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बिज़नेस न्यूज़ » Budget 2018 » TaxationBudget 2018 - कभी भारत में लगा था ब्रेस्‍ट टैक्‍स, ये हैं दुनिया के 9 अजीबोगरीब टैक्‍स

Budget 2018 - कभी भारत में लगा था ब्रेस्‍ट टैक्‍स, ये हैं दुनिया के 9 अजीबोगरीब टैक्‍स

 
नई दिल्‍ली. वित्‍त मंत्रालय में हलवा सेरेमनी के साथ ही 2018-19 के लिए बजट डाक्‍यूमेंट की प्रिंटिंग शुरू हो गई। बजट सरकार के आमदनी और खर्चे का पूरा ब्‍योरा होता है। साथ ही इसमें सरकार यह जानकारी देती है कि वह किस सेक्‍टर के लिए कितना खर्च करने जा रही है, जिससे कि आम आदमी, बिजनेसमैन से लेकर देश की इकोनॉमी को भी फायदा हो। कई बार आमदनी बढ़ाने के लिए बजट के जरिए सरकार कई तरह के नए टैक्‍स लगाती है, तो वहीं, टैक्‍सपेयर्स को राहत देने के लिए कुछ जगहों पर छूट भी देती है। लगभग हर लोकतांत्रिकदेश बजट की प्रक्रिया से गुजरता है। 

 
 
इन सबके बीच, कई बार अलग-अलग देशों की सरकारों ने ऐसे टैक्‍स लगाए, जो कि समझ से परे थे। भारत में भी इस तरह के टैक्‍स लगे हैं। आम बातचीत में इन टैक्‍सेस को अजोबोगरीब टैक्‍या वीयर्ड टैक्‍स कहते हैं। इस तरह के कई टैक्‍स समय के साथ समाप्‍त हो गए तो कुछ को विरोध के चलते खत्‍म करना पड़ा। आइए जानते भारत समेत दुनिया के ऐसे 9 अजाबोगरीब टैक्‍स के बारे में... 
 
 

1. ब्रेस्‍ट टैक्‍स

दक्षिण भारत में स्‍टेट ऑफ त्रावनकोर (अब केरल) में महिलाओं पर ब्रेस्‍ट टैक्‍स (मुलाक्‍करम टैक्‍स) लगाया जाता था। 19वीं सदी के शासकों ने वहां यह नियम बनाया था कि छोटी जाति की महिलाएं अपने तन को ऊपर से ढक नहीं सकतीं। उन्‍हें उसे खुला रखना होगा। अगर कोई महिला अपना ऊपरी शरीर ढकती हैं तो उसे टैक्‍स देना होगा। यहां की एक बहादुर महिला नांगेली के बलिदान की बदौलत यह प्रथा खत्‍म हुई। इस महिला ने अपने तन को ढका और टैक्‍स लेने वाले अधिकारी को अपनी ब्रेस्‍ट काटकर ही टैक्‍स के रूप में दे दी। नांगेली की मौत हो गई, मगर उस घटना के अगले ही दिन त्रावनकोर के महाराजा ने यह टैक्‍स हटा दिया।
 

2. फैट टैक्‍स

2016 में केरल सरकार ने बर्गर, पिज्‍जा और मोटापा बढ़ाने वाले इसी तरह के जंक फूड पर 'फैट टैक्‍स' लगाया। सरकार ने इसकी दर 14.5 फीसदी तय की है। सरकार का मकसद लोगों को ऐसी चीजें खाने से रोकना है, जिनसे मोटापा बढ़ता है।  
 

3. घूस देने पर थी टैक्स छूट

साल 2002 तक कुछ खास परिस्थितियों में जर्मनी में घूस पर टैक्स छूट मिलती थी। 1995 में बिजनेस वीक मैगजीन के एडिटोरियल के मुताबिक, इन नियमों के हिसाब से कुछ मामलों में घूस लीगल थी हालांकि इस नियम का कभी-कभी ही इस्तेमाल होता था। इसके तहत घूस देने वाले को दूसरी पार्टी का नाम बताना होता था। साथ ही इस लेन-देन का या फिर दोनों पक्षों का कोई क्रिमिनल कनेक्शन न होना भी जरूरी था। इसका हिसाब सीधा था, इससे घूस का लेन-देन भी सामने आ जाता था और घूस देने वाले को टैक्स छूट मिल जाती थी। हालांकि घूस लेने वाले की आय पर टैक्स लगता था। नियम का बहुत फायदा नहीं होने और गलत इस्तेमाल ज्यादा होने के बाद यह टैक्स हटा लिया गया।
 
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