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आम बजट 2018: मोदी के गुजरात से: छोटे कारोबारी चाहते हैं घट जाए कॉरपोरेट टैक्‍स

नई दिल्‍ली. 1 फरवरी को पेश होने वाले आम बजट 2018 से गुजरात के कारोबारी भी काफी उम्मीदें लगाए हुए हैं। गुजरात की इंडस्‍ट्रीज बजट में कई तरह की सहूलियत चाहती हैं, जिनमें से एक कॉरपोरेट टैक्‍स को घटाया जाना है। फेडरेशन ऑफ गुजरात इंडस्‍ट्रीज (FGI) ने वित्‍त मंत्री अरुण जेटली को एक प्री-बजट मेमोरेंडम भी भेजा है। इसमें उन्‍होंने वित्‍त मंत्री से कई तरह की सिफारिशें की हैं।  

FGI के सेक्रेटरी जनरल नितेश पटेल ने moneybhaskar.com को बताया कि फेडरेशन डायरेक्‍ट टैक्‍स से लेकर GST के नियमों तक में कुछ बदलाव किए जाने की इच्‍छा रखती है। कॉरपोरेट टैक्‍स को लेकर गुजरात की इंडस्‍ट्रीज की मांग है कि कॉरपोरेट टैक्‍स रेट को 30 फीसदी से घटाकर 20 फीसदी किया जाए। सरकार ने फाइनेंस एक्‍ट, 2017 में सालाना 50 करोड़ रुपए टर्नओवर वाले कारोबारियों के लिए कॉरपोरेट टैक्‍स की दर 25 फीसदी तय की थी, जबकि जिन कंपनियों का टर्नओवर 50 करोड़ रुपए से ज्‍यादा है, उनके लिए कॉरपोरेट टैक्‍स 30 फीसदी रखा गया था। मेमोरेंडम में कहा गया है कि देश में बड़े पैमाने पर कंपनियां 50 करोड़ रुपए से ज्‍यादा टर्नओवर वाली छोटी कंपनियां हैं, इसलिए उन्‍हें भी टैक्‍स में राहत उपलब्‍ध कराई जाए। 

 

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प्रमुख ग्‍लोबल इकोनॉमीज में बड़े पैमाने पर घट रही हैं टैक्‍स रेट 

FGI की ओर से कहा गया कि कई प्रमुख ग्‍लोबल इकोनॉमीज में बड़े पैमाने पर टैक्‍स दरों में कटौती हो रही है। उदाहरण के लिए अमेरिका ने कॉरपोरेट टैक्‍स की दर को 35 फीसदी से घटाकर 20 फीसदी कर दिया है। ताकि कारोबारियों को राहत मिल सके। इसे देखते हुए भारत में भी ऐसे कदम उठाए जाने की जरूरत है। बढ़ा हुआ टैक्‍स इन्‍वेस्‍टर्स के सेंटीमेंट्स और इकोनॉमिक ग्रोथ पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है। टैक्‍स की दर घटने से टैक्‍स भुगतान बढ़ेगा और इसकी चोरी में कमी आएगी। भारत को आकर्षक बिजनेस डेस्‍टीनेशन बनने, रोजगार बढ़ने और रेवेन्‍यू बढ़ाने में मदद मिलेगी। साथ ही कारोबार के विस्‍तार, मॉडर्नाइजेशन, टेक्‍नोलॉजी अपग्रेडेशन आदि के लिए इंटर्नल रिसोर्सेज जुटाने के लिए फंड भी उपलब्‍ध होगा। इसके अलावा डॉमेस्टिक व विदेशी कंपनियों द्वारा किए जाने वाले इन्‍वेस्‍टमेंट को प्रोत्‍साहन मिलेगा।

 

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आरएंडडी उपलब्‍ध कराने वाली कंपनियों के लिए बढ़े टैक्‍स बेनिफिट का दायरा 

FGI के मेमोरेंडम में कहा गया कि जो कंपनियां खुद रिसर्च और डेवलपमेंट करती हैं और उन पर पैसा खर्च करती हैं, उनके लिए टैक्‍स में मिलने वाले लाभ को 125 फीसदी से बढ़ाकर 200 फीसदी कर दिया गया है। लेकिन  जो कंपनियां किसी और कंपनी के लिए रिसर्च व डेवलपमेंट करती हैं उनके लिए अभी तक टैक्‍स में मिलने वाला लाभ 125 फीसदी ही है। अत: गुजरात के कारोबारियों का कहना है कि ऐसी कंपनियों के लिए भी फाइनेंस एक्‍ट के सेक्‍शन 35(1)(iia) के तहत मिलने वाले टैक्‍स बेनिफिट को 125 फीसदी से बढ़ाकर 200 फीसदी कर दिया जाना चाहिए।

 

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GST के नियमों में भी चाहिए कुछ बदलाव

FGI ने GST के दायरे के तहत भी कुछ बदलावों की मांग की है। वित्‍त मंत्री को भेजी गई सिफारिशों में फूड एंड बेवरेजेस व कैब सर्विस पर भी इनपुट टैक्‍स क्रेडिट उपलब्‍ध कराए जाने की भी सिफारिश की गई है। कहा गया है कि ये सर्विस GST के दायरे में आने वाली चीजों के लिए भी इस्‍तेमाल की जा रही हैं। विशेषकर दूरदराज के इलाकों में मौजूद कैंटीनों में। इसलिए इन पर भी इनपुट टैक्‍स क्रेडिट दिया जाना चाहिए। इसके अलावा कुछ अन्‍य बदलाव किए जाने की भी अपील की गई है, जो इस प्रकार हैं- 

 

- कारोबारियों का कहना है कि GST के तहत कंपोजीशन स्‍कीम को स्‍मॉल सर्विस प्रोवाइडर्स को भी उपलब्‍ध कराया जाना चाहिए। अगर कंपोजीशन स्‍कीम मैन्‍युफैक्‍चरर्स और ट्रेडर्स के लिए हो सकती है तो स्‍मॉल सर्विस प्रोवाइडर्स को इसका लाभ क्‍यों न मिले। 

 

- एसी व वॉशिंग मशीन जैसे घरेलू आइटम्‍स को 18 फीसदी टैक्‍स के तहत लाया जाना चाहिए। आज के समय में ये आइटम लग्‍जरी नहीं बल्कि जरूरत की चीजों में शामिल हो गए हैं। इसलिए इनके लिए 28 फीसदी टैक्‍स स्‍लैब सही नहीं है। 

 

- एक्‍सपोर्टर्स व डॉमेस्टिक ट्रेडर्स को जितना जल्‍दी हो सके इनपुट टैक्‍स क्रेडिट मुहैया कराया जाए। इनपुट टैक्‍स क्रेडिट नहीं मिलने की वजह से कारोबारियों के सामने वर्किंग कैपिटल की समस्‍या खड़ी हो गई है, जिसके चलते वे अपना कारोबार आगे नहीं बढ़ा पा रहे हैं। 

 

- सिनेमा एग्‍जीबीशन इंडस्‍ट्री की मांग है कि सिनेमा पर जीएसटी 18 फीसदी किया जाए। साथ ही राज्‍य सरकार द्वारा लगाए जाने वाले लोकल बॉडी एंटरटेनमेंट टैक्‍स (LBET) को खत्‍म कर दिया जाए। सिनेमा पर अभी 100 रुपए से कम की टिकट पर GST की दर 18 फीसदी है, जबकि उससे ऊपर की टिकट पर 28 फीसदी GST लगता है। सिनेमा एग्‍जीबीशन इंडस्‍ट्री का कहना है कि देश में फिल्‍में लोगों को बड़े पैमाने पर क्‍लीन एंटरटेनमेंट उपलब्‍ध कराती हैं और इसकी तुलना रेसिंग, गैम्‍बलिंग जैसी सिन सप्‍लाईज से करते हुए उनके बराबर 28 फीसदी टैक्‍स लगाना उचित नहीं है। 

 

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