मशीन जांचेंगी आपकी ड्राइविंग स्किल, तब ही बनेगा लाइसेंस

क्या आपका ड्राइविंग लाइसेंस सिर्फ इसलिए नहीं बन पा रहा है क्योंकि आरटीओ के अफसर रिश्वत न मिलने के फेर में आपको रिजेक्ट कर देते हैं? यदि ऐसा है तो अब आप मशीन के सामने अपनी ड्राइवरी के हुनर को बताइए और तुरंत ही ड्राइविंग लाइसेंस के लिए पात्रता हासिल कर लीजिए। दिल्ली में बुधवार को कुछ इसी तरह के मशीन आधारित ऑटोमेटिक ड्राइविंग टेस्ट सेंटर (ADTC) का  शुभारंभ हुआ है। देश में अपनी तरह का यह पहला सेंटर है। इसमें कोई भी मानवीय हस्तक्षेप नहीं होगा।

money bhaskar

Mar 06,2019 07:56:00 PM IST

नई दिल्ली.
क्या आपका ड्राइविंग लाइसेंस सिर्फ इसलिए नहीं बन पा रहा है क्योंकि आरटीओ के अफसर रिश्वत न मिलने के फेर में आपको रिजेक्ट कर देते हैं? यदि ऐसा है तो अब आप मशीन के सामने अपनी ड्राइवरी के हुनर को बताइए और तुरंत ही ड्राइविंग लाइसेंस के लिए पात्रता हासिल कर लीजिए। दिल्ली में बुधवार को कुछ इसी तरह के मशीन आधारित ऑटोमेटिक ड्राइविंग टेस्ट सेंटर (ADTC) का शुभारंभ हुआ है। देश में अपनी तरह का यह पहला सेंटर है। इसमें कोई भी मानवीय हस्तक्षेप नहीं होगा।

हाथों हाथ मिल जाएगा रिजल्ट

आप टेस्ट सेंटर के ट्रैक में गाड़ी चलाइए और फिर यहां लगी मशीनें व सॉफ्टवेयर तय करेंगी कि आप कार चलाने में कितने दक्ष हैं। तुरंत ही आपको रिजल्ट भी मिल जाएगा। यदि रिजक्ट हो गए तो दोबारा से कोशिश कीजिए। दिल्ली के मयूर विहार फेस वन स्थित आरटीओ ऑफिस में परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत ने इसका लोकार्पण किया। इसके अलावा विश्वास नगर, सराय काले खां और शकुर बस्ती में तीन और केंद्रों ने संचालन शुरू कर दिया है। जबकि लाडो सराय, राजा गार्डन, हरी नगर, बुरारी, लोनी, राहिणी, झरोदा कालन और द्वारका में शीघ्र ही यह सेंटर शुरू होंगे।

कार को पार्क करने का भी होगा टेस्ट

फोर व्हील गाड़ियों में पार्क करने के तरीके जांचने के लिए रिवर्स पैरलल पार्किंग टेस्ट रखा गया है। इसी के साथ अप ग्रडिएंट, फॉरवर्ड 8, रिवर्स एस, ट्रैफिक जंक्शन, एच ट्रैक भी रखा गया है। इसके अलावा यदि कोई ट्रैक पूरा करने से पहले ही फेल हो जाता है तो वह दूसरे को डिस्टर्ब किए बिना ही बाहर निकल सकता है।

यह है खासियत

  • डिजाइन ऐसी है कि सबसे कम स्थान यानी महज एक एकड़ में ही पूरा सेंटर बन गया।
  • केंद्रीय मोटर वाहन नियमों के करीब 20 प्रावधानों की जांच इस ट्रैक में होती है।
  • लागत भी महज एक करोड़ रुपए है जबकि दूसरे सेंटरों में औसत 5 करोड़ रुपए की लागत आती है।
  • बायोमेट्रिक के इस्तेमाल से डुप्लीकेसी की संभावना नहीं। यानी जिसका लाइसेंस बनना है उसे ही टेस्ट देना होगा।
  • ऑनलाइन अपाइनमेंट लेकर डीएल बनवाने के लिए जा सकते हैं।
  • टेस्ट से पहले एक ट्रेनिंग में ड्राइविंग की जानकारी दी जाती है जिससे कोई कन्यफ्यूजन हो।
  • एक बार में तीन से चार गाड़ियां टेस्ट के लिए जा सकती हैं।
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