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ये हैं फेमस कार कंपनि‍यों के डर्टी सीक्रेट, चली गई हजारों लोगों की जान

1935 में बीएमडब्ल्‍यू के प्‍लांट में एडॉल्‍फ हि‍टलर 1935 में बीएमडब्ल्‍यू के प्‍लांट में एडॉल्‍फ हि‍टलर
6 सीटर मर्सडीज-बेंज में एडॉल्‍फ हि‍टलर। (फोटो क्रेडि‍ट : रॉयटर्स) 6 सीटर मर्सडीज-बेंज में एडॉल्‍फ हि‍टलर। (फोटो क्रेडि‍ट : रॉयटर्स)
फॉक्‍सवैगन की कार बीटल के मॉडल को देखते हि‍टलर। फॉक्‍सवैगन की कार बीटल के मॉडल को देखते हि‍टलर।

ऐसी कंपनि‍यां कंपनि‍यां हैं जो आज भी अपने नाम पर लगे दाग को मि‍टाने की कोशि‍श कर रही हैं। वर्ल्‍ड वॉर 2 के दौरान नाजी दौर में कई कंपनि‍यों को अपना कारोबार और कमाई बढ़ाने के लि‍ए हजारों मजदूरों की जरूरत पड़ी।

MoneyBhaskar

Oct 09,2017 11:26:00 AM IST

नई दि‍ल्‍ली। दुनि‍या की फेमस और पॉपुलर कार कंपनि‍यों का इति‍हास सुनहरा होने के साथ-साथ काफी डरावना भी है। ऐसी कंपनि‍यां कंपनि‍यां हैं जो आज भी अपने नाम पर लगे दाग को मि‍टाने की कोशि‍श कर रही हैं। वर्ल्‍ड वॉर 2 के दौरान नाजी दौर में कई कंपनि‍यों को अपना कारोबार और कमाई बढ़ाने के लि‍ए हजारों मजदूरों की जरूरत पड़ी। यह मजदूर दूसरे देशों से पकड़े गए गुलाम थे। इन गुलामों से तब तक मजदूरी कराई जाती थी जब तक ये मर नहीं जाते थे। यहां हम आपको कुछ कंपनि‍यों के ऐसे ही काले सच से रू-ब-रू करा रहे हैं।
जापान की कंपनी मि‍त्‍सुबि‍शी‍ मैटि‍रि‍यल ने स्‍वीकार कि‍या कि‍ उन्‍होंने वर्ल्‍ड वॉर-2 के दौरान अपनी कोयला खानों में चीन के लोगों से जबर्दस्‍ती काम कराया था। इसके ऐवज में कंपनी ने प्रत्‍येक बचे हुए लोगों को और मरने वालों के परि‍वारों को 15 हजार डॉलर (करीब 10 लाख रुपए) देने का एलान कि‍या था और उनसे माफी भी मांगी।
मित्‍सुबि‍शी इकलौती कंपनी नहीं है जि‍सने वर्ल्‍ड वार-2 के दौरान लोगों को गुलाम बनाकर अपने बि‍जनेस को ऊंचाइयों पर पहुंचाया। इनमें बीएमडब्‍ल्‍यू, मर्सडीज, फॉक्‍सवैगन, ऑडी जैसी कंपनि‍यां भी शामि‍ल हैं। माना जाता है कि‍ इन कंपनि‍यों ने 3 लाख गुलामों को मजदूर बनाया था।
मित्‍सुबि‍शी‍ मैटि‍रि‍यल
मि‍त्‍सुबि‍शी‍ मैटि‍रि‍यल ने स्‍वीकार कि‍या कि उनके पूर्वजों, मि‍त्‍सुबि‍शी‍ माइनिंग ने वर्ल्‍ड वार-2 के दौरान 3,765 चीनी कैदि‍यों को जबर्दस्‍ती मजदूर बनाया था। इसमें 722 लोगों की मौत हो चुकी है। जापान के सरकारी रि‍कॉर्ड के मुताबि‍क, चीन के करीब 39 हजार लोगों को जापान की सरकार ने बेहद खराब स्‍थि‍ति‍ में जबर्दस्‍ती मजदूर बनाया और इसमें से कई लोग अत्‍याचार की वजह मर गए।
86 वर्षीय पूर्व मजदूर येन यूचेंग ने कहा कि‍ 1943 से 1945 के बीच करीब 40 हजार चीन के वासि‍यों से जापान की 35 कंपनि‍यों में जबर्दस्‍ती काम कराया था। इसमें से करीब 7,000 लोगों की मौत अत्‍याचार की वजह से हो गई।
(फोटो क्रेडि‍ट : Everett/REX: Shuterstock)
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बीएमडब्ल्यू जर्मनी की लग्जरी कार कंपनी बीएमडब्ल्यू ने अपने 100 साल पुरे होने पर जश्न मनाने के साथ-साथ शोक भी व्यक्त किया। बीएमडब्ल्यू ने वर्ल्ड वार-2 के दौरान नाजी द्वारा कैद किए गए गुलाम मजूदरों से माफी मांगी। 50 हजार लोग गुलाम बीएमडब्ल्यू के फाउंडर गुंथेर क्वांट ने वर्ल्ड वार के दौरान करीब 50 हजार गुलाम मजदूरों से अपनी आर्म्स फैक्ट्रियों में जबर्दस्ती काम कराया। जहां वह गोलियां, राइफल, आर्टिलरी और यू-बोट बैट्रियों का प्रोडक्शन किया जाता था। उनके पोते गैबरिल क्वांट ने कहा कि उनके परिवार के इस इतिहास को नकारा नहीं जा सकता। गुंथेर क्वांट को हिटलर ने ‘Wehrwirtschaftsführer’; का टाइटल दिया जिसका मतलब ‘वार इकोनॉमी का लीडर’; है। आगे पढ़ें...डेमलर - मर्सडीज-बेंज मर्सडीज-बेंज की पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी डेमलर भी 1920 से 1930 के बीच दूसरी जर्मन इंजीनियरिंग कंपनियों की तरह नाजी के साथ मिलकर काम करती थी। डेमलर ने कई साल पहले ही यह स्वीकार कर लिया था कि उसने करीब 40 हजार गुलाम मजदूरों से जबर्दस्ती काम कराया था। इस दौरान कंपनी को करोड़ों का मुनाफा भी हुआ। डेमलर-एजी द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान नाजियों के लिए ट्रक (एलजी 3000) और एयरक्राफ्ट इंजन (डीबी 600 और डीबी 601) का प्रोडक्शन करती थी। इसके अलावा, मिलिट्री व्हीकल्स का स्पेयर पार्ट्स बनाने के साथ-साथ रिपेयर का काम करती थीं। आगे पढ़ें...(फोटो क्रेडिट: अलामी) ऑडी दुनिया की बड़ी लग्जरी कार कंपनियां ने वर्ल्ड वॉर-2 के दौरान 20 हजार गुलामों को मजदूर बनाया था। युद्ध के दौरान ऑडी का नाम ग्रुप ऑटो यूनियन था। कंपनी ने बंदी शिविर से 3,700 लोगों को मजदूर बनाया था। हालांकि, अर्थशास्त्री और इतिहासकार रुडॉफ बॉश ने अपनी स्टडी में खुलासा किया कि कंपनी ने अन्य 16,500 मजदूरों से जबर्दस्ती काम कराया था। यह मजदूर बंदी शिविर के कैदी नहीं थे। इसमें से कईयों की मौत भी हुई। उनकी किताब ‘वॉरटाइम इकोनॉमी और लेबर यूसेज ऑफ ऑटो यूनियन’; में लिखा है कि कंपनी ने 12 साल तक मजदूरों से काम कराया। उस वक्त सिर्फ मर्सडीज इसकी सबसे बड़ी कॉम्पिटीटर थी। विश्व युद्ध के दौरान कुल लग्जरी कार मार्केट में कंपनी की हिस्सेदारी 20 फीसदी थी। युद्ध के दौरान कंपनी का प्लांट मिलिट्री प्रोडक्शन में तबदील हो गया था, जहां टैंक और एयरक्राफ्ट इंजन का प्रोडक्शन होता था। आगे पढ़ें...फॉक्सवैगन फॉक्सवैगन ने भी माना कि वर्ल्ड वार-2 के दौरान कंपनी ने 12 हजार गुलामों से मजदूरी कराई थी। यह खुलासा तब हुआ जब अमेरिका के वकीलों ने फॉक्सवैगन और कई दूसरी जर्मन कंपनियों के खिलाफ गुलाम मजदूरों को लेकर क्लास-एक्शन सूट फाइल किया। इसके बाद फॉक्सवैगन ने इस बात को स्वीकारा की कंपनी ने युद्ध के दौरान कैदियों से काम कराया था। कंपनी ने जिंदा कर्मचारियों को मुआवजा देने के लिए करीब 1.2 करोड़ डॉलर का फंड भी बनाया।
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1935 में बीएमडब्ल्‍यू के प्‍लांट में एडॉल्‍फ हि‍टलर1935 में बीएमडब्ल्‍यू के प्‍लांट में एडॉल्‍फ हि‍टलर
6 सीटर मर्सडीज-बेंज में एडॉल्‍फ हि‍टलर। (फोटो क्रेडि‍ट : रॉयटर्स)6 सीटर मर्सडीज-बेंज में एडॉल्‍फ हि‍टलर। (फोटो क्रेडि‍ट : रॉयटर्स)
फॉक्‍सवैगन की कार बीटल के मॉडल को देखते हि‍टलर।फॉक्‍सवैगन की कार बीटल के मॉडल को देखते हि‍टलर।

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