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  • Transport Ministry rejected deadline given by NITI Aayog to ban petrol and diesel vehicles

इलेक्ट्रिक वाहन /नीति आयोग की डेडलाइन को परिवहन मंत्रालय ने सिरे से खारिज किया

  • मंत्रालय ने कहा, आनन-फानन में पेट्रोल एवं डीजल के वाहनों को सड़क से गायब नहीं किया जा सकता है

Moneybhaskar.com

Aug 22,2019 02:17:15 PM IST

नई दिल्ली। ऑटो सेक्टर को राहत देने वाली खबर है। सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि उनके मंत्रालय ने डीजल एवं पेट्रोल से चलने वाले गाड़ियों को हटाने के लिए कोई डेडलाइन तय नहीं की है और इस मामले में नीति आयोग के प्रस्ताव पर कोई विचार नहीं किया जा रहा है। इससे ऑटो सेक्टर को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है क्योंकि ऑटो सेक्टर की बिक्री लगातार कम हो रही है और यह 19 साल के निचले स्तर पर पहुंच चुकी है।

इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहन देना जारी रखेगा मंत्रालय

एक कार्यक्रम में गडकरी ने कहा कि पेट्रोल एवं डीजल से चलने वाली गाड़ियों को बैन करने के लिए कोई डेडलाइन तय नहीं की गई है। कई राज्य इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीदारों को प्रोत्साहित कर रही है और धीरे-धीरे इस क्षेत्र में बदलाव होगा। मंत्रालय इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहन देना जारी रखेगा। हाल में मंत्रालय की तरफ से राज्य सरकार को सलाह दी गई थी कि चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने के लिए जमीन आवंटन में मदद दी जानी चाहिए।

पेट्रेाल-डीजल के वाहनों को सड़क नहीं किया जा सकता है गायब

तीन माह पहले नीति आयोग ने अपनी एक रिपोर्ट में देश में इलेक्ट्रिक वाहनों को चरणबद्ध रूप से लाने एवं पेट्रोल एवं डीजल वाहनों को सड़क से हटाने का रोडमैप का उल्लेख किया था। रिपोर्ट में कहा गया था कि सभी थ्री व्हीलर एवं 150 सीसी से कम के टू व्हीलर को 2025 तक बिल्कुल इलेक्ट्रिक होने की जरूरत है। दूसरी तरफ, सड़क परिवहन मंत्रालय का मानना है कि ऑटो सेक्टर देश के लिए काफी अहम है और जीएसटी में ऑटोमोबाइल सेक्टर का 11 फीसदी का योगदान है। देश के जीडीपी में ऑटोमोबाइल सेक्टर का 7 फीसदी का योगदान होता है। ऐसे में, आनन-फानन में पेट्रोल एवं डीजल के वाहनों को सड़क से गायब नहीं किया जा सकता है।

चार्जिंग स्टेशन लगाने के लिए सरकार देगी इंसेंटिव

नीति आयोग से पहले भारत सरकार भी 2030 तक 50 फीसदी से अधिक गाड़ियों को इलेक्ट्रिक मोड में लाने की बात कह चुकी है। हालांकि अभी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की भारी कमी के कारण इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रसार पर शक जाहिर किया जा रहा है। सरकार चार्जिंग स्टेशन लगाने के लिए भी इंसेंटिव देने की घोषणा कर चुकी है।

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