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बजट 2018: आपकी उम्‍मीदों और जेटली के बीच ये हैं चार बड़े चैलेंज, कल होगा खुलासा

नई दिल्‍ली। आम बजट 2018 के लिए आपको बस एक दिन का और इंतजार करना है। आपको आम बजट से जितनी उम्‍मीदें है मोदी सरकार के लिए भी यह बजट भी उतना ही खास है। अगले साल यानी 2019 में आम चुनाव है। आम जनता को सौगात और संदेश देने के लिए सरकार के पास आखिरी मौका है। देश के लोगों कर खास कर युवाओ, किसानों, टैक्‍सपेयर्स और इंडस्‍ट्री को बजट से बड़ी उम्‍मीदें हैं। ऐसे में हम आपको बता रहे है कि आपकी उम्‍मीदें किस तरह से मोदी सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन गईं हैं और अर्थव्‍यवस्‍था में सबकी उम्‍मीदों को पूरा करने कितनी क्षमता है। 

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युवाओं की उम्‍मीदें 

 

मोदी सरकार 2014 में जब सत्‍ता में आई थी तो इसके पीछे युवाओं के समर्थन को बेहद अहम माना गया था। मौजूदा समय में हमारे देश की 65 फीसदी आबादी की उम्र 35 साल से कम है। एक्‍सपर्ट्स का मानना है कि युवाओं को उनकी योग्‍यता के हिसाब से नौकरियां नहीं मिल रहीं हैं। इसके अलावा अगर कोई अपना कारोबार शुरू करना चाहता है तो उसे बैंकों से आसानी से लोन नहीं मिल पाता है। इसकी वजह से युवाओं में सरकार की नीतियों को लेकर नाराजगी बढ़ी है। मोदी सरकार के पिछले तीन साल के कार्यकाल में नौकरियों को लेकर लेबर ब्‍यूरो का आंकड़ा बताता है कि इस अवधि में 60 फीसदी तक नई नौकरियां कम हुईं हैं। हालांकि मोदी सरकार खुद इस आंकड़े पर सवाल उठा चुकी है। लेकिन आम तौर पर इस बात को लेकर स‍हमति है कि देश युवाओं को उतनी नौकरियां दे पा रहा है जितनी नौकरियों की जरूरत है। ऐसे में युवाओं को इस बजट से बहुत उम्‍मीदें है कि मोदी सरकार बजट में कुछ ऐसा बड़ा ऐलान कर सकती है जिससे ज्‍यादा से ज्‍यादा युवाओं को नौकरियां मिलें या उनके लिए अपना बिजनेस शुरू करने के लिए आसानी से बैंकों से कर्ज मिले। 

 

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जेटली के लिए चुनौती 

क्र‍िसिल के चीफ इकोनॉमिस्‍ट डीके जोशी ने moneybhaskar.com को बताया कि सरकार को नौकरियां पैदा करने के लिए इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर में निवेश बढ़ाना होगा और ऐसे कदम उठाने होंगे जिससे कंसस्‍ट्रक्‍शन सेक्‍टर में तेजी आए। सड़कें बनें। इससे लोगों को नौकरियां मिलेंगी। कंपनियों को टैक्‍स में छूट देने से नौकरियां पैदा नहीं होती हैं। सरकार के पास मौजूदा समय में इतने संसाधन भी नहीं है कि वह नौकरियां पैदा करने के लिए कंपनियों को टैक्‍स छूट दे। 

 

किसानों की उम्‍मीदें 

 

मौजूदा समय में कृषि क्षेत्र खास कर किसानों की स्थिति बहुत खराब है। किसानों को उनकी उपज की सही कीमत नही मिल पा रही है। किसानों की आत्‍महत्‍या की घटनाएं लगातार सामने आती रहीं हैं। हाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी स्‍वीकार किया है कि किसानों की स्थिति खराब है और राज्‍यों ओर केंद्र सरकार को मिल कर उनकी स्थिति को बेहतर बनाने के लिए कदम उठाने चाहिए। ऐसे में किसानों को उम्‍मीद है कि आम बजट में सरकार किसानों को राहत देने के लिए किसी बड़े कदम की घोषणा कर सकती है। यह कदम खेती की लागत को कम करना या किसानों की इनकम बढ़ाने के लिए किसी ठोस स्‍क्‍ीम के तौर पर सामने आ सकता है। 

 

जेटली के लिए चुनौती 

डीके जोशी का कहना है कि किसानों की स्थिति को बेहतर बनाने के लिए जरूरी है कि सरकार उनकी इनकम बढ़ाने के लिए कदम उठाए।  सरकार के सामने यह चुनौती है कि वह इसके लिए क्‍या करती है। या तो सरकार किसानों को सीधे पैसा दे या उनका कर्ज माफ करें। अगर सरकार ऐसा कदम उठाती है तो यह पापुलिज्‍म होगा। सब्सिडी के मोर्चे पर सरकार पहले ही खाद पर सब्सिडी दे रही है। किसानों को उनकी उपज का ज्‍यादा दाम देकर उनकी इनकम बढ़ाई जा सकती है। लेकिन इसके लिए बिचौलियों की भूमिका को पूरी तरह से खत्‍म करना होगा। यह शार्ट टाइम में संभव नहीं है। 

 

इनकम टैक्‍स के मोर्चे पर टैक्‍सपेयर्स की उम्‍मीद 

मौजूदा समय में देश की कुल 125 करोड़ की आबादी में से 5 करोड़ से कुछ अधिक लोग इनकम टैक्‍स रिटर्न फाइल करते हैं। इनकम टैक्‍स देने वाले इंडीविजुअल की संख्‍या इससे भी कम है। इनकम टैक्‍स देने वाले टैक्‍सपेयर्स खास कर 5 लाख ओर 10 लाख रुपए तक की सालाना इनकम वाले टैक्‍सपेयर्स को उम्‍मीद है कि सरकार उनको टैक्‍स के मोर्चे पर थोड़ी राहत दे। इसके तहत उम्‍मीद की जा रही है कि मोदी सरकार टैक्‍स से छूट की मौजूदा लिमिट को सालाना 2.5 लाख रुपए से बढ़ा कर 3 लाख रुपए कर सकती है। या सरकार टैक्‍स के मौजूदा नियमों में ऐसे बदलाव करे जिससे लोगों पर इनकम टैक्‍स का बोझ कम हो। नोटबंदी के बाद देश में इनकम टैक्‍स कलेक्‍शन लगातार बढ़ रहा है और ज्‍यादा लोग टैक्‍स नेट में आ रहे हैं। इससे मोदी सरकार के लिए लोगों को इनकम टैक्‍स के मोर्चे पर राहत देने की गुजाइश बढ़ जाती है। 

 

जेटल के लिए चुनौती 

 

डीके जोशी का कहना है कि मध्‍यम वर्ग के लोगों को इनकम टैक्‍स के मोर्चे पर मोदी सरकार राहत दे सकती है। हालांकि सरकार ऐसा कोई कदम नहीं उठाएगी जिससे टैक्‍स बेस कम हो। नोटबंदी के बाद इनकम टैक्‍स कलेक्‍शन बढ़ा है। यह राजस्‍व के मोर्च पर सरकार के लिए सकारात्‍मक है। 

 

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