे कैसे सरल बनाया जाए।’’ उन्होंने कहा कि आवश्यक वस्तु कानून में प्रस्तावित संशोधन की दिशा में प्रयास नीति आयोग के परामर्श से किया जा रहा है ताकि उपभोक्ता संरक्षण के उद्देश्यों से समझौता किए बिना निवेश को बढ़ावा देने और व्यापार की आसानी के लक्ष्य को पूरा किया जा सके।

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