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जानकारी /ब्लाइंड स्पॉट डिटेक्शन समेत कार के 5 सेफ्टी फीचर्स, जो कम कर देते हैं दुर्घटनाओं की संभावना

  • भारत में सेफ्टी फीचर्स के अभाव में बड़ी संख्या में दुर्घटनाएं होती है, जिसमें लोगों की जान चली जाती है। 

Moneybhaskar.com

Dec 26,2019 07:31:30 PM IST

नई दिल्ली. भारत में सड़क दुर्घटनाओं से होने वाली मौतों में पिछले कुछ सालों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इन दुर्घटनाओं के पीछे कई कारक जिम्मेदार रहते हैं। लेकिन दुर्घटना के लिए जिसे सबसे बड़ा कारक माना गया है, वो व्हीकल सेफ्टी फीचर्स का न होना है। सेफ्टी फीचर्स वाहन दुर्घटनाओं को पूरी तरह से नहीं रोक सकते हैं। लेकिन कुछ ऐसे खास सेफ्टी फीचर्स हैं, जो इन दुर्घटनाओं की संभावनाओं को कम कर सकते हैं। आइए जानते हैं ऐसे ही सेफ्टी फीचर्स के बारे में।

ऑटोमेटिक इमर्जेंसी ब्रेक

जैसा कि नाम से मालूम चलता है कि यह फीचर्स अचानक बड़ी दुर्घटना के वक्त अपने हिसाब से ब्रेक कंट्रोल करता है। यह फीचर्स वाहन को दूसरे वाहन और पैदल यात्री से एक तय दूरी पर रखता है। वहीं दुर्घटना की स्थिति में यह अतिरिक्त ब्रेक पावर अप्लाई करता है या फिर ऑटोमेटिकली कार को रोक देता है। हालांकि ऑटोमेटिक इमर्जेंसी ब्रेक पूरी तरह से फुलप्रूफ नहीं होता है। लेकिन इतना जरूर है कि कई बार दुर्घटनाओं से बचाता है। एक कंज्यूमर सर्वे में 81 फीसदी ब्रेक कार ओनर ने ऑटोमेटिक इमर्जेंसी ब्रेक को कारगार माना है।

ब्लाइंड स्पॉट डिटेक्टर

ब्लाइंड स्पॉट डिडेक्टर सिस्टम सेंसर आधारित होता है, जो कि ड्राइवर को तीव्र मोड के वक्त अलर्ट करता है, साथ ही दूसरी साइड से आने वाली कार के बारे में भी सूचना देता है। दूसरी कार के गुजरने के वक्त साइट मिरर की लाइट इल्यूमिनेट और एक वार्निंग साउंड आती है। कंज्यूमर रिपोर्ट में 82 फीसदी कार ओनर इस फीचर से संतुष्ट नजर आएं।

लेन डिपार्चर वार्निंग

यह फीचर भी सेंसर आधारित होता है। जब कार अपनी लेन से बाहर जाती हैं, तो यह ड्राइवर को आगाह करता है। इससे खासकर लॉन्ग ड्राइव करते वक्त ड्राइवर को काफी आसानी रहती है। मतलब लेन डिपार्चर वार्निंग फीचर ऑन करने के बाद ड्राइवर कुछ वक्त के लिए ड्राइविंग व्हील से अपने हाथ हटाकर उन्हें रिलैक्स कर सकता है। एक कंज्यूमर रिपोर्ट सर्वे के मुताबिक करीब 73 फीसदी कार ओनर इस फीचर से खुश नजर आएं। इसका इस्तेमाल अभी प्रीमियम कार में किया जाता है। जल्द ही अफोर्डेबल कार में भी इन फीचर्स को पेश किया जा सकता है।

एडाप्टिव क्रूज कंट्रोल

यह नॉर्मल क्रूज कंट्रोल से ज्यादा बेहतर होता है। फीचर में यह सुविधा होती है कि एक बार कार की स्पीड की लिमिट तय कर दी जाएं, तो कार आसपास की दूसरी गाड़ी, पैदल यात्रियों से कितनी दूरी पर चलना है खुद-ब-खुद निर्धारित कर लेती है। इस फीचर्स का फायदा यह रहता है कि ड्राइवर थोड़ी देर के लिए अपने पैरों को ब्रेक और कल्च से हटाकर रिलैक्स कर सकता है। ऐसे में यह फीचर्स भी लॉन्च ड्राइव के लिए काफी कारगर साबित होता है। कंज्यमूर सर्वे की तरफ से इस फीचर्स को 85 फीसदी एक्यूरेट माना गया है।

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