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महात्मा गांधी और प्रधानमंत्री मोदी में हैं कई समानताएं, जानकर बन सकते हैं सफल कारोबारी

दोनों में सफल कारोबारी के गुण मौजूद

many similarities between gandhi and pm modi

मनी भास्कर, नई दिल्ली।

देश के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दोनों ही गुजरात से आते हैं। दोनों में ऐसी कई समानताएं हैं जो एक सफल कारोबारी के लिए जरूर हैं। मनी भास्कर बता रहा हैं आपको दोनों के बीच की समानताएं। इन गुणों को अपनाकर आप एक सफल कारोबारी बन सकते हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय के शिक्षकों से लिए गए इनपुट पर आधारित

मार्केटिंग एवं पीआर स्किल्स

महात्मा गांधी की तरह ही प्रधानमंत्री मोदी (pm modi) मार्केटिंग एवं पीआर स्किल्स के माहिर माने जाते हैं। अगर भारत एक ब्रांड है तो महात्मा गांधी और मोदी दोनों ही इसके ब्रांड अंबेसडर हैं। गांधी के काल में भारत की पहचान गांधी से होती थी अब मोदी से हो रही है। गांधी भारत के हर चीज को प्रमोट करते थे, वैसे ही मोदी भी करते हैं। गांधी की तरह मोदी भी इस बात को बखूबी जानते हैं कि किसी भी चीज से नफा कमाने के लिए उसकी मार्केटिंग करनी पड़ती है। मोदी ब्रांड इंडिया का पब्लिक रिलेशन मजबूत करने के लिए मशहूर है, वैसे ही, गांधी अपने पीआर की वजह से अंग्रेजों से कई ऐसी बात मनवा लेते थे जो उस समय के दूसरे नेता नहीं कर पाते थे।

नेतृत्व के शानदार गुण

अगर नेतृत्व प्रदान करने वाले शानदार नेताओं के नाम को याद करें तो निश्चित रूप से गांधी के साथ मोदी की तस्वरी भी सामने आएगी। गांधी ने महिलाओं के अधिकार से लेकर अन्याय को दूर करने के लिए अपने नेतृत्व में कई आंदोलन किए। मोदी के इनोवेटिव आइडियाज के प्रति समर्पण एवं जोखिम उठाने की क्षमता उन्हें शानदार नेतृत्व वाले नेताओं की पंक्ति में खड़ा कर देता है।

लोगों की भागीदारी

आजादी की लड़ाई के दौरान गांधी चाहते थे कि अधिक से अधिक लोग अंग्रेजों के खिलाफ आवाज उठाए, आंदोलन में सहभागी बने। वैसे ही, मोदी का मानना है कि किसी भी स्कीम को या प्रोग्राम को सफल बनाने के लिए सबकी भागीदारी चाहिए।

विकास की भूख

गांधी हमेशा चाहते थे कि भारत विकास करे। वह हमेशा स्वदेशी खादी पहनने की वकालत करते थे। उन्होंने विदेशी सामान के बहिष्कार के लिए लोगों से अपील की। इस तरीके से मोदी मेक इन इंडिया को बढ़ावा देते हैं और युवाओं को अपने इनोवेशन से देश को आगे ले जाने की अपील करते हैं।

छोटे बदलाव का बड़ा असर

गांधी की तरह मोदी भी इस बात के समर्थक हैं कि छोटे बदलाव का बड़ा असर होता है। गांधी मानते थे कि अगर अपने स्तर पर हम कोई छोटा बदलाव कर ले तो दुनिया को बदलने में ज्यादा वक्त नहीं लगेगा।

 

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