दावा /ऑटो सेक्टर में मंदी बनावटी, सरकार पर दबाव बनाना चाहती हैं कंपनियां: कैट

  • कैट के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल बोले- मंदी है तो फिर कंपनियों को कैसे मिल रही धड़ाधड़ बुकिंग

Moneybhaskar.com

Sep 17,2019 04:12:00 PM IST

नई दिल्ली। कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट ) ने दावा किया है कि ऑटो सेक्टर में कोई मंदी नहीं है। केवल वाहन निर्माता कंपनियां सरकार पर दबाव बनाने के लिए मंदी का रोना रो रही हैं। मंगलवार को दिल्ली में एक प्रेसवार्ता से इतर बात करते हुए कैट के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने कहा कि ऑटो सेक्टर में यह मंदी बनावटी है। खंडेलवाल का कहना है कि यदि इस सेक्टर में मंदी का माहौल है तो ओला-ऊबर जैसी कंपनियों का कारोबार लगातार क्यों बढ़ रहा है।

मंदी होती तो कंपनियों को कैसे मिलती धड़ाधड़ बुकिंग

मनी भास्कर से बातचीत में प्रवीन खंडेलवाल ने कहा कि मंदी के यह हालात बनावटी हैं। खंडेलवाल का कहना है कि हाल ही में भारतीय ऑटो सेक्टर में कदम रखने वाली एमजी हेक्टर कंपनी को पहले दिन ही कार की 21 हजार बुकिंग मिली हैं। यदि मंदी की स्थिति होती तो नई कंपनियों को भी धड़ाधड़ बुकिंग कैसे मिलती। खंडेलवाल ने दावा किया कि वाहन निर्माता कंपनियां जीएसटी, कृषि संकट, नौकरियों में कमी, नकदी तरलती की कमी को मंदी के लिए जिम्मेदार ठहरा रही हैं, जबकि हकीकत यह है कि वाहन निर्माता कंपनियों का एक समूह सरकार पर दबाव बनाकर राहत पैकेज लेना चाहता है। उनका कहना है कि सरकार पर दबाव बनाने के लिए ही वाहन निर्माता कंपनियां एक-एक करके अपने प्लांट बंद कर रही हैं।

गलत दावा कर रही हैं ई-कॉमर्स कंपनियां

प्रेस कॉन्फ्रेंस में कैट के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने कहा कि अमेजन और फ्लिपकार्ट जैसी ई-कॉमर्स कंपनियों विक्रेताओं को उनके संबंधित प्लेटफॉर्म पर कीमतें तय करने के अधिकार देने संबंधी गलत दावे कर रही हैं। कैट का कहना है कि दोनों कंपनियों का यह बयान बिलकुल तर्कहीन है और अपने प्लेटफॉर्म पर चल रही गलत प्रथाओं को सही ठहराने की एक कोशिश है जबकि वास्तव में स्थिति कुछ और ही है। खंडेलवाल ने कहा कि ये कंपनियां सरकार की एफडीआई नीति का घोर उल्लंघन कर रही हैं जिसमें ई-कॉमर्स कंपनियों की भूमिका को अच्छी तरह से परिभाषित किया है और इसमें कोई अस्पष्टता नहीं है। एफडीआई नीति के प्रमुख प्रावधानों के अनुसार ई-कॉमर्स मार्केटप्लेस मॉडल में 100% एफडीआई की अनुमति है और जिसके तहत ई-कॉमर्स कंपनियां तकनीकी प्लेटफॉर्म के रूप में कार्य कर सकती हैं। इसमें आगे कहा गया है कि इस तरह की ई-कॉमर्स कंपनियां केवल बिजनेस टू बिजनेस (बी 2 बी) में संलग्न होंगी और बिजनेस टू कंज्यूमर्स (बी 2 सी) की गतिविधियां अपने प्लेटफॉर्म पर बिलकुल नहीं कर सकेंगी।

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