मोदी की स्मार्ट सिटी स्कीम से इस युवा को मिली बड़ी विदेशी मदद, बनाएंगे इंटेलिजेंट ड्रोन 

दिल्ली, मुंबई जैसे महानगरों की बजाय छोटे शहर के युवा भी अब अपने हुनर से विदेशियों से फंड हासिल कर रहे हैं। मप्र के भोपाल शहर में ही पढ़ाई और फिर यहीं पर अपना स्टार्ट अप शुरू करने वाले वीभू त्रिपाठी की कुछ ऐसी ही कहानी है। अपने आइडिया के बदौलत त्रिपाठी को हांगकांग बेस्ट एक्सेलेटर प्रोग्राम के तहत 1 लाख 20 डालर की मदद मिली है। उनका आइडिया है आटोमेशन ड्रोन का। इसके जरिए वे आपदा के समय फंसे हुए लोगों तक जरूरी दवाएं व सामान पहुंचा सकेंगे। 

 

money bhaskar

Mar 28,2019 03:26:00 PM IST

कुलदीप सिंगोरिया

नई दिल्ली. दिल्ली, मुंबई जैसे महानगरों के ही नहीं बल्कि अब छोटे शहर के युवा भी अपने हुनर से विदेशियों से फंड हासिल कर रहे हैं। मप्र के भोपाल शहर में ही पढ़ाई और फिर यहीं पर अपना स्टार्ट अप कंपनी शुरू करने वाले वीभू त्रिपाठी की कुछ ऐसी ही कहानी है। अपने आइडिया के बदौलत त्रिपाठी को हांगकांग बेस्ट एक्सेलेटर प्रोग्राम के तहत 1 लाख 20 डालर की मदद मिली है। उनका आइडिया है आटोमेशन ड्रोन का। इसके जरिए वे आपदा के समय फंसे हुए लोगों तक जरूरी दवाएं व सामान पहुंचा सकेंगे।

एक साल पहले ही शुरू की है कंपनी वीजबी

पीएम नरेंद्र मोदी के स्मार्ट सिटी मिशन के तहत भोपाल स्मार्ट सिटी डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड की होल्डिंग कंपनी बी-नेस्ट विकसित हुई है। इसमें इन्क्यूबेटर के तौर पर वीभू त्रिपाठी ने एक साल पहले ही स्टार्टअप शुरू किया था। विभू ने स्टॉर्टअप के रूप में बिजनेस शुरू करने ‘‘वीजबी’’ नाम से कंपनी भी रजिस्टर्ड की हैं। संभवतः प्रदेश के पहले स्टार्टअप है जिन्हें प्री-सीड इंवेस्टमेंट के तौर पर अपनी टेक्नोलॉजी को विकसित करने मदद मिली है। प्रोग्राम के तहत प्री-सीड इंवेस्टमेंट की पहली किश्त 20 हजार डाॅलर उन्हें मिल चुकी है।

ऑटोनामस ड्रोन टेक्नोलॉजी कर हो रहा है काम

त्रिपाठी राजीव गांधी तकनिकी विष्वविद्यालय में मेकेनिकल इंजिनियर के छात्र हैं। उन्होंने करीब 1 साल पहले बी-नेस्ट में इंक्यूबेट के रूप में एंट्री ली थी। वे ऑटोनोमस ड्रोन एप्लीकेशन पर काम कर रहें हैं। उनका आईडिया इंटेलिजेंट ड्रोन बनाने का है।

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क्या है टेक्नोलॉजी

विभू इंटेलिजेंट ड्रोन बनाने का आईडिया लेकर स्मार्ट सिटी कंपनी के इंक्यूबेषन सेंटर बी-नेस्ट आए। उनका आईडिया नेविगेशन आधारित ड्रोन बनाने का है। जिसे आपदा आने पर या क्रिटिकल कंडिशन में जरूरी वस्तुओं की आपूर्ती अंतिम छोर तक की जा सकें। उदाहरण के तौर पर बाढ़ की स्थिती में दवाएं व राहत सामग्री ड्रोन के माध्यम से पीड़ितों तक पहुंचाई जा सके।

ऐसे हुआ विभू का चयन

जिस टेक्नोलॉजी पर विभू त्रिपाठी काम कर रहें है, उसे हांगकांग बेस्ड एक्सेलेटर प्रोग्राम ने चयन किया है। इसके लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिग, टेलीफोन व अन्य माध्यमों से इन्वेस्टर्स ने इंटरव्यू लिए व टेक्नोलॉजी और आईडिया से संबंधित प्रेजेंटेशन देखे। उन्हें टोक्यो, हांगकांग आदि शहरों में भी बुलाया गया।

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