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मनी भास्कर खास /दो महीनों में सिर्फ 100 इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की बिक्री, पेट्रोल वाले दोपहिया साल में बिकते हैं 2 करोड़

Manoj Kumar

Jun 10,2019 12:53:00 PM IST

नई दिल्ली। इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों को लेकर सरकार चाहे जितने भी बड़े-बड़े वादे कर रही हो, लेकिन हकीकत यह है कि पिछले दो महीनों में मात्र 100 दोपहिया वाहनों की बिक्री फेम-2 के तहत हुई है। फेम-2 के तहत सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री पर सब्सिडी देती है ताकि लोग इनकी खरीद के लिए प्रोत्साहित हो सकें। सरकार का कहना है कि 2023 के बाद से देश में पेट्रोल से चलने वाले दोपहिया वाहनों का पंजीयन नहीं किया जाएगा। इस मामले में उद्योग जगत का कहना है कि अगर ऐसा होता है तो ऑटो इंडस्ट्री बर्बाद हो जाएगी।

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इस साल अप्रैल से लागू हुआ है फेम-2

सोसायटी ऑफ मैन्यूफैक्चरर्स ऑफ इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (एसएमईवी) के मुताबिक फेम-2 इस साल अप्रैल से लागू किया गया है। इससे पहले फेम-1 के तहत सब्सिडी दी जा रही थी। एसएमईवी के निदेशक एवं हीरो इलेक्ट्रिक के सीईओ एसएस गिल ने मनी भास्कर को बताया कि फेम-1 के तहत दोपहिया वाहनों की बिक्री पर 22,000 रुपए की सब्सिडी थी, जो फेम-2 में कम हो कर 10,000 रुपए रह गई है क्योंकि अब सब्सिडी को बैट्री से लिंक कर दिया गया है। अब एक किलोवाट की बैट्री पर 10,000 रुपए सब्सिडी दी जा रही है और इलेक्ट्रिक वाहनों की कीमत को कम रखने के लिए अधिकतर इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों में एक किलोवाट की बैट्री ही लगाई जा रही है। गिल ने मनी भास्कर को बताया कि सब्सिडी कम होने से 75-80,000 रुपए से इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की कीमत की शुरुआत होती है। उन्होंने बताया कि पिछले साल भारत में दोपहिया वाहनों की बिक्री 2 करोड़ से अधिक रही और उनमें इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या मात्र 1.25 लाख थी। यानी कि दोपहिया वाहनों की कुल बिक्री में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी 1 फीसदी भी नहीं है। ऐसे में, 2023 तक पूर्ण रूप से इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों को चला लेना तार्किक नहीं लगता है। गिल ने मनी भास्कर को बताया कि पिछले दो महीनों अप्रैल-मई में सिर्फ 100 दोपहिया इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री हुई है। उन्होंने बताया कि इलेक्ट्रिक वाहनों में सब्सिडी लेने के लिए उसमें लगने वाले मैटेरियल घरेलू होने चाहिए। इस कारण से भी निर्माताओं को दिक्कत आ रही हैं। इसका कारण यह है कि घरेलू मैटेरियल महंगे होते हैं जिससे वाहनों की लागत बढ़ जाती है।

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चार्जिंग स्टेशन एवं बैट्री स्वैपिंग की भी नहीं है व्यवस्था

वर्ष 2023 तक केवल इलेक्ट्रिक वाहनों के पंजीयन के नियम को सरकार तभी लागू कर सकती है जब पेट्रोल पंप की तरह हर एक-दो किलोमीटर पर चार्जिंग स्टेशन या बैट्री स्वैपिंग की व्यवस्था हो। अभी दिल्ली-मुंबई जैसे शहरों में भी चार्जिंग स्टेशन की संख्या 200 से भी कम है। ये चार्जिंग स्टेशन भी एनटीपीसी जैसी कुछ सरकारी कंपनियों के प्रयास से लगाए गए हैं। एसएमईवी का कहना है कि बुनियादी सुविधाओं के बगैर सरकार अपनी मंशा में कभी सफल नहीं हो सकती है।

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