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कार है हल्की तो होगी खराब, लोगों को हो जाती है कई गलतफहमियां

नई दि‍ल्‍ली। आपने लोगों से यह कहते हुए सुना होगा कि‍ फलाना कार बड़ी हल्‍की है, तो यह खराब ही होगी। या फि‍र कार का वजन बड़ा कम है, तो यह सेफ कैसे हो सकती है। आजकल कारों का वजन तेजी से कम हो रहा है। इस वजह से लोगों के बीच भारी कार और हल्‍की कार को लेकर बहस चल रही है। हल्‍की कारों को लेकर लोगों के बीच कई गलतफहमि‍यां है। यहां हम आपको बता रहे हैं, क्‍या हैं वह गलतफहमि‍यां और क्‍या है इनका सच।

 

क्‍या हल्‍की कार सेफ हैं

 

नि‍सान के कल्‍चर ऑफ केयर में कहा गया है कि‍ यह गलतफहमी है कि‍ हल्‍की कारें उतनी सेफ नहीं होती जि‍तनी की बड़ी और भारी कारें। लेकि‍न अब ऐसा बि‍ल्‍कुल भी नहीं है। कार्बन फाइबर कम्‍पोजि‍शन, एल्‍युमि‍नि‍यम, मैग्‍नि‍शि‍यम और स्‍टील ब्‍लेंड्स के इनोवेटि‍व मैटि‍रि‍यल्‍स की वजह से इंजीनि‍यर्स बि‍ना ताकत और टि‍काऊपन से समझौता कि‍ए व्‍हीकल का वजन कम करने में सफल हो रहे हैं।  

 

क्रैश टेस्‍ट में यह पाया गया है कि‍ स्‍टील ब्‍लेंड्स एनर्जी को अपने भीतर समेटते हुए फोल्‍ड और डि‍फॉर्म हो जाते हैं जैसे कि‍ क्रश कि‍या हुआ सोडा कैन। वहीं, कार्बन फाइबर कम्‍पोजीशन लेयर्स में बंट जाते हैं। यह सुनने में हाई टेक लगता है लेकि‍न मूल बात यह है कि‍ कम्‍पोजीशन मैटिरि‍यल्‍स असर में ज्‍यादा बेहतर ढंग से एनर्जी को समेटते हैं।  

 

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