नोटबंदी के बाद अब अमेरिकी राष्ट्रपति के ड्यूटी फ्री आयात पर रोक से भारत को लग सकता है झटका, रोजगार पर पड़ेगा असर

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने जनरलाइज्ड सिस्टम ऑफ प्रेफरेंसेज (GSP) के तहत भारत को दिए गए तरजीही दर्जे को खत्म करने से निर्यात करने वाले छोटे व मझोले उद्योगों पर बड़ा असर पड़ सकता है। नोटबंदी के बाद अब इस सेक्टर पर दोहरी मार पड़ेगी। निर्यात कम होने से उत्पादन में 25 फीसदी तक गिरावट आ सकती है। इससे कम सैलरी वाली नौकरियों पर भी संकट आ सकता है। 

money bhaskar

Mar 05,2019 06:50:00 PM IST

नई दिल्ली.

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने जनरलाइज्ड सिस्टम ऑफ प्रेफरेंसेज (GSP) के तहत भारत और तुर्की को दिए गए तरजीही दर्जे को खत्म करने से निर्यात करने वाले छोटे व मझोले उद्योगों पर बड़ा असर पड़ सकता है। नोटबंदी के बाद अब इस सेक्टर पर दोहरी मार पड़ेगी। निर्यात कम होने से उत्पादन में 25 फीसदी तक गिरावट आ सकती है। इससे कम सैलरी वाली नौकरियों पर भी संकट आ सकता है।

एक्सपोर्ट एसोसिएशन कर रही हैं विरोध

ट्रंप प्रशासन ने जीएसपी खत्म करने के लिए भारत के साथ व्यापार घाटे का हवाला दिया है। GSP के तहत अमेरिका को निर्यात होने वाले भारत के तमाम प्रॉडक्ट्स पर ड्यूटी नहीं लगती।
भारत से करीब 40 हजार करोड़ रुपए के इंजीनियरिंग, हस्तशिल्प, हैंडलूम, एनिमल हस्बैंड्री आदि के उत्पाद निर्यात किए जाते हैं। फेडरेशन ऑफ एक्सपोर्ट ऑगनाइजेशन (FIEO फियो) अध्यक्ष जीके गुप्ता ने बताया कि छोटे एव मध्यम उद्योग अमेरिका के इस फैसले से मुश्किल में आ जाएंगे। उनके मुताबिक अमेरिका डेयरी प्रोडक्ट्स में भारत से भी ऐसी ही छूट चाहता है। यदि भारत यह छूट दे देता तो भारत में डेयरी से संबंधित कंपनियों को नुकसान होता। लिहाजा, अब अमेरिका ने जीएसपी खत्म करने का दबाव डाला है। हालांकि केंद्र सरकार बातचीत कर इस मसले का समाधान निकालने की कोशिश कर रही है।

प्रतिस्पर्द्धी बनकर बच सकते हैं GSP के प्रभाव से


Engineering Export Promotion Council of India (EEPC India, ईईपीसी) के डायरेक्टर सुरंजन गुप्ता बताते हैं कि अब भारत की निर्यात करने वाली एमएसएमई यूनिट्स को और ज्यादा प्रतिस्पर्द्धी बनना होगा। तभी वे इस संकट से उबर सकेंगे। स्टील, कॉस्टिंग व ऑटो पार्ट्स पर इसका असर होगा। उत्पादन में करीब 25 फीसदी तक की कटौती हो सकती है। फियो के पूर्व अध्यक्ष एससी ललहन भी 25 प्रतिशत तक निर्यात प्रभावित होने की बात स्वीकारते हैं। हालांकि भारत पर इसका व्यापक असर होने की बजाय कुछ सेक्टरों तक ही सीमित होगा।

GSP को समझे आसान भाषा में


GSP यानी जनरलाइज्ड सिस्टम ऑफ प्रेफरेंसेज। अमेरिका ने GSP की शुरुआत 1976 में विकासशील में आर्थिक वृद्धि बढ़ाने के लिए की थी। इसके तहत चुनिंदा गुड्स के ड्यूटी-फ्री या मामूली टैरिफ पर इम्पोर्ट की अनुमति दी जाती है। अभी तक लगभग 129 देशों को करीब 4,800 गुड्स के लिए GSP के तहत फायदा मिला है। इसके तहत मुख्य तौर पर ऐनिमल हस्बैंड्री, मीट, मछली और हस्तशिल्प जैसे कृषि उत्पादों को शामिल किया गया है। इन उत्पादों को आम तौर पर विकासशील देशों के उत्पाद के तौर पर देखा जाता है। अमेरिका और ब्रिटेन के साथ-साथ यूरोपियन यूनियन भी विकासशील देशों से GSP के तहत कुछ वस्तुओं का आयात करते हैं। यूएस ट्रेड रेप्रिजेंटटिव ऑफिस के मुताबिक GSP का उद्देश्य विकासशील देशों को अपने निर्यात को बढ़ाने में मदद करना है ताकि उनकी अर्थव्यवस्था बढ़ सके और गरीबी घटाने में मदद मिल सके।

भारत से 40 हजार करोड़ रुपए मूल्य के सामान जाते हैं अमेरिका


GSP के तहत केमिकल्स और इंजिनियरिंग जैसे सेक्टरों के करीब 1900 भारतीय प्रॉडक्ट्स को अमेरिकी बाजार में ड्यूटी फ्री पहुंच हासिल है।भारत ने 2017-18 में अमेरिका को 48 अरब डॉलर (3,39,811 करोड़ रुपये) मूल्य के उत्पादों का निर्यात किया था। इनमें से सिर्फ 5.6 अरब डॉलर यानी करीब 39,645 करोड़ रुपये का निर्यात GSP रूट के जरिए हुआ। इससे भारत को सालाना 19 करोड़ डॉलर (करीब 1,345 करोड़ रुपये) का ड्यूटी बेनिफिट मिलता है। भारत मुख्य तौर पर कच्चे माल और ऑर्गैनिक केमिकल्स जैसे सामानों का अमेरिका को निर्यात करता है। बता दें कि भारत अमेरिका के साथ ट्रेड सरप्लस वाला ग्यारहवां सबसे बड़ा देश है यानी भारत का अमेरिका को निर्यात वहां से आयात से ज्यादा है। 2017-18 में भारत का अमेरिका के प्रति सालाना ट्रेड सरप्लस 21 अरब डॉलर (करीब 1,48,667 करोड़ रुपये) था।

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