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इकोनॉमिक सर्वेः ये 5 बातें दे सकती हैं मोदी सरकार को झटका

इकोनॉमिक सर्वे की 5 बातें मोदी सरकार की मुश्किलें बढ़ा सकती हैं।

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नई दिल्ली. वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सोमवार को लोकसभा में 2017-18 के लिए इकोनॉमिक सर्वे पेश कर दिया। इसकी कई बातें पीएम नरेंद्र मोदी की अगुआई वाली केंद्र सरकार के लिए पॉजिटिव रहीं तो कई बातें ऐसी रहीं जो झटका दे सकती हैं। हम यहां ऐसी ही 5 बातों के बारे में बता रहे हैं, जो आगे मोदी सरकार की मुश्किलें बढ़ा सकती हैं।

 

 

#क्रूड ऑयल बनेगा बड़ी चुनौती

इकोनॉमिक सर्वे के मुताबिक फाइनेंशियल ईयर 2018-19 में क्रूड की कीमतों में 12% बढ़ोत्तरी का अनुमान है। इससे साफ है कि अगर ऐसा होता है तो यह इकोनॉमी के लिए बड़ी मुसीबत साबित हो सकता है। देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें पहले ही अपने उच्चतम स्तर पर बनी हुई हैं। इकोनॉमिक सर्वे पेश होने के बाद एक प्रेस कान्फ्रेंस के दौरान चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर अरविंद सुब्रमण्यन ने भी ऐसे ही संकेत दिए। उन्होंने कहा, 'इंटरनेशनल मार्केट और इंडियन बास्केट में क्रूड की बढ़ती कीमतें प्रमुख चिंता की बात है।'

बता दें कि ब्रेंट क्रूड की कीमतें 70 से 71 डॉलर के बीच बनी हुई हैं। ऐसे में अगर 12 फीसदी कीमतें और बढ़ती हैं तो ब्रेंट क्रूड 80 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकता है। इसका असर पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर भी पड़ेगा, जिससे देश में महंगाई भी बढ़ सकती है।

 

 

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#क्लाइमेट चेंज से घटेगी किसानों की इनकम

इकोनॉमि‍क सर्वे 2017-18 में चेतावनी दी गई है कि क्लाइमेट चेंज की वजह से मीडियम टर्म में फार्म इनकम 20 से 25 फीसदी कमी हो सकती है। सर्वे में इस बात पर जोर दिया गया है कि हालात को काबू में रखने के लि‍ए सिंचाई सुवि‍धाओं में 'नाटकीय' तरीके से इजाफा कि‍या जाना चाहि‍ए। सरकार ने भी कि‍सानों की आय को दोगुना करने के लि‍ए कदमों को मजबूती के साथ उठाने और उनकी सफलता का आंकलन करने पर जोर दि‍या है। इन कदमों में सिंचाई की व्‍यवस्था दुरुस्‍त करना शामि‍ल है।

सर्वे में कहा गया है कि कि‍सानों की आय बढ़ाने और एग्रीकल्‍चर सेक्‍टर में सुधार के लि‍ए जीएसटी काउंसि‍ल जैसा एक तंत्र बनाया जाए।

 

 

 

#सेविंग से ग्रोथ को नहीं मिला सपोर्ट

सरकार भले ही डिमोनेटाइजेशन की वजह से सेविंग बढ़ने का दावा कर रही है, लेकिन इकोनॉमिक सर्वे में कहा गया कि सेविंग से इकोनॉमिक ग्रोथ को सपोर्ट नहीं मिला है।

इकोनॉमिक सर्वे के मुताबिक, जीडीपी और फाइनेंशियल सेविंग का अनुपात वर्ष 2003 के 29.2 फीसदी से बढ़कर वर्ष 2007 में 38.3 फीसदी के हाई लेवल पर पहुंच गया था। हालांकि, इसके बाद यह अनुपात वर्ष 2016 में घटकर29 फीसदी के स्‍तर पर आ गया।

 

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#टैक्स डिसप्यूट में नाकाम हो रही सरकार

सर्वे के मुताबिक टैक्स डिसप्यूट्स में सरकार की सक्सेस का रेट खासा कम बना हुआ है, जो 30 फीसदी से भी कम है। वहीं टैक्स डिसप्यूट्स से जुड़े लगभग 66 फीसदी पेंडिंग मामलों में महज 1.8 फीसदी वैल्यू ही दांव पर लगी है। टैक्स से संबंधित मामलों में अपील के प्रत्येक चरण में लगातार नाकाम होने के बावजूद सरकार द्वारा मुकदमेबाजी पर अड़े रहने से ऐसी स्थिति पैदा होती हैं।

 

 

#क्वालिटी टैलेंट पैदा करने की जरूरत

सर्वे में क्वालिटी टैलेंट का मुद्दा भी उठाया गया। सर्वे के मुताबिक, भारत नॉलेज का कंज्यूमर बना हुआ, जिसे अब 'नॉलेज प्रोड्यूसर' बनने की दिशा में कदम उठाने की जरूरत है। सर्वे में कहा गया कि भारत के दुनिया की सबसे बड़ी इकोनॉमीज में से एक बनने की दिशा में यह बड़ा चैलेंज साबित होगा। इसके लिए साइंटिफिक रिसर्च पर फोकस बढ़ाने की जरूरत है। ऐसे इन्वेस्टमेंट भारत की सिक्युरिटी के लिहाज से भी अहम हैं।

 

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