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बजट 2018: कॉरपोरेट टैक्स में कटौती को टाल सकती है सरकार

इंडस्ट्री को कॉरपोरेट टैक्सेस में कमी के लिए अभी लंबा इंतजार करना पड़ सकता है।

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नई दिल्ली. इंडस्ट्री को कॉरपोरेट टैक्सेस में कमी के लिए अभी लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। दरअसल 2019 के आम चुनाव से पहले अपना आखिरी पूर्ण बजट पेश कर रही पीएम नरेंद्र मोदी की अगुआई वाली सरकार को रेवेन्यू में कमी की समस्या का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उसके लिए कॉरपोरेट टैक्स को 30 फीसदी से घटाकर 25 फीसदी करने के अपने वादे को पूरा करना मुश्किल हो सकता है। यह पीएम मोदी के लिए बेहद मुश्किल स्थिति है, क्योंकि वह ऐसे हालात में फॉरेन इन्वेस्टर्स को लुभाने की कोशिश कर रहे हैं जब अमेरिका, ब्रिटेन और अन्य देश बिजनेस से जुड़े टैक्सेस को लगातार घटा रहे हैं।

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चार साल में कॉरपोरेट टैक्स घटाने का किया था वादा

ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक पीएम मोदी ने वर्ष 2015 में चार साल में कॉरपोरेट टैक्स को घटाने का वादा किया था, लेकिन सरकार अभी तक इसका रोडमैप भी पेश नहीं कर सकी है। यह सरकार की भारत में इन्वेस्टमेंट क्लाइमेट में सुधार के मिशन का हिस्सा है। वह सरकार लालफीताशाही में कमी, बैड लोन्स की रिकवरी के लिए एसेट्स के लिक्विडेशन में तेजी लाने पर काम कर रही है और बिजनेस की कॉस्ट घटाने के लिए बीते साल जीएसटी लागू किया गया है। वर्ल्ड बैंक के डूइंग बिजनेस इंडेक्स के मुताबिक 'सरलता से टैक्स भुगतान' के मामले में भारत 190 देशों में 119वें पायदान पर है।

 

 

फॉरेन इन्वेस्टमेंट लुभाने की है चुनौती

इन रिफॉर्म्स से भारत को जहां क्रेडिट रेटिंग अपग्रेड कराने में मदद मिली और बीते साल रिकॉर्ड फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट आया, वहीं मोदी सरकार को इकोनॉमी को सपोर्ट देने के लिए इन्वेस्टमेंट लुभाने की जरूरत है जिसकी रफ्तार बीते चार साल में सबसे सुस्त रहने का अनुमान है।

 

 

दुनिया में घट रही है टैक्स रेट

टैक्स को लेकर दुनिया भर में कॉम्पिटीशन बढ़ता जा रहा है। अमेरिका कॉरपोरेट टैक्स में खासी कमी कर चुका है, जिसके चलते एप्पल, वालमार्ट और जेपी मॉर्गन चेज जैसी बड़ी कंपनियां निवेश, हायरिंग या वेजेस बढ़ाने का ऐलान कर रही हैं।

ईवाई के एक टैक्स पार्टनर जयेश सांघवी ने कहा, 'अमेरिका ने कॉरपोरेट टैक्स रेट्स को कॉम्पीटिटिव बना दिया है और भारत को कदम उठाने की जरूरत है।' अगर ऐसा नहीं होता है तो कंपनियों टैक्स बेनिफिट के मौके तलाशेगी।

 

 

बीते साल सरकार ने किया था यह ऐलान

सरकार ने बीते साल 50 करोड़ रुपए के कम टर्नओवर वाली छोटी कंपनियों के लिए रेट घटाकर 25 फीसदी कर दिया था। कंपनियां इस साल बजट में वित्त मंत्री अरुण जेटली से और कटौती की उम्मीद कर रही हैं।

हालांकि पीएम मोदी के सामने राजकोषीय संबंधी मुश्किलें बनी हुई हैं। जीएसटी लागू होने के बाद रेवेन्यू कलेक्शन पर भी प्रेशर बना हुआ है। अगले साल चुनाव होने हैं, ऐसे में सरकार द्वारा रूरल सेक्टर में खर्च को प्रायोरिटी दिए जाने की उम्मीद है। इससे भी बजट डेफिसिट की संभावनाएं पैदा हो रही हैं।

 

क्या कर रहे हैं दूसरे देश

जापान ने वेजेस और निवेश को बढ़ावा देने के लिए कॉरपोरेट टैक्स में कमी की शुरुआत कर दी है। हंगरी में टैक्स रेट घटकर 9 फीसदी पर आ गया है, फ्रांस की 2022 तक इसे 25 फईसदी पर लाने की योजना है और ब्रिटेन 2020 तक इसे 17 फीसदी के स्तर पर लाने की दिशा में काम कर रहा है।

 

 

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