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बजट 2018: गोल्ड पर इंपोर्ट ड्युटी घटाई जाए - नितिन खंडेलवाल

बजट 2018 - ज्वैलरी सेक्टर इस बार सरकार से इंपोर्ट ड्यूटी को 10 फीसदी से घटाकर 4 फीसदी करने उम्मीद कर रहा है।

India Union Budget 2018 - बजट 2018 में गोल्ड पर घटाई जाए इंपोर्ट ड्युटी

सरकार जीएसटी लागू होने के बाद फरवरी में पहला आम बजट 2018 पेश करने जा रही है। जीएसटी में ज्वैलरी इंडस्‍ट्री को लेकर कई नए नियम लगाए गए और कइ नियमों में बदलाव किए गए। सरकार ने गोल्ड की स्मगलिंग रोकने के लिए इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाई थी। अब इस पर काफी हद तक कंट्रोल कर लिया गया है। तो ज्वैलरी सेक्टर इस बार सरकार से इंपोर्ट ड्यूटी को 10 फीसदी से घटाकर 4 फीसदी करने उम्मीद कर रहा है। गोल्ड पर ड्यूटी स्ट्रक्चर कम होने से गोल्ड की कीमत कम होगी और डिमांड बढ़ेगी। इससे गोल्ड इंडस्ट्री को ऑर्गनाइज्ड बनने में मदद मिलेगी।

 

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कम की जाए इंपोर्ट ड्युटी

जीएसटी में ज्वैलरी की टूट-फूट और रिपेयर करने पर 18 फीसदी जीएसटी है। इसे कम करके 5 फीसदी किया जाना। ये ज्वैलरी ठीक होने के लिए बाहर जाती है, जिसके कारण रिपेयर पर 18 फीसदी जीएसटी लगता है। ज्वैलर्स को होटल और ट्रैवल रिंबर्समेंट पर इनपुट क्रेडिट मिलना चाहिए। अभी कैश परचेज लिमिट 10 हजार रुपए है जिसे ज्‍वैलरी इंडस्‍ट्री चाहती है कि बढ़ाकर एक लाख रुपए किया जाए।

 

ज्वैलरी सेल पर शुरू की जाए EMI सिस्टम
देश में 60 से 70 फीसदी ज्वैलरी 22 कैरेट गोल्ड की बेची जाती है। सरकार को 22 कैरेट गोल्ड ज्वैलरी की खरीद पर EMI सिस्टम को फिर से शुरू करने की इजाजत देनी चाहिए। इससे अनऑर्गनाइज्ड सेक्टर को भी ऑर्गनाइज्ड होने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।

 

हालमार्किंग किया जाए अनिवार्य

हॉलमार्किंग को इंडिया में साल 2000 में भारत में लागू किया गया लेकिन इसे अनिवार्य नहीं बनाया गया था। अब 17 साल के बाद भी इंडिया में अभी तक सिर्फ 15,000 ज्वैलर्स के पास हॉलमार्किंग का लाइसेंस है और देश में सिर्फ 500 हॉलमार्किंग टेस्ट लैब हैं। सरकार को हॉलमार्किंग मैन्युफैक्चरिंग लेवल पर अनिवार्य बनाना चाहिए, जिससे असंगठित ज्वैलर्स भी हॉलमार्किंग के दायरे में आ सकें।

 

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