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इतिहास में दर्ज हो गए ये बजट, देश को मिली नई दिशा

नेहरू के लाइसेंस राज से मोदी के उदारीकरण तक देश ने कई ऐसे बजट देखे, जिन्होंने भारत की इकोनॉमी को नया आकार दिया।

इन बजट ने देश को दी नई दिशा-Union Budget 2018: Historical Budgets that gave new direction to Indian economy

नई दिल्‍ली. भारत का आर्थिक सफर हमेशा एक जैसा कभी नहीं रहा। नेहरू के लाइसेंस राज से मोदी के उदारीकरण तक देश ने कई ऐसे बजट देखे, जिन्होंने भारत की इकोनॉमी को नया आकार दिया। आजादी के तुरंत बाद नवंबर 1947 का अंतरिम बजट, 1951, 1956, 1961 और 1991 समेत ऐसे कुछ विशेष बजट हैं, जिन्होंने भारत में आर्थिक बदलाव की नई इबारत लिखी। आइए जानते हैं इतिहास लिखने वाले ऐसे ही कुछ बजट के बारे में- 
 

1947 का बजट 

खासियत: देश का पहला बजट
वित्त मंत्री: आर के षनमुखम चेट्टी (देश के पहले वित्त मंत्री)
बजट पेश हुआ: 26 नबंबर 1947
 
बजट का निर्णय: बजट पेश करने का फैसला ही इस बजट का सबसे अहम फैसला रहा। यह बजट 15 अगस्त 1947 से 31 मार्च 1948 तक (7.5 माह) के लिए पेश किया गया। इससे देश में फरवरी में ही बजट पेश करने की परंपरा की शुरुआत हुई।
 
ऐसा करने की वजह: दरअसल इससे पहले जिस बजट को सरकार की ओर से मंजूरी दी गई थी, वह देश के बंटवारे के साथ प्रभावहीन हो गया था। भारत के सामने पाकिस्तान से आने वाले शरणार्थियों को बसाने की बड़ी चुनौती थी। इसके लिए सरकार के पास पैसा नहीं था। ऐसे में बजट ने सरकार के खर्चों का मार्ग प्रशस्त किया।
  
खास बात: देश का यह पहला बजट 197.3 करोड़ रुपए का था। सरकार ने 171.1 करोड़ रुपए के राजस्व का अनुमान लगाया था। इस हिसाब से सरकार पहले ही बजट में 24.59 करोड़ के घाटे में रही। व्यापक गरीबी के बाद भी इस बजट में 92 करोड़ रुपए (बजट की करीब 45 फीसदी राशि ) का आवंटन रक्षा के लिए किया गया था। इस बजट में पाकिस्तान से आए लोगों को बसाने और खाद्य आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए बड़े कदम उठाए गए थे। 
 
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