Home » Budget 2018 » Taxationक्‍या है लॉन्‍ग टर्म कैपिटल गेन टैक्‍स? कितना और किन अर्निंग पर लगेगा LTCG टैक्‍स - know what is Long Term Capital Gain Tax

समझिए लॉन्‍ग टर्म कैपिटल गेन टैक्‍स की ABCD...., ऐसे कटेगी आपकी जेब

टैक्‍स तभी लगेगा जब आप शेयर मार्केट या इससे लिंक्‍ड स्‍कीम से 1 लाख रुपए से ज्‍यादा की अर्निंग करेंगे...

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नई दिल्‍ली। वित्‍त मंत्री अरुण जेटली की ओर से 1 फरवरी को बजट में ऐलान किए जाने के बाद लॉन्‍ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्‍स की चर्चा चारों ओर हो रही है। जेटली ने इस बजट में एलान किया है कि स्‍टॉक मार्केट से 1 साल की अवधि से ज्‍यादा वक्‍त में हुई 1 लाख रुपए से ज्‍यादा की कमाई पर सरकार 10 फीसदी के रेट से लॉन्‍ग टर्म कैपिटल गेन टैक्‍स वसूलेगी। इसके बाद अब शेयर और इक्विटी म्यूचुअल फंड दोनों से कमाई होने पर आपको 10 फीसदी का टैक्‍स देना होगा। हालांकि यह टैक्स पुराने फायदे पर नहीं लगेगा। 31 जनवरी 2018 के बाद के फायदे पर ही टैक्स लगेगा। आइए जानते हैं कि अखिर लॉन्‍ग टर्म कैपिटल गेन टैक्‍स क्‍या है। 

 

क्‍या है लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्‍स 

लंबी अवधि में किसी भी चल या अचल संपत्ति पर मिलने वाले प्रॉफिट पर लगने वाले टैक्‍स को लॉन्‍ग टर्म कैपिटल गेन टैक्‍स कहा जाता है। यह देश में पहले से ही मौजूद रहा है। हालांकि यह पहली बार स्‍टॉक मार्केट पर लगा है। इससे पहले यह प्रॉपर्टी समेत कई चीजों पर लगता रहा है। अलग-अलग सेगमेंट के हिसाब से लॉन्‍ग टर्म का कैलकुलेशन अलग-अलग होता है। यानी हर तरह की कैटगरी में लॉंन्‍ग टर्म कैपिटल गेट टैक्‍स 1 साल से ज्‍यादा की अवधि में हुए मुनाफे पर नहीं लगता है।    

 

LTCG का शेयर मार्केट पर क्‍या होगा असर 

सरकार ने बजट में शेयर पर LTCG टैक्‍स लगाने का जो प्रस्‍ताव किया है, उसके मुताबिक, 1 साल से ज्‍यादा की अवधि में शेयर मार्केट से होने वाली कमाई पर सरकार 10 फीसदी का टैक्‍स वसूलेगी। यह टैक्स मार्केट लिंक्‍ड इक्विटी यानी म्‍यूचुअल फंड और एसआईपी से होने वाले प्रॉफिट पर भी लगेगा। इसके चलते आपका प्रॉफिट घटेगा। 

 

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शेयर पर ऐसे लगेगा LTCG टैक्‍स 
जैसा की ऊपर कहा गया है कि यह टैक्‍स तभी लगेगा जब आप शेयर मार्केट या इससे लिंक्‍ड स्‍कीम से 1 लाख रुपए से ज्‍यादा की अर्निंग करेंगे। फिलहाल यह 1 अप्रैल 2018 के बाद लागू होगा। इसे ऐसे समझें। मान लीजिए आप 1 अप्रैल 2018 से 5 साल के लिए 5000 रुपए महीने की एसआईपी शुरू करते हैं। यहां आपको 10 फीसदी का एवरेज सालाना रिटर्न मिलता है। मतलब आपको इन्‍वेस्‍टमेंट 300,000 का हुआ और रिटर्न के हिसाब से बढ़कर करीब 390,412 रुपए का फंड बना। मान लीजिए आप इस फंड को 2024 में निकालते हैं। तब तक आपका फंड बढ़कर 437,261 हुआ। अब आपके इस पैसे पर कुछ इस तरह से टैक्‍स कैलकुलेट होगा। सबसे पहले आपके टोटल फंड में से आपका इन्‍वेस्‍टमेंट यानी प्रिंसिपल अमाउंट घटेगा। मतलब 437,261-300,000=137,261। क्‍योंकि सरकार आपसे 1 लाख तक के रिटर्न पर कोई टैक्‍स नहीं लेगी। इस लिए 137,261-100,000= 37,261। अब सरकार आपसे जो टैक्‍स वसूलेगी वह 37,261 का 10 फीसदी यानी 3,726 रुपए होगा। 


 

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और कहां लगता है कैपिटल गेन टैक्‍स 
शेयर मार्केट से पहले सरकार घर, संपत्ति, जेवर, कार और बॉन्ड, आदि की बिक्री से हासिल हुए प्रॉफिट पर कैपिटल गेन टैक्‍स वसूलती रही है। यहीं कई फाइनेंशियल प्रोडक्‍ट जैसे बैंक एफडी और एनपीएस से मिले रिटर्न पर भी सरकार कैपिटल गेन टैक्‍स वसूलती है।

 

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एक समान नहीं है लान्‍ग टर्म की परिभाषा 
दरअसल लॉन्‍ग टर्म कैपिटल गेन की अवधि अलग-अलग मामलों में अलग-अलग हो सकती है। जैसे अगर कोई Property आप 3 साल तक अपने पास रखकर बेचते हैं तो उसपर लॉन्‍ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्‍स लगेगा। अचल संपत्तियों (Immovable Properties) जैसे जमीन, Building, घर आदि के मामले में लॉन्‍ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्‍स की समय सीमा वित्तीय वर्ष 2017-18 से 2 साल कर दी गई है। चल संपत्तियों (Movable Properties) जैसे Jewellery, बॉन्ड, Debt Oriented Mutual Funds आदि के मामले में यह 3 साल ही है। वहीं शेयर के मामले में यह 1 साल की गई है। इसी तरह अलग अलग मामलों में लॉन्‍ग टर्म कैपिटल गेन टैक्‍स का रेट भी अलग अलग है।  

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