Home » Auto » Industry/ Trendsऐसी है होंडा की अनसुनी कहानी - untold story of success of Soichiro Honda

कभी बम ने कि‍या बर्बाद तो कभी बि‍क गई फैक्‍ट्री, ऐसी है Honda की अनसुनी कहानी

शायद ही ऐसा कोई शख्‍स होगा जि‍सने होंडा मोटर कंपनी के बारे न सुना हो।

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नई दि‍ल्‍ली। शायद ही ऐसा कोई शख्‍स होगा जि‍सने होंडा मोटर कंपनी के बारे न सुना हो। और इसमें हैरान होने वाली कोई बात भी नहीं है क्‍योंकि‍ 140 से ज्‍यादा देशों में लोग होंडा की बाइक्‍स, कार्स, बोट मोटर्स, मि‍नी ट्रैक्‍टर्स, पावर स्‍टेशन आदि‍ को खरीद रहे हैं। कंपनी को इस मुकाम पर पहुंचने के लि‍ए जि‍स शख्‍स ने सबसे ज्‍यादा मेहनत की वह हैं सोइचि‍रो होंडा। न कि‍सी बड़े परि‍वार का साथ न कॉलेज की डि‍ग्री, इसके बावजूद सोइचि‍रो होंडा ने कंपनी को खड़ा कि‍या। यहां हम आपको बता रहे हैं सोइचि‍रो होंडा की अनकही और अनसुनी कहानी जो शायद आप न जानते हों। 

 

होंडा कंपनी के फाउंडर सोइचि‍रो होंडा का जन्‍म 17 नवंबर 1906 को जापान, हमामटसू, शि‍जूओका में हुआ। उनकी मां कपड़ा बुनने का काम करती थी और उनके पि‍ता साइकि‍ल रि‍पेयर करने का काम करते थे। उनके पि‍ता टोक्‍यो में बेहद कम दाम पर टूटी हुई बाइक्‍स खरीदते थे और उसे रि‍पेयर करके बेचते थे। सोइचि‍रो अपने पि‍ता की मदद करते थे। तभी से बाइसि‍कल पार्ट्स उनके पसंदीदा खि‍लौने बन गए। 

 

ऑटो रि‍पेयर शॉप में शुरू कि‍या काम

 

1922 में आठ साल की स्‍कूट की पढ़ाई करने के बाद सोइचि‍रो को एक दि‍न न्‍यूजपेपर में नौकरी का वि‍ज्ञापन मिला, जोकि‍ टोक्‍यो में एक आर्ट शोकाई ऑटो रि‍पेयर शॉप में एसि‍स्‍टेंट के लि‍ए कहा था। वह सब छोड़ कर टोक्‍यो चले गए लेकि‍न उम्र कम होने की वजह से उनको केवल सफाई और खाना बनाने की नौकरी ही मि‍ली। इसके बावजूद ऑटो रि‍पेयर शॉप के मालि‍क ने सोइचि‍रो को दूसरी वर्कशॉप में हर रात रेसिंग कार डि‍जाइन करने की मंजूरी दे दी। 

 

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रेसिंग कार डि‍जाइन करने का काम 

 

1923 में आए भूकंप के दौरान सोइचि‍रो ने तीन कारों को गैराज से बाहर नि‍कालने का काम कि‍या। होंडा को एसि‍स्‍टेंट का काम मि‍ल गया और उन्‍होंने रेसिंग कार डि‍जाइन करने में वर्कशॉप के मालि‍क और उनके भाई की मदद की। रेस के दौरान सोइचि‍रो एक मैकेनि‍क के तौर पर रहे और उनकी टीम 1924 में हुए पांचवे जापान मोटर कार चैम्‍पि‍यनशि‍प में पहले नंबर पर रही। 

 

भूकंप ने बदला फैसला

 

इससे बाद वर्कशॉप का काम बढ़ गया। वर्कशॉप के मालि‍क ने अपने बि‍जनेस को बढ़ाया और कई फ्रेंचाइजी खोल दी। इसमें से एक फ्रेंचाइजी सोइचि‍रो को मि‍ली। टोक्‍यो में पाए भूकंप के बाद होंडा ने तय कि‍या कि‍ वह व्‍हीकल्‍स के लि‍ए टिकाऊ स्‍पेयर पार्ट्स बनाएंगे।

 

सोइचि‍रो होंडा ने लकड़ी के स्‍पोक्‍स को मेटल से बदल दि‍या और उनके इस आवि‍ष्‍कार का उन्‍हें पेटेंट भी मि‍ला। इसकी वजह से आर्ट शोआई वर्कशॉप को काफी कमाई हुई। लेकि‍न यह होंडा के लि‍ए पर्याप्‍त नहीं था। उन्‍होंने पि‍स्‍टन रिंग बनाने की कोशि‍श की और अपनी सारी बचत रि‍सर्च लैब में लगा दी। लेकि‍न वर्कशॉप के कि‍सी भी डायरेक्‍टर ने उनकी कोई मदद नहीं की।  

 

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मौत के मुंह से बाहर नि‍कले होंडा

 

होंडा ने खुद को रेसिंग कार डि‍जाइन में लगा दि‍या। उन्‍होंने खुद का इंजन कूलिंग का तरीका नि‍काला। होंडा से सभी स्‍पोर्ट कारों की असल दि‍क्‍कत को सुलझा दि‍या। उनका इंजन रेस के दौरान ज्‍यादा गर्म होने पर फटता नहीं था। सोइचि‍रो ने रेस में हि‍स्‍सा लेने का फैसला लि‍या। 1936 में जापान हाई स्‍पीड रैली में वह मरते-मरते बचे। उनकी कार 120 कि‍मी प्रति‍ घंटे की स्‍पीड से चल रही थी। अचानक फि‍निंच पर एक कार रूक गई और होंडा की कार क्रैश कर गई। वह तीन महीने तक हॉस्‍पि‍टल में ही रहे। 

 

टोयोटा ने कि‍या नि‍राश

 

जब वह हॉस्‍पि‍टल में थे तो उन्‍हें खबर मि‍ली कि‍ टोयोटा कंपनी ने उनके हाल ही बनाए 30 हजार पि‍स्‍टन रिंग की जांच की है और उसमें से केवल 50 को वि‍चार में रखा गया और केवल तीन पीस ही क्‍वालि‍टी टेस्ट में पास हो पाए। 

 

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शुरू कि‍या खुद का बि‍जनेस

 

हॉस्पि‍टल से बाहर नि‍कलने के बाद होंडा ने अपना खुद का बि‍जनेस शुरू कि‍या। 1937 में उन्होंने 'Tokai Seiki' नाम से कंपनी शुरू की और पि‍स्‍टन रिंग बनाना शुरू कि‍या। आखि‍रकार उनको प्रोडक्‍शन टेक्‍नोलॉजी मि‍ल गई और इससे बाद उनका सफर शुरू हुआ। सि‍नो-जापान युद्ध और उसके बाद वि‍श्‍व युद्ध-2 के दौरान होंडा की कंपनी टोयोटा के 40 फीसदी पि‍स्‍टन रिंग की सप्‍लाई करती थी। इसके अलावा, शि‍पबि‍ल्‍डिंग और एयरक्राफ्ट मैन्‍युफैक्‍चरिंग कंपनि‍यं को भी सप्‍लाई करती थी। 

 

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अमेरि‍का ने गि‍राया बम, बेचनी पड़ी फैक्‍ट्री


वि‍श्‍व युद्ध -2 में जापान की हार के बाद 'Tokai Seiki' का अंत हो गया। 1945 में हमामतसू में अमेरि‍की एयरक्राफ्ट की भारी बम्‍बारी की गई। होंडा को लगने लगा कि‍ देश गरीबी के दौर में जा रहा है और उनको अपनी फैक्‍ट्री को दोबारा शुरू नहीं करने का फैसला लि‍या बल्‍कि‍ उन्‍होंने अपनी कंपनी टोयोटा को 45 हजार येन में बेच दी। होंडा ने इसमें से 10 हजार येन केवल शराब खरीद ली और सार्वजनि‍क तौर पर कहा कि‍ वह एक साल तक कुछ नहीं करेंगे। 

 

बनानी शुरू की मोपेड और मोटरसाइकि‍ल

 

1946 में होंडा ने अपनी खुद की फैक्‍ट्री - 'होंडा टेक्‍नोलॉजी रि‍सर्च इंस्‍टीट्यूट' खोगी और मोपेड का प्रोडक्‍शन शुरू कि‍या। 1949 में उन्‍होंन दो-स्‍ट्रोक इंजन के साथ पहली मोटरसाइकि‍ल 'द ड्रीम' को बनाया। 1958 में उनका मॉडल 'सुपर क्‍लब' में शामि‍ल हो गया। उन्‍होंने 50 जापानी कंपनी को नहीं बल्‍कि‍ दूसरे देशों के 200 कॉम्‍पीटि‍टर्स को भी पीछे छोड़ दि‍या। 80 के दशक तक होंडा का ग्‍लोबल मोटरसाइकि‍ल इंडस्‍ट्री का 60 फीसदी कब्‍जा हो गया। इतना ही नहीं, 80 के दशक में होंडा जापान की तीसरी सबसे बड़ी कार मैन्‍युफैक्‍चरर भी बन गई।

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