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Budget 2018: गोल्ड पर इंपोर्ट ड्यूटी घटाए सरकार, ज्वैलरी इंडस्ट्री की डिमांड

मोदी सरकार जीएसटी लागू होने के बाद फरवरी में पहला आम बजट पेश करने जा रही है।

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नई दिल्ली... मोदी सरकार जीएसटी लागू होने के बाद फरवरी में पहला आम बजट 2018 पेश करने जा रही है। जीएसटी में ज्वैलरी इंडस्‍ट्री को लेकर कई नए नियम लगाए गए और कइ नियमों में बदलाव किए गए। ऐसे में ज्‍वैलरी इंडस्‍ट्री को इस आम बजट से काफी उम्‍मीदे हैं। बजट पेश होने से पहले ज्‍वैलर्स एसोसिएशन इंपोर्ट ड्यूटी कम किए जाने की डिमांड कर रहे हैं।

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आम बजट 2018 - ज्वैलरी इंडस्‍ट्री की ये है डिमांड 


ऑल इंडिया जेम्स एंड ज्वैलरी ट्रेड फेडरेशन (जीजेएफ) के चेयरमैन नितिन खंडेलवाल ने moneybhaskar.com को बताया कि सरकार ने स्मगलिंग रोकने के लिए गोल्ड पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाई थी। अब इस पर काफी हद तक कंट्रोल कर लिया गया है। इस बार हमें सरकार से इंपोर्ट ड्यूटी को 10 फीसदी से घटाकर 4 फीसदी करने की डिमांड है। उन्‍होंने आगे कहा कि ड्यूटी स्ट्रक्चर कम होने से गोल्ड की कीमत कम होगी और डिमांड बढ़ेगी। इससे गोल्ड इंडस्ट्री ऑर्गनाइज्ड होगी। बता दें कि जीजेएफ के साथ  अभी 4 लाख से अधिक ज्वैलर हैं। 

 

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आम बजट 2018 - होटल और ट्रैवल रिंबर्समेंट पर इनपुट क्रेडिट


- जीएसटी में ज्वैलरी की टूट-फूट और रिपेयर करने पर 18 फीसदी जीएसटी है।  इसे कम करके 5 फीसदी किया जाए। ये ज्वैलरी ठीक होने के लिए बाहर जाती है, जिसके कारण रिपेयर पर 18 फीसदी जीएसटी लगता है।
- उन्‍होंने आगे कहा कि ज्वैलर्स को होटल और ट्रैवल रिंबर्समेंट पर इनपुट क्रेडिट दिया जाए।
- वैसे तो अभी कैश परचेज लिमिट अभी 10 हजार रुपए है। लेकिन ज्‍वैलरी इंडस्‍ट्री चाहती है कि इसे बढ़ाकर एक लाख रुपए किया जाए।

 

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22 कैरेट गोल्ड की खरीद पर शुरू किया जाए EMI सिस्टम - बजट 2018 


नितिन खंडेलवाल ने आगे बताया कि देश में 60 से 70 फीसदी ज्वैलरी 22 कैरेट गोल्ड की बेची जाती है। सरकार को 22 कैरेट गोल्ड ज्वैलरी की खरीद पर EMI सिस्टम को फिर से शुरू करने की इजाजत देनी चाहिए। इससे अनऑर्गनाइज्ड सेक्टर को भी ऑर्गनाइज्ड होने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।

 

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आम बजट 2018 - असंगठित क्षेत्र को लेकर भी बजट में उम्‍मीदें 

 

हॉलमार्किंग को इंडिया में साल 2000 में भारत में लागू किया गया था लेकिन इसे अनिवार्य नहीं बनाया गया था। अब 17 साल के बाद भी इंडिया में अभी तक सिर्फ 15,000 ज्वैलर्स के पास हॉलमार्किंग का लाइसेंस है और देश में सिर्फ 500 हॉलमार्किंग टेस्ट लैब हैं। नितिन खंडेलवाल ने कहा कि सरकार को हॉलमार्किंग मैन्युफैक्चरिंग लेवल पर अनिवार्य बनाना चाहिए, जिससे असंगठित ज्वैलर्स भी हॉलमार्किंग के दायरे में आ सकें। खंडेलवाल ने कहा कि देश में हॉलमार्किंग को लेकर इंफ्रास्ट्रक्चर ही नहीं है जिसके कारण इसे लागू करना आसान नहीं है। 

 

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