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बजट 2018: चुनावी साल से पहले गांव चली मोदी सरकार, कि‍सानों की आय बढ़ाने का रखा फॉर्मूला

बजट 2018 के जरि‍ए मोदी सरकार ने इलेक्‍शन 2019 की राह पकड़ ली है।

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नई दि‍ल्‍ली. बजट 2018 के जरि‍ए मोदी सरकार ने इलेक्‍शन 2019 की राह पकड़ ली है। वि‍त्‍त मंत्री अरुण जेटली ने अपने भाषण की शुरुआत में ही कहा कि सरकार कि‍सानों के वि‍कास के  लि‍ए प्रति‍बद्ध है। देश तरक्‍की कर रहा है, उस तरक्‍की का फायदा कि‍सानों को भी मिलना चाहिए। जेटली ने सरकारी खजाने पर ज्‍यादा बोझ बढ़ाए बि‍ना कि‍सानों की आय बढ़ाने का फॉर्मूला सामने रखा, जि‍सकी कि‍सान संगठनों सहि‍त एग्री एक्‍सपर्ट ने तारीफ की।

 

कि‍सानों को लागत से कम से कम डेढ़ गुना ज्‍यादा एमएसपी, ग्रामीण हाटों को मार्केट में तब्‍दील करने का फैसला, फूड प्रोसेसिंग के  लि‍ए दोगुना आवंटन, एग्री एक्‍सपोर्ट पर फोकस और मछलीपालन व पशुपालन को प्रोत्‍साहन जैसे फैसले इस बात का संकेत देते हैं कि मोदी सरकार ने 2022 तक किसानों की आय दोगुना करने का जो वादा कि‍या है, उसे पूरा करने की दि‍शा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।

 

सरकार की मंशा सकारात्‍मक  

इंटरनेशनल एग्री बि‍जनेस एक्‍सपर्ट विजय सरदाना ने कहा कि‍ अगर बजट के आवंटन को देखें तो यह काफी बड़ा है। सरकार कि‍सानों का वेलफेयर चाहती है यह साफ नजर आ रहा है। जो घोषणाएं की गई हैं वह काफी महत्‍वपूर्ण हैं बस सवाल उठता है उनके एग्‍जि‍क्‍यूशन का। जो भी बजट एलोकेशन है उसे लागू करने के लि‍ए एजेंसी तय हों और उनकी समय सीमा तय हो।

 

एमएसपी पर अच्‍छा फैसला

सरकार ने  फसलों की एमएसपी लागत से कम से कम 50 फीसदी ज्‍यादा रखने का फैसला कि‍या है और रबी की ज्‍यादातर फसलों का न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य इसी आधार पर तय कि‍या गया है। भारतीय कि‍सान यूनि‍यन के महासचि‍व धमेंद्र मलि‍क ने सरकार के इस फैसले का स्‍वागत कि‍या है। मलि‍क का कहना है कि‍ अगर यह फैसला सही ढंग से लागू हो जाता है कि‍ कि‍सानों की एक बड़ी समस्‍या हल हो जाएगी।

 

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1 छोटे कि‍सान बेच पाएंगे उपज

मौजूदा 22 हजार रूरल हाट को एग्रीकल्‍चर मार्केट के रूप में बदला जाएगा और इन्‍हें इलेक्‍ट्रॉनि‍क तरीके से ई नैम से जोड़ा जाएगा। इसकी बदौलत छोटे कि‍सान भी अपनी उपज सीधे कंज्‍यूमर या व्‍यापारी को बेच सकेंगे।  2000 करोड़ से कृषि बाजार और संरचना कोष की स्‍थापना की जाएगी। इसका मकसद 22 हजार ग्रामीण एग्रीकल्‍चर मार्केट और 585 एपीएमसी में एग्रीकल्‍चर मार्केटिंग इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर का वि‍कास करना है।

 

2 पशुपालकों का वेलफेयर

मछलीपालन और पशुपालन को प्रमोट करने व इन कामों में लगे लोगों के वेलफेयर के लि‍ए फि‍शरीस एंड एक्‍वाकल्‍चर इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर डेवलपमेंट फंड और एनिमल हस्‍बेंडरी इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर डेवलपमेंट फंड की घोषणा की गई है। इन दोनों के लि‍ए 10000 करोड़ का आवंटन कि‍या कि‍या गया है। इसके अलावा अब कि‍सान क्रेडिट कार्ड का लाभ मछलीपालन और पशुपालन करने वाले भी उठा पाएंगे।

 

3 फूड प्रोसेसिंग और एक्‍सपोर्ट को बढ़ावा

फूड प्रोसेसिंग सेक्‍टर 8 फीसदी की दर से बढ़ रहा है। फूड प्रोसेसिंग में नि‍वेश को बढ़ावा देने के लि‍ए आवंटन को पि‍छले साल के 715 करोड़ से बढ़ाकर 1400 करोड़ कर यानी करीब दोगुना कर दि‍या गया है। सरकार आधुनि‍क सुवि‍धाओं से लैस 42 मेगा फूड पार्क भी बनाएगी। इसके अलावा सरकार फार्म कमोडिटीज के निर्यात के नियमों को उदार बनाएगी। सालाना 100 करोड़ रुपए तक का कारोबार करने वाली एग्री बेस्‍ड कंपनि‍यों को 2018-19 से लेकर 5 वर्षों तक 100 फीसदी टैक्‍स छूट मि‍लेगी।

 

 

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4 ऑपरेशन ग्रीन

कि‍सानों व उपभोक्‍ताओं के हि‍त में आलू, टमाटर और प्‍याज की कीमतों में तेज उतार चढ़ाव की समस्‍या से नि‍पटने के लि‍ए ऑपरेशन फ्लड की तर्ज पर ऑपरेशन ग्रीन लॉन्‍च कि‍या गया है। इसके लि‍ए 500 करोड़ का प्रावधान कि‍या गया है।

 

ऑपरेशन ग्रीन कि‍सान उत्‍पादक संगठनों, प्रोसेसिंग सुवि‍धाओं तथा व्‍यावसायि‍क प्रबंधन को अपनाने के लि‍ए प्रोत्‍साहन देगा। दरअसल यह सब्‍जि‍यां तेजी से खराब होती हैं, इसलि‍ए सीजन के दौरान तो कि‍सानों को एमएसपी भी नहीं मि‍ल पाती और सीजन के बाद यह सब्‍जि‍यां काफी महंगी हो जाती हैं। इस योजना के जरि‍ए सरकार का मकसद कि‍सान और कंज्‍यूमर दोनों को संतुष्‍ट करना है।

 

5 एमएसपी केवल दि‍खावा नहीं रहेगा

सरकार ने फसलों का न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य तय करने का जो फार्मूला बनाया है उसकी तारीफ की जा रही है। लेकि‍न असली चुनौती कि‍सानों को वह मूल्‍य दि‍लाना है। जेटली इस बात से अच्‍छी तरह वाकि‍फ हैं इसीलि‍ए उन्‍होंने कहा कि‍ यह भी तय होना चाहि‍ए कि‍ कि‍सानों अपनी उपज को एमएसपी पर बेच सके। अगर बाजार मूल्‍य एमएसपी से कम है तो या तो सरकार खरीद करे या कोई अन्‍य व्‍यवस्था करे।

 

बजट 2018 : आवंटन पिछले साल की तुलना में

 

योजना     

2017-18

2018-19

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना

7392 करोड़ रुपए

9429 करोड़ रुपए

मनरेगा

55000  करोड़ रुपए

55000 करोड़ रुपए

हरित क्रांति

11185 करोड़ रुपए

13909 करोड़ रुपए

श्‍वेत क्रांति

1633 करोड़ रुपए

2220 करोड़ रुपए

नीली क्रांति

302 करोड़ रुपए

643 करोड़ रुपए

फसल बीमा योजना

10698 करोड़ रुपए

13000  करोड़ रुपए

प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना

कोई आवंटन नहीं

1313 करोड़ रुपए

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना

16900 करोड़ रुपए

19000 करोड़ रुपए

प्रधानमंत्री आवास योजना

29043 करोड़ रुपए

27505 करोड़ रुपए

राष्‍ट्रीय ग्रामीण पेयजल योजना

7050 करोड़ रुपए

7000  करोड़ रुपए

श्‍यामा प्रसाद मुखजी रूरबन  मिशन

600 करोड़ रुपए

1200 करोड़ रुपए

प्रधानमंत्री स्‍वास्‍थ्‍य सुरक्षा योजना

3175  करोड़ रुपए

3825 करोड़ रुपए

प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम

1195 करोड़ रुपए

1801  करोड़ रुपए

 

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