Home » Budget 2018 » Railway/Infraआम बजट 2018 में हाउसिंग सेक्‍टर को मिल सकता है बड़ा पैकेज, India Union Budget 2018 - Housing sector may get big package

आम बजट 2018: हाउसिंग सेक्‍टर पर होगा फोकस, ये हो सकती हैं घोषणाएं

बजट 2018 में सरकार हाउसिंग सेक्‍टर को बूस्‍ट देने के लिए कई अहम घोषणाएं कर सकती हैं।

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नई दिल्‍ली. आम बजट 2018 में सरकार हाउसिंग सेक्‍टर को बूस्‍ट देने के लिए कई अहम घोषणाएं कर सकती हैं। एक्‍सपर्ट्स का कहना है कि पिछले तीन साल के दौरान सरकार ने कई अच्‍छे कदम उठाए हैं, लेकिन अभी भी कुछ ऐसी दिक्‍कतें सामने आ रही हैं, जिस कारण हाउसिंग सेक्‍टर में बूस्‍ट नहीं आ पा रहा है। डेवलपर्स भी मानते हैं कि अब ज्‍यादा कुछ करने की जरूरत नहीं, बस कुछ व्‍यवहारिक घोषणाएं करने से सेक्‍टर को काफी फायदा होगा। 

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क्‍या है संभावनाएं?

आम बजट 2018 में सरकार रेंटल हाउसिंग को प्रमोट करने के लिए कुछ अहम कदम उठा सकती है। जैसेकि रेंटल इनकम पर टैक्‍स में छूट की सीमा बढ़ाई जा सकती है। अभी रेंटल इनकम पर टैक्‍स छूट की सीमा 30 फीसदी है। इसे बढ़ाया जा सकता है। इसके अलावा मास रेंटल प्रोजेक्‍ट्स को भी इन्‍सेंटिव देने पर विचार किया जा रहा है। मास रेंटल से आशय यह है कि डेवलपर्स जो प्रोजेक्‍ट्स केवल रेंटल हाउसिंग के लिए बनाएंगे, उन्‍हें जमीन और कंस्‍ट्रक्‍शन पर इन्‍सेंटिव मिलने की संभावना है।  सूत्रों के मुताबिक, बजट में उन राज्‍यों को इन्‍सेंटिव देने की भी घोषणा की जा सकती है, जो रेसिडेंशियल प्रोजेक्‍ट्स से संबंधित सभी मंजूरियों को एक माह के भीतर देने के लिए आवश्‍यक कदम उठाएंगी। 

 

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क्‍यों है जरूरत?

कंफेडरेशन ऑफ रियल एस्‍टेट डेवलपर्स एसोसिएशंस ऑफ इंडिया (क्रेडाई) के प्रेसिडेंट निरंजन हीरानंदानी के मुताबिक, सरकार को रेंटल हाउसिंग प्रोजेक्‍ट्स को प्रमोट करना चाहिए, क्‍योंकि सरकार 2 करोड़ घर बनाने पर तो फोकस कर रही है, लेकिन कई लोग काम के सिलसिले में एक से दूसरे शहर में शिफ्ट करते रहते हैं, उन्‍हें रेंटल हाउसिंग प्रोवाइड कराई जानी चाहिए। हीरानंदानी के मुताबिक, पिछले कुछ सालों में अफोर्डेबल हाउसिंग प्रोजेक्‍ट्स को प्रमोट करने के लिए कई अह‍म कदम उठाए हैं, लेकिन डेवलपर्स को लैंड और कंस्‍ट्रक्‍शन से संबंधित एनओसी के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है, जिससे प्रोजेक्‍ट देरी से शुरू होता है और कॉस्‍ट भी बढ़ जाती है। 

 

GST के दायरे में आए रियल एस्‍टेट 

नेशनल रियल एस्‍टेट डेवलपमेंट कौंसिल (नारेडको) के वाइस प्रेसिडेंट गौरव जैन ने कहा कि रियल एस्‍टेट को पूरी तरह जीएसटी के दायरे में लाया जाना चाहिए। इससे रियल एस्‍टेट मार्केट में और ट्रांसपेरेंसी आएगी और बायर्स को इसका फायदा मिलेगा। 

 

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क्‍या है वर्तमान? 

पिछले साल सरकार ने रियल एस्‍टेट डेवलपमेंट एक्‍ट (रेरा) और जीएसटी लागू किया। नवंबर 2016 में नोटबंदी की वजह से रियल एस्‍टेट सेक्‍टर काफी मंदी में था, लेकिन रेरा और जीएसटी के कारण इसका असर और बढ़ा। ज्‍यादातर राज्‍यों ने आधा अधूरा रेरा लागू किया है। इस कारण अब तक बायर्स के सेंटिमेंट में सुधार नहीं हुआ है। वहीं, ऑन गोइंग प्रोजेक्‍ट्स पर लगे जीएसटी का आधा असर पड़ा, जिससे बायर्स असमंजस में दिखाई दिया और सेल्‍स में गिरावट दर्ज की गई। बावजूद इसके, मार्केट में अनसोल्‍ड इन्‍वेंटरी कम हुई। यानी कि लोगों ने रेडी-टू-मूव अपार्टमेंट्स खरीदे। लेकिन नए प्रोजेक्‍ट्स लॉन्‍च्‍ा नहीलं हुए। पिछले बजट में अफोर्डेबल हाउसिंग को प्रमोट करने की वजह से कई सस्‍ते प्रोजेक्‍ट्स जरूर लॉन्‍च हुए। 

 

यह भी है आसार 

रियल एस्‍टेट कंसलटेंसी फर्म अन्‍नारॉक प्रॉपर्टी कंसलटेंट्स के चेयरमैन अनुज पुरी का कहना है कि साल 2019 में आम चुनाव है, ऐसे में सरकार का फोकस रूरल सेक्‍टर पर रहेगा। इससे रेंसिडेशियल सेक्‍टर को जीएसटी रेट में रिडक्‍शन और टैक्‍स छूट की सीमा बढ़ने के आसार कम ही हैं।

 

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