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बजट 2018 : ये हो सकते हैं रेंटल हाउसिंग के मॉडल, बाउचर-समान किराये पर होगा फोकस

बजट 2018 में रेंटल हाउसिंग को प्रमोट करने की घोषणा हो सकती है

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नई दिल्‍ली। इकोनॉमिक सर्वे 2017-18 में कहा गया है कि सरकार को केवल घर बनाने या लोगों को मालिकाना हक देने की योजना पर काम नहीं करना चाहिए, बल्कि लोगों के लिए रेंटल हाउसिंग पर भी फोकस करना चाहिए। रियल एस्‍टेट एक्‍सपर्ट्स और सरकारी सूत्र भी मानते हैं कि बजट 2018-19 में रेंटल हाउसिंग को प्रमोट करने की घोषणा हो सकती है। हालांकि मोदी सरकार की ओर से नेशनल अर्बन रेंटल हाउसिंग पॉलिसी का ड्राफ्ट भी तैयार है, लेकिन अब तक इस पॉलिसी को कैबिनेट की मंजूरी नहीं मिली है। 

 

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क्‍या है मकसद 
इकोनॉमिक सर्वे में कहा गया है कि शहरी क्षेत्रों में जहां 2 करोड़ घरों की जरूरत है, वहीं लगभग 1 करोड़ 10 लाख बने-बनाए घर खाली पड़े हैं। यदि इन घर मालिकों को प्रमोट किया जाए तो वे इन घरों को किराये पर दे सकते हैं, जिससे घरों की कमी दूर हो सकती है। अब तक आए सर्वे बताते हैं कि हर शहर में 30 से 40 फीसदी आबादी फ्लोटिंग होती है, जो यहां से वहां शिफ्ट होती रहती है और घर खरीदना नहीं चाहती, बल्कि किराये पर ही रहती है। इसलिए रेंटल हाउसिंग पॉलिसी की जरूरत महसूस की गई। 

 

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एक्‍ट का इरादा त्‍यागा 
दरअसल, रेंटल हाउसिंग को लेकर कई सालों से चर्चा चल रही है। पहले यूपीए और अब भाजपा सरकार रेंटल हाउसिंग को प्रमोट करने की बात कह रही है। 2015 में नेशनल रेंटल हाउसिंग पॉलिसी का ड्राफ्ट भी तैयार किया गया। इससे पहले एक मॉडल एक्‍ट लाने पर विचार किया गया, लेकिन राज्‍यों द्वारा उत्‍साह न दिखाने के कारण मॉडल टेनन्‍सी एक्‍ट का विचार त्‍याग दिया। 

 

सोशल रेंटल हाउसिंग का मॉडल 
रिटायर्ड अर्बन सेक्रेट्री सुधीर कृष्‍णा ने कहा कि सरकार रेंटल हाउसिंग के अलग-अलग मॉडल पर काम कर रही है। एक मॉडल के मुताबिक, सोशल रेंटल हाउसिंग को प्रमोट कर सकती है। इस मॉडल के तहत सरकार माइग्रेंट लेबर या शहरी गरीबों के लिए मास हाउसिंग प्रोजेक्‍ट तैयार करेगी। इसके तहत डोरमेटरी, हॉस्‍टल या पेइंग गेस्‍ट जैसी सुविधा दी जा सकती है। इतना ही नहीं, सरकार ये प्रोजेक्‍ट प्राइवेट सेक्‍टर को भी पीपीपी मॉडल के तहत सौंप सकती है। जैसे कि- सरकार की ओर से जमीन मुहैया कराई जाए, जिसके एक हिस्‍से पर प्राइवेट डेवलपर्स रेंटल हाउसिंग के लिए फ्लैट बनाएं और दूसरे हिस्‍से पर कॉमर्शियल या रेंसिडेंशियल फ्लैट बना कर बेच सकें। इसके अलावा सरकार कारपोरेट सेक्‍टर को भी प्रमोट कर सकती है, जो अपने स्‍टाफ को हाउसिंग प्रोवाइड कराएंगे। 

 

बाउचर देगी सरकार 
एक प्रस्‍ताव यह है कि देश की 100 स्‍मार्ट सिटीज में बाउचर के माध्‍यम से रेंट का भुगतान किया जाएगा। इसके लिए लगभग 2713 करोड़ रुपए का खर्च आने का अनुमान है। यह बाउचर अर्बन पुअर (बीपीएल) और माइग्रेंट लेबर को दिए जाएंगे। किराएदार ये बाउचर मकान मालिक को देंगे और मकान मालिक सरकार से इसके बदले पैसा ले सकेंगे। अगर यह मॉडल सफल रहा तो इसे दूसरे शहरों में भी लागू किया जा सकता है। 

 

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किराया होगा समान 


मकान मालिकों द्वारा घर किराये पर न देने के पीछे कई कारण हैं। जिसमें कानूनी अड़चनें भी एक है। अब तक लागू कानून के मुताबिक किरायेदार तय समय के बाद घर खाली करने के लिए बाध्‍य नहीं किया जा सकता। सरकार इस कानून में भी बदलाव ला सकती है। साथ ही, यह भी व्‍यवस्‍था की जाएगी कि एक एरिया में किराये की दर समान हो, ताकि किरायेदार और मकान मालिक के बीच झगड़े न हों। 

 

रेंट टू ऑन स्‍कीम
सरकार एक और स्‍कीम पर काम कर रही है, जिसे रेंट-टू-ऑन नाम दिया गया है। इसके तहत सरकार घर बना कर माइग्रेंट लोगों को किराये पर देगी, जिसे बाद में ईजी इंस्‍टॉलमेंट पर खरीदने का मौका दिया जाएगा। 

 

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