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बिज़नेस न्यूज़ » Budget 2018 » Railway/Infraबजट में मिडिल क्लास को निराशा हाथ लगने के सवाल पर अरुण जेटली ने कहा- पहले ही दे चुके हैं राहत

बजट में मिडिल क्लास को निराशा हाथ लगने के सवाल पर अरुण जेटली ने कहा- पहले ही दे चुके हैं राहत

नई दिल्‍ली.  बजट के एक दिन बाद वित्‍त मंत्री अरुण जेटली ने शुक्रवार को इंडिया इंक के साथ मुलाकात की। इस दौरान मिडिल क्‍लास को बजट में राहत नहीं देने के एक सवाल पर उन्होंने कहा-  "उनकी सरकार पहले ही इस क्लास को राहत दे चुकी है। हमने पहले टैक्स स्लैब को कम किया है।" बता दें कि गुरुवार को पेश बजट सीधे-सीधे दो हिस्सा में बंटा हुआ दिखा। पहला हिस्सा गांव-गरीब और किसान को खुश करने पर वाला था। तो दूसरा हिस्सा मिडिल क्लास का था, जिसे कोई फायदा नहीं दिया। सरकार ने इनकम टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया।

 

- अरुण जेटली ने कहा- "उनकी सरकार ने हर बजट में छोटे टैक्‍सपेयर को राहत दी है। इस बार टैक्स स्लैब बढ़ाना हमारे लिए सबसे बड़ी चुनौती था। 5 फीसदी का टैक्स स्लैब दुनिया में सबसे कम है और यह भारत में है।"

- " यह पूछे जाने पर कि क्‍या भविष्‍य में सरकार टैक्‍स स्‍लैब या ढांचे में किसी तरह का बदलाव करेगी। इस पर वित्‍त मंत्री ने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि टैक्सपेयर्स की तादाद घटाकर हम कोई देशसेवा नहीं करते हैं।" 

 

जहां सबसे ज्‍यादा जरूरत, वहां फोकस

- जेटली ने कहा- "देश के ज्‍यादातर गावों का इलेक्‍ट्रीफिकेशन कर दिया गया है। सरकार अब एक एक घर को टारगेट करके गैस कनेक्‍शन बांट रही है। इस साल सरकार ने गांव में करीब 2 करोड़ टायलेट बनाने का लक्ष्‍य तय किया है।? 

- "सरकार के सहयोग के बिना भी इकोनॉमी का बड़ा हिस्‍सा बेहतर प्रदर्शन करेगा। हमारा फोकस इकोनॉमी के ऐसे सेगमेंट पर है, जिसे सरकार की सबसे ज्‍यादा जरूरत है।" 

- बजट में इम्‍पोर्ट ड्यूटी बढ़ाए जाने का बचाव करते हुए वित्‍त मंत्री ने कहा कि सरकार ने यह कदम घरेलू उद्योगों को मदद करने के लिए उठाया है। सस्‍ता इम्‍पोर्ट देश के लिए खतरा है। सरकार डोमेस्टिक मैन्‍युफैक्‍चरिंग को प्रोटेक्‍ट करने के लिए कदम उठाएगी। हमें डोमेस्टिक मैन्‍यूफैक्‍चरिंग सेक्‍टर में जॉब को सुरक्षित करना होगा। 

 

हेल्‍थकेयर और किसान सरकार की सबसे बड़ी प्रॉयोरिटी

- जेटली ने यह भी साफ किया कि हेल्‍थकेयर सेक्‍टर सरकार की प्रॉयोरिटी में है। इसी के चलते सरकार ने इसे रिवाइज किया है। सरकार की दूसरी सबसे बड़ी प्रॉयोरिटी किसानों की इनकम दोगुना करना है। टैक्‍स के मोर्चे पर सरकार के पास बहुत कुछ करने की स्‍कोप नहीं है।

- लॉन्‍ग टर्म कैपिटल गेन टैक्‍स की बाबत पूछे जाने पर जेटली ने कहा कि यह सालों से अटका था। हमें लगा कि यह इसे लागू करने का सबसे सही मौका था। 

 

इनकम टैक्स स्लैब नहीं बदला

- उम्मीद थी कि सरकार इनकम टैक्स स्लैब में बदलाव करेगी ताकि मिडिल क्लास और नौकरीपेशा लोगों को फायदा हो, लेकिन स्लैब को बरकरार रखा गया। इससे देश के 4 करोड़ इंडीविजुअल टैक्स पेयर्स को निराशा हुई।
- 80C के तहत डेढ़ लाख रुपए इन्वेस्ट कर इनकम टैक्स में छूट हासिल करने की लिमिट भी नहीं बढ़ाई गई। 

 

 टैक्स पेयर पर असर

 

- इसे ऐसे समझें

आय  पहले टैक्स अब टैक्स अंतर
5 लाख 12,875 12,698  177
10 लाख  1,15,875 1,15,794  81
20 लाख  4,24,875   4,27,190 -2315

- बाकी कर दाता के लिए कोई छूट नहीं, स्लैब भी यथावत और 1% सेस बढ़ाकर 4% किया। 

 

 

स्टैंडर्ड डिडक्शन
- करीब 12 साल बाद सरकार सैलरीड क्लास के लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन लाई है। ये डिडक्शन 40 हजार रुपए का होगा। लेकिन, इसे मेडिकल एक्सपेंस पर 15 हजार और ट्रैवलिंग अलाउंस पर 19200 रुपए की रिबेट के बदले लाया गया है यानी जो डिडक्शन पहले 34,200 रुपए का था.. अब वह 40,000 रुपए का होगा। कुल फायदा साल में केवल 5,800 रुपए 

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