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बजट 2018: चुनाव के दबाव का दिखा असर, पॉपुलिस्ट से ज्यादा लोगों की जरूरतें पूरी करने पर फोकस

अगले साल 2019 में होने वाले आम चुनाव और गुजरात इलेक्शन के रिजल्ट का असर इस बजट पर साफ दिखता है।

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नई दिल्ली. बजट सेे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने  कहा था कि वह वोट के लिए पॉपुलिस्ट बजट नहीं लाएंगे। कुछ हद तक वह इसमें वह सफल रहे लेकिन अगले साल 2019 में होने वाले आम चुनाव और गुजरात इलेक्शन के रिजल्ट का असर इस बजट पर साफ दिखता है।

 
वित्त मंत्री अरुण जेटली पर प्रेशर का ही असर है कि अपने पांचवें बजट में पहली बार फिस्कल डेफिसिट के समीकरण को संभाल नहीं पाए हैं। इसलिए उन्होंने  फिस्कल डेफिसिट के अनुमान को रिवाइज्ड करते हुए 3.2 फीसदी से बढ़ाकर 3.5 फीसदी कर दिया है। उन्होंने इस रिस्क पर लोगों की जरुरतों को तरजीह दी है। इसलिए उन्होंने मिडिल क्लास के भारी उम्मीदों के विपरीत उसे इनकम टैक्स फ्रंट पर डायरेक्ट कोई राहत नहीं दी है। यहीं नहीं मार्केट बूम का फायदा उठाने के अब मूड में आ गई हैं। इसलिए उसने मिडिल क्लास की परवाह नहीं करते हुए लॉन्ग टर्म कैपिटल टैक्स लगाने का ऐलान कर दिया है।
 
 
रुरल इंडिया के क्राइसिस को एड्रेस करने की कोशिश
 
नरेंद्र मोदी ने साल 2014 के चुनाव के पहले अपने कैंपेन में यह वादा किया था, कि किसानों को उनकी लागत पर 50 फीसदी प्रॉफिट देने का घोषणा पत्र में भाजपा ने शामिल किया था। पिछले 4 साल में किसानों की जो क्राइसिस सामने आए हैं। उससे यह वादा छलावा दिखने लगा था। अगले साल चुनावों को देखते हुए अब जेटली ने उपज की लागत पर 1.5 गुना एमएसपी देने का फैसला कर, उस वादे को पूरा करने की कोशिश की है। हालांकि अभी इसका मैकेनिज्म क्या होगा, इसका अभी इंतजार है। 22 हजार रुरल हाट को एग्रीकल्चर मार्केट में तब्दील करने का फैसला भी इसी दिशा में उठाया गया कदम है। किसानों की एक बड़ी समस्या प्याज, आलू और टमाटर के प्राइस में जो उतार-चढ़ाव दिखता है उसको भी हल करने की कोशिश की है। इसलिए ऑपरेशन ग्रीन को लान्च करने का भी ऐलान किया है। 
 
मिडिल क्लास को खुश करने से ज्यादा जरूरत समझने पर जोर
 
ऐसी उम्मीद की जा रही थी कि आम चुनावों को देखते हुए सरकार इनकम टैक्स फ्रंट पर मिडिल क्लास को बड़ी राहत देने की उम्मीद थी। यहां पर जेटली ने प्रोफेशनल रवैया अपनाया है, इसलिए चाहे गरीब परिवार के बढ़ते खर्च की प्रॉब्लम को  नई हेल्श इन्श्योरेंस स्कीम लाने की बात कही है। जेटली ने 5 लाख रुपए तक हेल्थ इन्श्योरेंस कवर देने की बात कही है। इसी तरह सीनियर सिटीजन की भी जरुरत को समझते हुए इनकम  टैक्स के मार्चे पर कई सहूलियत दी है। जिससे उनके हाथ में कैश ज्यादा आएगा। मिडिल क्लास पूरी तरह से नाराज न हो इसके लिए स्टैण्डर्ड टैक्स डिडक्शन को फिर से शुरू किया गया है। हालांकि 40 हजार रुपए की जो छूट दी गई है, उसकी भरपाई हेल्थ और एजुकेशन सेस को 3 फीसदी से बढ़ाकर 4 फीसदी कर पूरा करने की कोशिश की गई है।
 
 
23.99 लाख करोड़ रेवेन्यू का अनुमान
 
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 2018-19 का बजट करीब 2399147 लाख करोड़ रुपए का पेश किया है। जिसमें सरकार को कुल टैक्स रेवेन्यू 2271242 रुपए है। कॉरपोरेशन टैक्स से सरकार को उम्मीद है कि 621000 करोड़ रुपए जुटाएगी। जबकि उसे पर्सनल इनकम टैक्स 529000 करोड़ रुपए आने की उम्मीद है। जबकि कस्टम के जरिए 112500 करोड़ रुपए और जीएसटी के जरिए 743900 करोड़ रुपए जुटाने की उम्मीद है। वहीं सरकार ने कुल खर्च साल 2018-19 के लिए 2442213 करोड़ रुपए रखा है। जिससे साल 2018-19 के लिए रेवेन्यु डेफिसिट 2.2 फीसदी और फिस्कल डेफिसिट 3.3 फीसदी रहने का अनुमान जताया गया है।
 
फिस्कल डेफिसिट टारगेट बढ़ाने पर क्रिसिल के चीफ इकोनॉमिस्‍ट डीके जोशी ने moneybhaskar.com को बताया कि बजट में सरकार ने लोगों की जरूरतों और राजकोषीय घाटे के मोर्चे पर संतुलन बनाने का प्रयास किया है। इसके बावजूद आने वाले समय में राजकोषीय घाटा बढ़ सकता है। राजकोषीय घाटा बढ़ने से बांड यील्‍ड बढ़ जाती है और सरकार को कर्ज पर ज्‍यादा ब्‍याज चुकाना होगा। बजट में सरकार ने लोगों की जरूरतों को पूरा करने का प्रयास किया है। कुछ हद तक सरकार ने चुनाव को भी ध्‍यान में रखा है लेकिन इसे पापुलिस्‍ट बजट नहीं कहा जा सकता है। सरकार को राजकोषीय घाटे को नियंत्रित करने के लिए टैक्‍स कलेक्‍शन और विनिवेश पर खास तौर पर फोकस करना होगा।
 
सरकार ऐसे खर्च करेगी अपने पैसे को....
 
साल 2018-19 में जो एक रुपया कमाएगी उसमें 24 पैसे करों और शुल्कों में राज्यों के हिस्से पर खर्च होगा। इसी तरह 9 पैसे डिफेंस पर, 9  पैसे सब्सिडी पर, 18 पैसे इंटरेस्ट पेमेंट पर, 10 पैसे केंद्रीय योजनाओं पर, 9 पैसे केंद्र द्ववारा स्पांसर योजनाओं पर , पेंशन खर्च पर 5 पैसे, वित्त आयोग और ट्रांसफर पर 8 पैसे,  अन्य व्यय पर 8 पैसे खर्च होंगे।
 
 
कहां से आएगा पैसा?
 
सरकार को हर एक रुपए की जो इनकम होगी, उसमें 19 पैसे कॉरपोरेट टैक्स, उधार और दूसरी देयताएं से 19 पैसे, इनकम टैक्स से 16 पैसे, सेंट्रल एक्साइज से 8 पैसे, जीएसटी और दूसरे टैक्स से 23 पैसे, नॉन टैक्स रेवेन्यु 8 पैसे, नॉन डेट कैपिटल रिसिप्ट्स 3 पैसे, कस्टम से 4 पैसे की इनकम होगी।
 
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