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मुसीबत /ऑटो पार्ट का कारोबार 10 फीसदी घटा, 6 माह में एक लाख लोगों का छिना रोजगार

  • एक्मा के मुताबिक यह पहला मौका है जब ऑटो सेक्टर में इतनी बड़ी गिरावट दर्ज की गई है।
  • ऑटो उपकरण पर एक समान 18 प्रतिशत का वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) किए जाने की मांग

Moneybhaskar.com

Dec 06,2019 03:29:35 PM IST

नई दिल्ली. ऑटोमोबाइल उद्योग में पिछले एक साल से छाई सुस्ती के कारण ऑटो पार्ट उद्योग के कारोबार में 2019-20 की पहली छमाही में 10.1 फीसद की गिरावट आई और यह पिछले साल की इसी अवधि के 199849 करोड़ रुपए से घटकर 179662 करोड़ रुपए रह गया। भारतीय ऑटोमोटिव कम्पोनेंट निर्माता संघ (एक्मा) के अध्यक्ष दीपक जैन और महानिदेशक विन्नी मेहता के मुताबिक चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही (जनवरी से जुलाई) तक एक लाख लोगों के रोजगार गए। उन्होंने कहा कि यह पहला मौका है जब ऑटो उपकरण उद्योग के कारोबार में इतनी बड़ी गिरावट दर्ज की गई है।

जीएसटी कम करने की मांग


जैन ने उद्योग के कारोबार में गिरावट के कारण गिनाते हुए कहा वाहनों की मांग में कमी बीएस-4 से बीएस-6 वाहनों के निर्माण के लिए हालिया निवेश, तरलता की तंगी और इलेक्ट्रिक वाहनों की नीति को लेकर संशय के अलावा अन्य कारणों की वजह से वाहन उपकरण क्षेत्र की विस्तार योजनाओं पर असर पड़ा। देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में दो प्रतिशत से अधिक का योगदान और पचास लाख लोगों को रोजगार देने वाले उद्योग की दीर्घकालिक आधार पर निरंतर गति बनाये रखने के लिए श्जैन ने ऑटो उपकरण पर एक समान 18 प्रतिशत का वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) किए जाने की सरकार से मांग की है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में 60 प्रतिशत ऑटो उपकरण पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगता है जबकि शेष 40 प्रतिशत जिसमें मुख्यत: दुपहिया और ट्रैक्टर उपकरण है 28 प्रतिशत जीएसटी है। उन्होंने कहा कि दुपहिया और ट्रैक्टर उपकरणों पर अधिक जीएसटी होने से ग्रे बाजार को बढ़ावा मिलता है। सभी उपकरणों पर 18 प्रतिशत जीएसटी कर दिए जाने से वाहन बिक्री के बाद ग्राहकों को गुणवत्ता वाले उपकरण तो मिलेंगे ही सरकार की आय भी बढ़ेगी। इसके अलावा निवेश के लिहाज से मध्यम एवं लघु उद्योगों की परिभाषा में भी बदलाव की जरूरत है।

5 ट्रिलियन अर्थव्यस्था में ऑटो सेक्टर का बड़ा योगदान


मेहता ने बताया कि चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में ऑटो उपकरणों का निर्यात 2.7 प्रतिशत बढ़कर पहले के 50034 करोड़ रुपए से 51397 करोड़ रुपए पर पहुंच गया। यूरोप को सर्वाधिक 32 प्रतिशत निर्यात किया गया जबकि इसके बाद नार्थ अमेरिका और एशिया क्रमश 30 और 26 प्रतिशत रहे। इस दौरान आयात 6.7 प्रतिशत घटकर 61686 करोड़ रुपए से 57574 करोड़ रुपए रह गया। आयात मुख्यत: 62 प्रतिशत एशिया से रहा। यूरोप और नॉर्थ अमेरिका से आयात क्रमश: 28 और आठ प्रतिशत रहा। वाहन बिक्री के बाद उपकरणों की बिक्री के कारोबार में चार प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और यह 33746 करोड़ रुपए से 35096 करोड़ रुपए पर पहुंच गया। जैन ने कहा कि देश के ऑटो मोबाइल क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं और यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के देश की अर्थव्यवस्था को 50 खराब डालर बनाने में अहम योगदान कर सकता है।

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