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बजट 2018 : अभी भी बड़ा चैलेंज है कि‍सानों की आय दोगुनी करना

बजट से सरकार की मंशा साफ हो गई है कि वह कि‍सानों की आय दोगुना करना चाहती है।

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नई दिल्‍ली। बजट 2018 से कि‍सानों को बड़ी उम्‍मीदें थीं। इस बार के बजट में वि‍त्‍त मंत्री अरुण जेटली ने एग्रीकल्‍चर एंड एलाइड सेक्‍टर के लि‍ए कुल 63,836 करोड़ रुपए का आवंटन कि‍या है। सबसे खास घोषणा यह रही कि सरकार ने तय कि‍या है कि सभी फसलों का न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य लागत से कम से कम डेढ़ गुना ज्‍यादा होगी। रबी की ज्‍यादातर फसलों की एमएसपी इसी फॉर्मूले पर सरकार तय कर चुकी है। इसके अलावा सरकार ने जो एलान कि‍ए हैं, उनका असर दि‍खने में काफी वक्‍त लगेगा। 


इंटरनेशनल एग्री बि‍जनेस एक्‍सपर्ट वि‍जय सरदाना ने कहा कि इस बजट से सरकार की मंशा साफ हो गई है कि वह कि‍सानों की आय दोगुना करना चाहती है हालांकि योजनाओं को सही ढंग से  लागू करना बड़ी चुनौती होगा। वहीं भारतीय कि‍सान यूनियन के महासवि‍च धर्मेंद्र मलि‍क ने बजट को एक रुटीन बताया वहीं मार्केट मि‍रर के एग्री रि‍सर्च हेड ने बजट को 10 में केवल 5 अंक दि‍ए। 


सरकार की मंशा अच्‍छी - विजय सरदाना 
इंटरनेशनल एग्री बिजनेस एक्‍सपर्ट विजय सरदाना कहते हैं कि अगर बजट के आवंटन को देखें तो यह काफी बड़ा है। सरकार कि‍सानों का वेलफेयर चाहती है यह साफ नजर आ रहा है। जो घोषणाएं की गई हैं वह काफी महत्‍वपूर्ण हैं। मगर सवाल उठता है उनके एग्‍जि‍क्‍यूशन का। ये जो इंफ्रास्‍ट्रक्‍चरल डेवलपमेंट सरकार कर रही है इसके साथ एपीएमसी एक्‍ट को भी सरकार को खत्‍म कर देना चाहि‍ए ताकि एक खुला मार्केट बन जाए, जि‍ससे कि‍सान और कंज्‍यूमर आपस में मि‍ल सकें। 
सरदाना के मुताबि‍क, जो भी बजट एलोकेशन है उसे लागू करने के लि‍ए एजेंसी तय हों और उनकी समय सीमा तय हो। रूरल इंडि‍या में करीब सवा लाख करोड़ हर महीने खर्च होना है, उसको खर्च करने का सि‍स्‍टम दुरुस्‍त होना चाहि‍ए। इनवेस्‍टमेंट के लि‍ए जो स्‍कीम बनाई है उनके एग्‍जीक्‍यूशन के लि‍ए जो एजेंसी हैं उन पर ध्‍यान देना चाहि‍ए अगर वही अच्‍छा नहीं होगा तो अच्‍छी मंशा होकर भी क्‍या फायदा होगा।  आगे पढ़ें - एमएसपी को छोड़ बाकी सब रुटीन

 


 

एमएसपी को छोड़कर बाकी सब रुटीन - धर्मेंद्र मलिक 


भारतीय कि‍सान यूनियन के महासचिव धर्मेंद्र मलि‍क ने कहा कि अरुण जेटली ने इस बजट में केवल बड़ी बड़ी बाते की हैं। पि‍छली बार की तरह इस बार भी उन्‍होंने कि‍सानों की भूमिका का महिमामंडन कि‍या मगर उन्‍हें कुछ खास नहीं दि‍या, जि‍सकी इस वक्‍त बहुत जरूरत थी। कि‍सानों को 11 लाख करोड़ कर्ज उनके लि‍ए तो एक मर्ज की तरह ही है। कृषि संकट को देखते हुए कृषि को वि‍शेष बेल आउट पैकेज देने की जरूरत थी। हर खेत को पानी देने की बात तो आप बीते 4 साल से कर रहे हैं, अब तक तो हर खेत को पानी मि‍ल जाना चाहि‍ए था। 


मलि‍क कहते हैं कि इस बजट में कि‍सानों के लि‍ए सबसे पॉजिटि‍व घोषणा यही है कि फसलों का न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य लागत से कम से कम डेढ़ गुना ज्‍यादा रहेगा। अगर सरकार वाकई कि‍सानों को नई एमएसपी दि‍लाने में कामयाब हो गई तो इससे कि‍सानों का काफी भला होगा। इसके अलावा पशुपालकों को भी जो कि‍सान क्रेडि‍ट कार्ड की सुविधा दी जा रही है वह भी स्‍वागत योग्‍य है। 
सरकार 2018-19 से कि‍सानों को काफी उम्‍मीद थी मगर वह पूरा नहीं हुई। इस बार का बजट बस रुटीन वर्क की तरह ही है। मैं बजट को 10 में से 4 अंक ही देता हूं। 


बजट को 10 में से 5 अंक देता हूं - हि‍तेशा भाला


मार्केट मि‍रर के एग्री रि‍सर्च हेडल हितेश भाला कहते हैं, मैं बजट को 10 में से 5 अंक देता हूं। बजट आने से पहले तक यह अनुमान था कि सरकार का फोकस एग्रीकल्‍चर होगा, मगर बजट में ऐसी बात नहीं दि‍खी। जो घोषणाएं सरकार पि‍छले 3 साल से करती आ रही है उन्‍हीं पर फोकस कि‍या गया। 
लागत से कम से कम 1.5 गुना पर एमएसपी तय करने का सरकार का कदम सराहनीय है मगर एक सवाल जस का तस है कि सरकार कि‍सानों को एमएसपी दि‍लाएगी कैसे। जो पिछले 04 वर्षो में नहीं हो पाया वो एक वर्ष में सरकार कैसे करेंगी। मेरे हिसाब से हर बार की तरह इस बार भी वित्त मंत्री जी ने बस आश्वासन दिए हैं। सरकार ने जो घोषणाएं की हैं, उनका असर दि‍खने में टाइम लगेगा। मैं बजट को 10 में से 5 अंक देता हूं। 
(तोयज कुमार सिंह से बातचीत पर आधारि‍त )

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