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बजट में जेटली ने किए होते ये 4 काम, तो 65 करोड़ के आ जाते अच्‍छे दिन

वित्‍त मंत्री अरुण जेटली की ओर से 1 फरवरी को पेश बजट पर मिडिल क्‍लास को सबसे ज्‍यादा नाराज बताया जा रहा है...

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नई दिल्‍ली। वित्‍त मंत्री अरुण जेटली की ओर से 1 फरवरी को पेश बजट पर मिडिल क्‍लास को सबसे ज्‍यादा नाराज बताया जा रहा है। कई रिपोर्ट में इस बात का दावा किया गया है कि वित्‍त मंत्री ने नए बजट में मिडिल क्‍लास के लिए घोषणाएं करते समय अपना हाथ तंग ही रखा। हालांकि बजट से सबसे ज्‍यादा उम्‍मीद मिडिल क्‍लास ही कर रहा था। जेटली का कहना है कि वह मिडिल क्‍लास को पहले ही रियारत दे चुके हैं, इसलिए बजट में उन्‍हें किसी तरह की रियारत नहीं दी गई।  

 

करीब 3.5 साल पहले पीएम मोदी जब सत्‍ता में आए थे, तो उन्‍होंने देश के लोगों को सपना दिखाया था कि अच्‍छे दिन जरूर आएंगे। हालांकि विपक्ष समेत बहुत से लोगों को आरोप है कि इस बजट से लोगों के अच्‍छे दिन आने रहे। बजट में सरकार ने सबसे ज्‍यादा गांव, गरीब और किसान पर रखा। आइए जानते हैं कुछ ऐसे कदमों के बारे में, जिन्‍हें अगर जेटली उठाते तो करीब 65 करोड़ आबादी वाला मिडिल क्‍लास सबसे ज्‍यादा खुश होता और इसे लगता कि शायद उसके अच्‍छे दिन आ गए। 

 

आगे पढ़ें ऐसे ही कामों के बारे में.... 

 

 

1- इनकम टैक्‍स छूट की सीमा को बढ़ाना  
लंबे समय से टैक्‍स छूट की सीमा 2.5 लाख बनी हुई है। ऐसे में आम लोग सबसे ज्‍यादा इसी बात का इंतजार कर रहे थे। हालांकि इसमें लोगों को किसी तरह की रियायत नहीं मिली। सरकार ने सिर्फ सीनीयर सिटिजन को छूट देकर काम चला लिया। अगर जेटली छूट देते तो करोड़ों नौकरीपेशा लोगों को फायदा होता। 


 

2 - सबके लिए हेल्‍थ इन्‍श्‍योरेंस 
सरकार ने बजट में ऐसी स्‍कीम का ऐलान तो किया, लेकिन इसका लाभ सीमित दायरे में सिर्फ 10 करोड़ बीपीएल परिवारों को मिलेगा। बाकी की आबादी अब भी अछूती है। जबकि भारत में हेल्‍थ मिडिल क्‍लास की बड़ी चिंता है। जहां गंभीर बीमारी एक परिवार के सालों की जमा पूंजी चट कर जाती है। मोदी अगर सबसे के लिए यह स्‍कीम लॉन्‍च करते तो सबसे ज्‍यादा फायदा मिडिल क्‍लास को होता। 

 

 

3- जॉब  
बजट में सरकार ने रोजगार बढ़ाने की बात तो दोहरायी, लेकिन कोई ठोस प्‍लान नहीं पेश किया। सरकार ने 70 लाख जॉब पैदा होने के दावा तो किया, लेकिन वह भी प्राइवेट रिसर्च एजेंसी के आधार पर। देश की 65 करोड़ आबादी 35 साल से नीचे के लोगों की है। एक सरकार जॉब के लिए बड़ा प्‍लान लेकर आती तो देश के हर परिवार को यह बजट टच करता।    

 

 

4 -कैपिटल गेन टैक्‍स की छूट बरकरार रखना  
सरकार ने कैपिटल गेट टैक्‍स की छूट को इस साल बरकरार नहीं रखा। दरसअल 1 साल से अधिक की अवधि में शेयर या स्‍टॉक मार्केट से हुए मुनाफे सरकार टैक्‍स लेगी। सरकार के इस कदम से स्‍टॉक मार्केट में भारी गिरावट देखी जा रही है। इसके चलते सिर्फ 2 दिन में ही मिडिल क्‍साल में आने वाले रीटेल इन्‍वेस्‍टर्स के हजारों करोड़ डूब चुके हैं।

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