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बजट 2018: 'मिस्‍टर क्‍लीन' के नाम से फेमस थे यह वित्‍त मंत्री, भर दिया था सरकार का खजाना

भारतीय के इतिहास में कुछ बजट मील का पत्‍थर साबित हुए। इनमें वह बजट भी शामिल है, जिसे राजीव गांधी ने पेश किया था।

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नई दिल्‍ली. भारतीय बजट के इतिहास में कुछ बजट मील का पत्‍थर साबित हुए। इनमें वह बजट भी शामिल है, जिसे कभी 'मिस्‍टर क्‍लीन' के नाम से मशहूर राजीव गांधी ने पेश किया था। राजीव गांधी को यह नाम मीडिया की ओर से दिया गया था। इसके पीछे भी एक कहानी है। आइए आपको बताते हैं कि क्‍यों राजीव गांधी 'मिस्‍टर क्‍लीन' कहलाए और उन्‍होंने देश को क्‍या खास दिया- 

 

यह रही मिस्‍टर क्‍लीन कहलाने की वजह 

राजीव गांधी जब देश के पीएम बने तो उनकी राजनीतिक समझ गिनती के दिनों की थी। हालांकि प्रचंड बहुमत के साथ पीएम बनने के बाद उन्‍होंने सुधारों की नीति अपनाई। इन सुधारों में इकोनॉमी से लेकर संविधान तक शामिल हैं। वह देश के पहले ऐसे पीएम थे, जिन्‍होंने सार्वजनिक तौर पर सरकारी तंत्र में भ्रष्‍टाचार की बात मानी थी। उनका वह बयान आज भी याद किया जाता था, जिसमें उन्‍होंने कहा था कि सरकार आम आदमी के लिए एक रुपए भेजती है और आम आदमी को 20 पैसे मिलते हैं। इसी के चलते उन्‍हें मीडिया ने 'मिस्‍टर क्‍लीन' नाम दिया था।

 

आगे पढ़ें- राजीव गांधी ने क्‍यों पेश किया बजट

राजीव ने क्‍यों पेश किया बजट 

राजीव गांधी ने पीएम बनने के बाद वीपी सिंह को अपना वित्‍त मंत्री बनाया था। वीपी सिंह की ओर से इंडियन कॉरपोरेट घरानों के यहां रेड डालने के बाद उठे विवाद के चलते उन्‍हें वित्‍त मंत्री के पद से हटाकर रक्षा मंत्रालय दे दिया गया। आगे से वित्‍त मंत्रालय को लेकर फिर कोई विवाद नहीं हो, इसके लिए राजीव गांधी ने वित्‍त मंत्रालय का प्रभार अपने पास रखा। यही नहीं जब वर्ष 1987 के फरवरी महीने की आखिरी तारीख को उन्‍होंने बजट पेश किया तो वो बजट भारतीय इतिहास के लिए मील का पत्‍थर हो गया।
 
आगे पढ़ें- राजीव गांधी के बजट की क्‍या थी खासियत

राजीव गांधी के बजट की खासियत

मिनिमिम कॉरपोरेट टैक्स का प्रावधान इसी बजट में किया गया। मौजूदा दौर में इसे MAT कहा जाता है। बाद के दिनों में कॉरपोरेट टैक्स भारत सरकार की आय का प्रमुख स्रोत बन गया। 1987 के बजट से सरकारी खजाने को इस टैक्स से 75 करोड़ रुपए के अतिरिक्त राजस्व की उम्मीद थी। कॉरपोरेट टैक्स का आइडिया अमेरिका से लिया गया था। साथ ही, इस बजट में सिगरेट पर भी टैक्स बढ़ाने की एलान किया गया।

 

आगे पढ़ें- बाद के दिनों में यह टैक्‍स बना सरकार की आय का बड़ा जरिया

बाद में बना सरकार की आय का बड़ा जरिया

यूं तो राजीव गांधी ने इस टैक्‍स को वीपी सिंह के अधूरे काम के रूप में लागू किया था लेकिन बाद के दिनों में यह सरकार के लिए आय का सबसे बड़ा जरिया बन गया। यही नहीं 2010 के आसपास टोटल रेवेन्‍यू में इसका हिस्‍सा करीब 10 फीसदी पहुंच गया। मौजूदा समय में कॉरपोरेट टैक्‍स कंपनियों के टर्नओवर के हिसाब से 25 से 30 फीसदी के बीच है। 

 

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