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बजट 2018 - लुधियाना शहर से: वुलन हौजरी इंडस्‍ट्री को चाहिए सस्‍ते इंपोर्ट से राहत

हौजरी इंडस्‍ट्री को अब डॉमेस्टिक मार्केट में भी विदेशी सस्‍ते माल से जूझना पड़ रहा है।

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नई दिल्‍ली. आगामी बजट 2018 से देश के अलग-अलग शहरों में मौजूद फेमस इंडस्‍ट्रीज को किस तरह की अपेक्षाएं हैं, इसे लेकर moneybhaskar.com इंडस्‍ट्री एक्‍सपेक्‍टेशंस की सीरीज पेश कर रहा है। इसी सीरीज की पहली खबर है लुधियाना से। इस खबर में हम आपको बताने जा रहे हैं कि देश के साथ-विदेश में भी अपने वुलन हौजरी गारमेंट के लिए जानी जाने वाली लुधियाना की हौजरी इंडस्‍ट्री की अभी की सबसे बड़ी दिक्‍कत क्‍या है और उसे Budget 2018 को लेकर वित्‍त मंत्री अरुण जेटली से क्‍या उम्‍मीदें हैं। 

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आम बजट 2018 - सस्‍ता इंपोर्ट बन रहा मुसीबत

अभी तक इंडस्‍ट्री विदेश में अन्‍य देशों से मुकाबला कर रही थी लेकिन अब उसे डॉमेस्टिक मार्केट में भी विदेशी सस्‍ते माल से जूझना पड़ रहा है। इसलिए लुधियाना की वुलन हौजरी इंडस्‍ट्री को केन्‍द्र सरकार से आगमी बजट में सस्‍ते इंपोर्ट को लेकर राहत की दरकार है। इंडस्‍ट्री चाहती है सरकार द्वारा चीन से होने वाले गैरकानूनी इंपोर्ट पर नकेल कसने के लिए कदम उठाए जाएं। साथ ही बांग्‍लादेश, श्रीलंका और वियतनाम से होने वाले सस्‍ते इंपोर्ट पर ड्यूटी लगाई जाए। देशी वुलन हौजरी की कीमतें इंपोर्टेड माल से ज्‍यादा होने के चलते डॉमेस्टिक मार्केट में ही डिमांड गिर रही है। 

 

बांग्‍लादेश, श्रीलंका और वियतनाम से फ्री है इंपोर्ट  

निटवियर एंड अपैरल मैन्‍युफैक्‍चरर्स एसोसिएशन ऑफ लुधियाना (KAMAL) के प्रे‍सिडेंट सुदर्शन जैन ने moneybhaskar को बताया कि देश में बांग्‍लादेश, श्रीलंका और वियतनाम से आने वाले वुलन हौजरी पर इंपोर्ट ड्यूटी नहीं लगती है। इन देशों में लेबर कॉस्‍ट कम है, जिससे वहां का माल सस्ता है और इंपोर्ट डयूटी नहीं होने से बड़ी-बड़ी कंपनियां वहीं से सस्ता सामान इंपोर्ट कर रही हैं। ऊपर से चीन से होने वाला इंपोर्ट ज्‍यादातर गैरकानूनी है। हालांकि इसे लेकर सरकार ने कदम उठाया है और उसका असर भी दिखा है लेकिन अभी भी गैरकानूनी इंपोर्ट हो रहा है। इसलिए सरकार को इस पर नकेल कसने के लिए और सख्‍त कदम उठाने की जरूरत है।

 

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देश-विदेश में एग्जीबीशंस का हो आयोजन 

डॉमेस्टिक लेवल पर कदम उठाए जाने के साथ-साथ वुलन हौजरी को एक्‍सपोर्ट के मोर्चे पर भी प्रोत्‍साहन की जरूरत है। इंडस्‍ट्री को ऐसे प्‍लेटफॉर्म्‍स की जरूरत है, जो विदेशों में लुधियाना वुलन हौजरी को प्रमोट करने में मदद कर सकें, जिससे एक्‍सपोर्ट में इजाफा हो। इसके लिए देश के साथ-साथ विदेशों में भी सरकार की ओर से एग्‍जीबीशन का आयोजन किए जाने की जरूरत है। बता दें कि वूलन गारमेंट के एक्‍सपोर्ट में लगातार गिरावट आ रही है। DGCI & S कोलकाता के आंकड़ों के मुताबिक 2014-15 में एक्‍सपोर्ट में 12 फीसदी की वृद्धि थी लेकिन 2015-16 में वूलन गारमेंट का एक्‍सपोर्ट में 1.8 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। यही हाल 2016-17 में भी रहा। पिछले वित्‍त वर्ष वूलन गारमेंट के एक्‍सपोर्ट में 14.46 फीसदी की गिरावट आई। 

 

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बनाए जाएं ट्रेंडिंग सेंटर 

इंडस्‍ट्री को ट्रेडिंग सेंटर या ट्रेडिंग हब की भी जरूरत है। इस वक्‍त इंडस्‍ट्री का कोई कॉमन ट्रेडिंग हब नहीं है, कारोबार पूरे पंजाब में या लुधियाना के आस-पास से अलग-अलग जगहों से किया जाता है, जिससे खरीदारों को अलग-अलग जगहों पर भटकना पड़ता है। एक कॉमन हब होने से बाहर से आने वाले खरीदारों को एक ही जगह पर प्रॉडक्‍ट उपलब्‍ध हो सकेगा और इंडस्‍ट्री को फायदा होगा। 

 

कितनी बड़ी है लुधियाना की होजरी इंडस्‍ट्री 

लुधियाना की होजरी इंडस्‍ट्री 15 हजार करोड़ रुपए की है, जिसमें से 1000 करोड़ का एक्‍सपोर्ट होता है। घरेलू वूलन होजरी मार्केट में लुधियाना इंडस्‍ट्री की 90 फीसदी से ज्‍यादा हिस्‍सेदारी है। देश में यहां के वूलन गारमेंट की सबसे ज्यादा डिमांड नॉर्थ व सेंट्रल इंडिया से आती है। ईस्ट से भी डिमांड है लेकिन साउथ और वेस्ट इंडिया से डिमांड काफी कम है। वूलन होजरी के टोटल प्रोडक्‍शन में से 7-8 फीसदी का एक्‍सपोर्ट होता है। विदेशों में मलेशिया, साउथ अफ्रीका, मिडिल ईस्ट में यहां के बने गारमेंट की डिमांड है।

 

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