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अपनी सैलरी खुद तय नहीं कर पाएंगे सांसद, बजट में हुआ यह ऐलान

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आम बजट में एक ऐसा मुद्दा छूआ, जिसको लेकर संसद और सरकार पर लंबे समय से सवाल उठते रहे थे।

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नई दिल्ली. वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आम बजट में एक ऐसा मुद्दा छूआ, जिसको लेकर संसद और सरकार पर लंबे समय से सवाल उठते रहे थे। जेटली ने बजट में एक ऐसा ऐलान किया, जिससे साफ हो गया कि भविष्य में सांसद खुद अपनी सैलरी तय नहीं कर पाएंगे। साथ ही सांसदों की सैलरी 5 साल में एक बार रिवाइज होगी। यह नई व्यवस्था 1 अप्रैल, 2018 से लागू होने जा रही है।

 

आम बजट 2018-19 की घोषणा करते हुए जेटली ने कहा, 'सांसदों के वेतन का मुद्दा लंबे समय से जनता के बीच बहस का विषय बना हुआ है। मौजूदा प्रक्रिया खुद रिसीपेंट्स यानी सांसदों को खुद अपनी सैलरी तय करने की अनुमति देती है, जिसको लेकर अकसर आलोचनाएं होती हैं। इसलिए मैं सांसदों को मिलने वाली सैलरी, संसदीय क्षेत्र भत्ता, ऑफिस खर्च और मीटिंग अलाउंस तय करने की व्यवस्था में जरूरी बदलाव का प्रस्ताव करता हूं।'

 

1 अप्रैल, 2018 से लागू होगी नई व्यवस्था
जेटली ने कहा कि यह नई व्यवस्था 1 अप्रैल, 2018 से लागू होगी। उन्होंने कहा कि इसके लिए नया कानून बनाया जाएगा, जिसके तहत सांसदों की सैलरी हर 5 साल में एक बार रिवाइज की जाएगी।
उन्होंने कहा, 'मुझे भरोसा है कि संसद सदस्य इस पहल का स्वागत करेंगे और इसको लेकर भविष्य में आलोचनाएं नहीं होंगी। बजट पेश करने के बाद जेटली ने इस मुद्दे को प्रेस कान्फ्रेंस में भी सामने रखा। उन्होंने कहा, 'बजट में सांसदों की सैलरी तय करने के लिए एक इंस्टीट्यूशनल मैकेनिज्म तैयार करने का प्रस्ताव किया गया।' 

 

राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के वेतन बढ़ाने का प्रस्ताव
बजट में राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और राज्यपालों के वेतन में बढ़ोतरी का प्रस्ताव भी रखा गया है। इस प्रस्ताव के तहत राष्ट्रपति को 5 लाख, उपराष्ट्रपति को 4 लाख और राज्यपाल को 3 लाख रुपए सैलरी मिलेगी। हालांकि सांसदों के वेतन की समीक्षा किन मानकों पर की जाएगी और उसमें कितनी वृद्धि होगी इसके बारे वित्त मंत्री ने कोई जानकारी नहीं दी है। 

 

सांसद कर रहे हैं सैलरी बढ़ाने की मांग
गौरतलब है कि सातवां वेतन आयोग लागू होने के बाद से ही सासंदों के द्वारा सैलरी बढ़ाने की मांग की जा रही थी। सांसदों का कहना था कि महंगाई बढ़ गई है उनके वेतन की समीक्षा करना काफी जरूरी है, ऐसे में सरकार का फैसला सांसदों के लिए राहत लेकर आया है। 

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