Home » Auto » Industry/ TrendsTata Nano may survive if company except ola and uber order, revealed in ratan tata letter to mistry

मि‍स्‍त्री की वजह से डूब गई Nano और Maruti का हो गया फायदा, रतन टाटा के लेटर में हुआ खुलासा

टाटा मोटर्स ने ओला और उबर से Nano और Indica के लि‍ए मि‍लने वाले बड़े ऑर्डर को गंवा दि‍या।

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नई दि‍ल्‍ली। टाटा ग्रुप के पूर्व चेयरमैन रतन टाटा और साइरस मि‍स्‍त्री की आपसी लड़ाई का खामि‍याजा ग्रुप और कंपनी की छोटी कार Nano को भुगतना पड़ा। इस झगड़े की वजह से टाटा मोटर्स ने ओला और उबर से Nano और Indica के लि‍ए मि‍लने वाले बड़े ऑर्डर को गंवा दि‍या। वहीं, इसका फायदा Maruti Suzuki को मि‍ल गया। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) की मुंबई बेंच ने 9 जुलाई को मि‍स्‍त्री और उनकी परि‍वारि‍क कंपनि‍यों की ओर से दाखि‍ल की गई सभी याचि‍काओं को खारि‍ज कि‍या। बेंच के 368 पेज के ऑर्डर में पता चला कि‍ करीब तीन साल पहले टाटा मोटर्स ने एक बड़े ऑर्डर को गवां दि‍या था। 

 

रतन टाटा ने मि‍स्‍त्री को लि‍खा था लेटर  

ऑर्डर के मुताबि‍क, टाटा ने मि‍स्‍त्री को 16 सि‍तंबर 2015 के दि‍न एक लेटर लि‍खा था जि‍समें ओला की ओर से दि‍ए गए खरीद प्रस्‍ताव का जि‍क्र है। रतन टाटा ने लि‍खा, 'तुम्‍हें याद होगा कि‍ 1 सि‍तंबर को हम पुणे में साथ में थे, तो मैंने कहा था कि‍ भावेश अग्रवाल (ओला कैब के को-फाउंडर) ने मुझे 10,000 नैनो और इंडि‍का/इंडि‍गो को टाटा मोटर्स से खरीदने, लीज या ज्‍वाइंट वेंचर के लि‍ए दिलचस्पी जाहिर की थी। वह टाटा मोटर्स से सालाना आधार पर 1.50 लाख व्‍हीकल्‍स खरीदने का प्‍लान बना रहे थे।'

 

 

टाटा मोटर्स को थी डील की जरूरत

रतन टाटा ने लि‍खा, 'ओला यह लेन-देन टाटा मोटर्स के साथ करना चाहती थी लेकि‍न टाटा मोटर्स की ओर से कोई पॉजि‍टि‍व रि‍स्‍पॉन्‍स नहीं मि‍ला। वहीं, मारुति‍ सुजुकी हर दि‍न उनके पीछे पड़ी थी।' टाटा ने यह भी लि‍खा कि‍ उन्‍हें उम्‍मीद थी कि‍ टाटा मोटर्स इस डील को पूरा करे, क्‍योंकि‍ मार्केट में टाटा मोटर्स की सेल्‍स लगातार गि‍र रही थी। इसके अलावा, नई पेश हुई बोल्‍ट और जेस्‍ट को भी मार्केट ने स्‍वीकार नहीं कि‍या था।     

 

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10 महीने का बि‍जनेस खो दि‍या

कोर्ट ऑर्डर के मुताबि‍क, टाटा ने मयंक पारेख (जो इस वक्‍त टाटा मोटर्स के पैसेंजर व्‍हीकल बि‍जनेस यूनि‍ट के प्रेसि‍डेंट हैं) को लेटर लि‍खा था। इसमें उन्‍होंने कहा था कि‍ 1.50 लाख व्‍हीकल्‍स बेचने का मतलब है करीब 10 महीने का बि‍जनेस। उन्‍होंने पारेख से यह भी पूछा था कि‍ अगर मारुति‍ सुजुकी को ऑर्डर मि‍लता है तो कंपनी इस बात का जवाब कैसे मैनेजमेंट देगी। क्‍यों कंपनी इस तरह के बि‍जनेस से दूर रही। कोर्ट ऑर्डर के मुताबि‍क, यही वजह रही कि‍ टाटा ने मयंक को लेटर लि‍खा और मयंक ने तुरंत इसका ध्‍यान मि‍स्‍त्री को दि‍लाया।      

 

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मि‍स्‍त्री की ओर से शैलेश चंद्रा ने दि‍या था जवाब

ऑर्डर के मुताबि‍क, मि‍स्‍त्री के नि‍र्देश पर शैलेश चंद्रा नाम के एक व्‍यक्‍ति‍ ने मयंक को कहा कि उबर ने कंपनी को ज्‍यादा बेहतर ऑफर दि‍या है इसलि‍ए वह ओला को जल्‍द जवाब नहीं दे रहे हैं। 

 

 

जब उबर से भी नहीं हुई डील...

उबर से भी कोई डील नहीं होने पर टाटा ने मि‍स्‍त्री को लेटर लि‍खकर कहा, '1.50 लाख इंडि‍का और नैनो को बेचने के प्रस्‍ताव का कंपनी को स्‍वागत करना चाहि‍ए था क्‍योंकि‍ यह मौजूद सेल्‍स लेवल के हि‍साब से 15 महीने का प्रोडक्‍शन था। अगर टाटा मोटर्स ओला कैब्‍स और उबर के प्रस्‍तावों को पूरा कर लेती तो कंपनी का फायदा होता। कंपनी ने मारुति‍ सुजुकी के हाथों बि‍जनेस का बड़े मौके को गवां दि‍या, जबकि‍ टाटा मोटर्स को इसकी जरूरत थी।'

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