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बजट 2018 : MF इंडस्‍ट्री के लिए आसान हों KYC नियम, नए प्रोडक्‍ट लाने की मिले इजाजत

 

नई दिल्‍ली. एसेट के लिहाज से अपने ऑल टाइम हाई पर चल रही म्‍युचुअल फंड इंडस्‍ट्री को इस बार बजट 2018 से काफी उम्‍मीदें हैं। उसकी सबसे बड़ी मांग है कि लम्‍बे समय में वैल्‍थ क्रिएट करने की इजाजत मिले। इसके लिए वह रिटायरमेंट जैसे प्रोडेक्‍ट की इजाजत चाहती है। इसके अलावा KYC को भी आसान बनाया जाए। बजट आने अब कुछ ही दिनों का समय बचा है, और म्‍युचुअल फंड इंडस्‍ट्री के एक्‍सपर्ट्स को लगता है कि सरकार उनकी मांगों को इस बार जरूर पूरी करेगी। सरकार 1 फरवरी को बजट पेश करेगी।

 

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Budget 2018 - MF में मिले रिटायरमेंट फंड लाने की सुविधा

वैल्‍यू रिसर्च के सीईओ धीरेन्‍द्र कुमार के अनुसार नेशनल पेंशन स्‍कीम्‍स (NPS) की तरह म्‍युचुअल फंड में भी पेंशन प्‍लान की शुरुआत की जानी चाहिए। इसमें निवेशकों को इक्विटी या डेट और दोनों का मिक्‍स का आप्‍शन मिलना चाहिए। यहां पर सरकार चाहे तो लॉकइन पीरियड 20 से 30 साल का रख सकती है। इस निवेश पर सरकार को अतिरिक्‍त टैक्‍स की छूट भी देनी जानी चाहिए। उनके अनुसार Budget 2018 में इस तरह की शुरूआत होनी चाहिए।

कुमार के अनुसार जब म्‍युचुअल फंड में निवेश केवल बैंक के माध्‍यम से ही किया जा सकता है और कैश कराने पर पैसा भी बैंक खाते में ही आता है, ऐसे में बार-बार निवेशकों से पैन और अन्‍य कागजात मांगना कठिन नियम हैं, इनमें ढील मिलनी चाहिए।

 

 

यह भी पढ़ें : बजट 2018 : पेंशन प्‍लान लाने की भी MF को मिले छूट

 

 

Aam Budget 2018 - टैक्‍स सेविंग की सुविधा का डेट म्‍युचुअल फंड में भी विस्‍तार हो

फाइनेंशियल एडवाइजर फर्म बीपीएन फिनकैप के डायरेक्‍टर ए के निगम का कहना है बजट 2018 में 80C के तहत डेट फंड को भी शामिल किया जाना चाहिए। इसका लॉकइन पीरियड टैक्‍स सेविंग FD के बराबर 5 साल रखा जा सकता है। इससे नए निवेशक इस बाजार से जुड़ सकेंगे। उनका कहना है कि हाइब्रिड फंड में इस तरह का मौका दिया जा सकता है।

 

KYC के लिए सेंट्रलाइज्‍ड व्‍यवस्‍था बने

च्‍वॉइस ब्रोकिंग के प्रेसीडेंट अजय केजरीवाल के अनुसार बजट 2018 में आधार को म्‍युचुअल फंड या अन्‍य किसी वित्‍तीय ट्रांजैक्‍शन से लिंक कराने के लिए सेंट्रलाइज्‍ड व्‍यवस्‍था बनानी चाहिए। आधार को अभी हर जगह जोड़ने के लिए कहा जा रहा है। लोगों का निवेश कई फंड्स में होता है, इसके अलावा स्‍टॉक एक्‍सचेंज और बीमा सहित कई वित्‍तीय प्रॉडक्‍ट लोगों के पास होते हैं। इसलिए सभी में आधार जोड़ने के लिए कोई सेट्रलाइज्‍ड व्‍यवस्‍था बनानी चाहिए, यहां पर आधार के अलावा पैन को जोड़ने से लेकर सभी तरह की KYC कराई जा सके। उनका कहना है कि अभी म्‍युचुअल फंड डिस्‍ट्रीब्‍यूटर्स का कमीशन 1 फीसदी है, इस पर GST भी देना पड़ रहा है। इसलिए या तो इस कमीशन को बढ़ाया जाए या इस GST के भार को एक फीसदी कमीशन से बाहर किया जाए। इससे म्‍युचुअल फंड कंपनियों को निवेशकों तक पहुंचने में दिक्‍कत आ रही है। अगर GST को 1 फीसदी कमीशन से बाहर कर दिया जाए तो डिस्‍ट्रीब्‍यूटर प्रोडक्‍ट को आसानी से लोगों तक पहुंचा सकेंगे।

 

 

आंकड़ों में म्‍युचुअल फंड की ग्रोथ

-नवबंर 2017 तक आसेट 22.79 लाख करोड़ रुपए

-31 मार्च 2007 में आसेट 3.26 लाख करोड़ रुपए

-10 साल में यह 7 गुना से ज्‍यादा बढ़ी

-फोलियो की संख्‍या 6.49 करोड़

 

यह भी पढ़ें : आम बजट 2018: टैक्स में छूट की लिमिट 3 लाख कर सकती है सरकार, मिनिस्ट्री के सामने प्रपोजल

 

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