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बजट 2018 - जेटली आज पेश करेंगे बजट, अच्‍छे दिन और ग्रोथ के बीच दिखाना होगा बैलेंस

नई दिल्‍ली. वित्‍त मंत्री अरुण जेटली गुरुवार को वित्‍त वर्ष 2018-19 के लिए बजट पेश करेंगे। यह बजट इसलिए भी खास है क्‍योंकि इस साल 8 राज्‍यों में विधान सभा चुनाव होने हैं और अगले साल (2019) मोदी सरकार लोकसभा चुनाव में जाने वाली है।

 

टैक्‍सपेयर्स को टैक्‍स छूट की लिमिट बढ़ने की उम्‍मीद है। किसान अपनी इनकम डबल होने के पुख्‍ता कदम की टकटकी लगाए हैं। युवा रोजगार को लेकर बजट से आस लगाए हैं। कॉरपोरेट जगत कारोबार में सहूलियत और टैक्‍स में रियायत की उम्‍मीद कर रहा है। खुद सरकार देश की विकास दर को रफ्तार देने के साथ-साथ मजबूत आर्थिक स्थिति चाहती है, जिससे कि विदेशी निवेशकों को अधिक से अधिक आकर्षित किया जा सके। अब, इन उम्‍मीदों के साथ वित्‍त मंत्री जेटली बजट पेश करेंगे।

 

बजट 2018: मिडिल क्‍लास पर इनकम टैक्‍स का बोझ कम कर सकते हैं जेटली


लोकलुभावन की क्‍या है गुंजाइश?

अगले साल लोकसभा के चुनाव हैं, ऐसे में मोदी सरकार के इस कार्यकाल का यह आखिरी पूर्ण बजट है। इसलिए इसे चुनावी बजट कहा जा सकता है। माना जा रहा है कि मोदी सरकार अगले चुनाव में जाने के लिए कुछ ऐसे ऐलान जरूर करेगी, जिससे कि वोटर्स को अपनी ओर खींचा जा सके। सीधा मतलब यह कि बजट में कुछ लोक लुभावन घोषणाएं हो सकती है। हालांकि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले दिनों अपने मीडिया इंटरव्‍यू में इस बात के संकेत दिए कि बजट लोकलुभावन नहीं होगा और सरकार अपने रिफॉर्म्‍स के एजेंडे पर आगे बढ़ती रहेगी।

 

क्रिसिल के चीफ इकोनॉमिस्‍ट डीके जोशी मानते हैं कि मिडिल क्‍लास के लोगों को इनकम टैक्‍स के मोर्चे पर मोदी सरकार राहत दे सकती है। हालांकि सरकार ऐसा कोई कदम नहीं उठाएगी जिससे टैक्‍स बेस कम हो। नोटबंदी के बाद इनकम टैक्‍स कलेक्‍शन बढ़ा है। यह रेवेन्‍यू के मोर्च पर सरकार के लिए सकारात्‍मक है। 

 

इस साल आठ राज्‍यों में हैं चुनाव 

इस साल देश के आठ राज्‍यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। इनमें तीन राज्‍य मध्‍य प्रदेश, राजस्‍थान और छत्‍तीसगढ़ में बीजेपी सरकार में है। इसके अलावा, मेघायल, त्रिपुरा, नगालैंड, कर्नाटक और मिजोरम में भी विधानसभा चुनाव होने हैं। इसलिए, ऐसे उम्‍मीद है कि बजट के जरिए वित्‍त मंत्री इन राज्‍यों को डायरेक्‍ट या इनडायरेक्‍ट रूप से कोई सौगात दे सकते हैं। 

 

क्‍या चाहते हैं टैक्‍सपेयर? 

moneybhaskar.com के 'सुनिए वित्‍तमंत्रीजी' पोल में करीब 45 फीसदी लोगों ने इनकम टैक्‍स की छूट बढ़ाने की मांग की है। इनकम टैक्‍स छूट बढ़ाने की मांग करने वालों में से कुछ लोग चाहते हैं कि यह छूट कम से कम 3 लाख रुपए जरूर की जाए, वहीं कुछ लोगों ने कहा है कि यह छूट 5 लाख रुपए तक कर देनी चाहिए। लोगों का कहना है कि पिछले कुछ सालों में महंगाई तेजी से बढ़ी है, जबकि आमदनी उस तेजी से नहीं बढ़ी है। इसलिए अगर इनकम टैक्‍स की छूट बढ़ाई जाती है तो उनको वाकई राहत मिल सकेगी। 

 

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अच्‍छे दिन के लिए जरूरी हैं ये 5 एलान 

मोदी सरकार अच्‍छे दिन के नारे के साथ सत्‍ता में आई थी। लेकिन, हकीकत यह है कि अभी तक हर आम और खास भारतीय को अच्‍छे दिन का इंतजार है। वित्‍त मंत्री इस बार बजट में यदि पांच खास एलान कर दें तो इन्हें अच्‍छे दिनों की आहट जरूर कर सकते हैं। 

 

#1.  टैक्‍स छूट

टैक्‍स भरने वालों में नौकरीपेशा लोगों की तादाद सबसे ज्‍यादा है। किसी तरह की टैक्‍स छूट उन्‍हें सीधा राहत देगी। लंबे समय से टैक्‍स छूट की सीमा 2.5 लाख बनी हुई है। ऐसे में आम लोग सबसे ज्‍यादा इसी बात का इंतजार कर रहे हैं कि उन्‍हें टैक्‍स छूट मिले। 


#2- यूनिवर्सल हेल्‍थ स्‍कीम

सरकार की दो स्‍कीम जन धन से करीब 38 करोड़ और सुरक्षा बीमा योजना से करीब 18 करोड़ लोग जुड़े। इसी तरह की योजना से देश की 25 फीसदी आबादी  लाभन्वित हो सकती है। कई बार देखा जाता है कि आम आदमी की सालों की बचत एक बार की बीमारी में चट हो जाती है। लंबे समय से यह मांग हो रही है कि विदेशों के तर्ज पर ऐसी कोई स्‍कीम आए। अगर सरकार इस तरह की हेल्‍थ स्‍कीम का ऐलान करती है तो गरीबों और मिडिल क्‍लास को सीधी बड़ी राहत मिल सकती है। 


#3. उपज की सही कीमत

देश की 50 फीसदी से ज्‍यादा आबादी खेती पर निर्भर है। कोई भी बड़ा और सटीक कदम आधी आबादी को टच करेगा। 2014 में मोदी ने दावा किया था कि उनकी सरकार 2022 तक किसानों की आय दोगुनी कर देगी। हालांकि पिछले साल हुए किसाना आंदोलन और हाल का इकोनॉमिक सर्वे दोनों बताते हैं कि मोदी इस मोर्चे पर अब भी फेल है। 


#4. रोजगार

देश की 65 करोड़ आबादी 35 साल से नीचे के लोगों की है। रोजगार का बड़ा ऐलान देश की आधी आबादी को टच कर सकता है। रोजगार मोदी सरकार की सबसे दुखती रग रही है। हाल में आई कई रिपोर्ट बताती हैं कि रोजगार पैदा करने वाली स्किल डेवलपमेंट जैसी कई योजनाएं अब भी सिरे नहीं चढ़ पाई हैं। 


#5. कैपिटल गेन टैक्‍स छूट 

रिटेल इन्‍वेस्‍टर्स का भरोसा कमजोर होगा और पीक पर चल रहा स्‍टॉक मार्केट तेजी के साथ गिरेगा। दरसअल एक साल से अधिक की अवधि में शेयर या स्‍टॉक मार्केट से हुए मुनाफे सरकार टैक्‍स नहीं लेती है। हालांकि कहा रहा है कि सरकार यह सीमा 2 साल करने जा रही है। स्‍टॉक मार्केट अभी पीक पर है। ऐसे में सरकार अगर यह कदम उठाती है तो रिटेल इन्‍वेस्‍टर्स का भरोसा कमजोर होगा और मार्केट में गिरावट आएगी।   

 

इकोनॉमिक सर्वे ने क्‍या दिए हैं संकेत? 

वित्‍त मंत्री अरुण जेटली की ओर से बीते सोमवार को लोकसभा में 2017-18 के इकोनॉमिक सर्वे में अर्थव्‍यवस्‍था की रिपोर्ट सामने आई है, उससे साफ है कि सरकार को अभी और बहुत कुछ करना है। इकोनॉमिक सर्वे से इस बात की झलक मिली है कि बजट में जॉब, एजुकेशन और एग्रीकल्‍चर व रूरल डेवलपमेंट के लिए कुछ बड़े एलान हो सकते हैं।

 

इकोनॉमिक सर्वे में सुझाव दिया गया है कि सरकार को मध्‍यम अवधि में शिक्षित और स्‍वस्‍थ लेबर फोर्स तैयार करने की दिशा में काम करना चाहिए। मोदी सरकार को स्किल इंडिया प्रोग्राम पर खास तौर पर फोकस करना चाहिए। इंडस्‍ट्री की यह काफी समय से शिकायत रही है कि भारत के शिक्षा संस्‍थानों से निकलने वाले युवाओं में नौकरी पाने लायक स्किल नहीं होती है। 

 

डीके जोशी का मानना है कि किसानों की स्थिति को बेहतर बनाने के लिए जरूरी है कि सरकार उनकी इनकम बढ़ाने के लिए कदम उठाए। सरकार के सामने यह चुनौती है कि वह इसके लिए क्‍या करती है। या तो सरकार किसानों को सीधे पैसा दे या उनका कर्ज माफ करें। अगर सरकार ऐसा कदम उठाती है तो यह पापुलिज्‍म होगा। मोदी सरकार के पिछले तीन साल के कार्यकाल में नौकरियों को लेकर लेबर ब्‍यूरो का आंकड़ा बताता है कि इस अवधि में 60 फीसदी तक नई नौकरियां कम हुईं हैं। जोशी के अनुसार, सरकार को नौकरियां पैदा करने के लिए इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर में निवेश बढ़ाना होगा। 
 

कैसी है आर्थिक स्थिति? 

सीएसओ की ओर से जारी जीडीपी के एडवांस एस्टीमेट के मुताबिक वित्त वर्ष 2017-18 में जीडीपी ग्रोथ 6.5 फीसदी रह सकती है, जो बीते 4 साल यानी मोदी सरकार के कार्यकाल का सबसे निचला स्तर होगा। ऐसे में मोदी सरकार के सामने जीडीपी ग्रोथ को पटरी लाने की बड़ी चुनौती होगी। इकोनॉमिक सर्वे के अनुसार, फाइनेंशियल ईयर 2019 में वित्तीय घाटे (फिस्‍कल डेफिसिट) के लक्ष्य में मामूली बढ़त संभव है।

 

फाइनेंशियल ईयर 2019 में वित्तीय घाटे का लक्ष्य 3 फीसदी रहने का अनुमान है। जीएसटी कलेक्शन में सुधार की उम्मीद है और आगे जीएसटी रेवेन्यू में बढ़ोतरी होगी। महंगाई की बात करें तो आर्थिक सर्वे के मुताबिक, महंगाई काबू में बनी हुई है। चालू वित्‍त वर्ष के दौरान कंज्‍यूमर प्राइस इंडेक्‍स (सीपीआई) 3.3 फीसदी रही है, जो पिछले 6 साल में सबसे न्‍यूनतम स्‍तर है।


मोदी सरकार के लिए क्रूड इस समय बड़ी चुनौती है। इकोनॉमिक सर्वे में भी फाइनेंशियल ईयर 2018-19 में क्रूड की कीमतों में 12% बढ़ोत्तरी का अनुमान जताया गया है। इससे साफ है कि अगर ऐसा होता है तो यह इकोनॉमी के लिए बड़ी मुसीबत साबित हो सकता है। देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें पहले ही अपने उच्चतम स्तर पर बनी हुई हैं।

 

Live Budget 2018 News - आम बजट 2018 से जुड़ी हर खबर

 

बता दें, ब्रेंट क्रूड की कीमतें 70 से 71 डॉलर के बीच बनी हुई हैं। ऐसे में अगर 12 फीसदी कीमतें और बढ़ती हैं तो ब्रेंट क्रूड 80 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकता है। इसका असर पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर भी पड़ेगा, जिससे देश में महंगाई भी बढ़ सकती है।

 

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Live Update

  • 01-02-2018 | 10:49 AM

    जेटली आज पेश करेंगे बजट, अच्‍छे दिन और ग्रोथ के बीच दिखाना होगा बैलेंस #BudgetWithMB #AamBudget2018 #आमबजट2018:



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