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10 सेकंड में पता करें सेकंड हैंड कार-बाइक की कीमत, खरीदने-बेचने दोनों में होगा फायदा

पता कर सकते हैं 15 से 16 साल में बने करीब 1000 मॉडल्स और 4000 वेरिएंट्स की कीमत

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नई दिल्ली। देश की बड़े ऑनलाइन ऑटोमोबाइल ट्रांसजैक्शन मार्केटप्लेस ड्रूम ने दो साल पहले यूनिक प्राइसिंग इंजन ऑरेज बुक वैल्यू (OBV) को पेश किया था। किसी भी यूज्ड ऑटोमोबाइल की सही मार्केट वैल्यू बताने का वादा करने वाले OBV प्लेटफॉर्म का यूजर बेस 28 माह के भीतर ही 20 करोड़ हो गया है। ड्रूम ने जारी बयान में कहा है कि कार बायर्स या कार डीलर्स मात्र 10 सेकंड में किसी भी व्हीकल की मार्केट वैल्यू जान सकते हैं। कंपनी ने कहा कि 20 करोड़ यूजरबेस के साथ OBV भारत का तीसरा सबसे बड़ी सर्च इंजन बन गया है। कंपनी ने कहा कि पहले 10 करोड़ यूजर्स ऑपरेशन शुरू होने के पहले 20 माह में ही बन गए थे जबकि अगले 10 करोड़ यूजर्स आखिरी के 8 माह में जुड़े हैं।

 

कंपनी ने क्या कहा

 

OBV की पॉपुलेरिटी पर ड्रूम के फाउंडर और सीईओ संदीप अग्रवाल ने कहा कि लाखों भारतीय अपने व्हीकल्स को बेचने या खरीदने से पहले यूनिक और फायदेमंद प्रोडक्ट OBV पर भरोसा कर रहे हैं। यह देखकर बेहद खुशी हो रही है। OBV से प्री-ओनड व्हीकल्स को बिना परेशानी खरीदना और बेचना ही आसान नहीं हुआ है बल्कि इससे यूज्ड व्हीकल्स के सर्च टाइम और सर्च कॉस्ट भी कम हो गया है। OBV की मदद से हम व्हीकल की कीमत तय करने से पहले स्टेटिस्टिकल प्रमाण के आधार पर चेकप्वाइंट, एल्गॉरिदम के आधार पर प्राइसिंग और इंडस्ट्रियल ट्रेंड को चेक करते हैं।

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करीब 1000 मॉडल्स का डाटा

 

ड्रूम के OBV पर हर महीने करीब 1.5 करोड़ यूजर्स यूज्ड व्हीकल की फेयर मार्केट वैल्यू पता कर रहे हैं। यहां कारों, मोटरसाइकिल, स्कूटर, बाइसिकल्स और प्लेन जैसे व्हीकल कैटेगरीज को शामिल किया गया है। प्लेटफॉर्म पर बीते 15 से 16 साल में बने करीब 1000 मॉडल्स और 4000 वेरिएंट्स को कवर किया गया है।

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कैसे होता है काम

 

आप OBV के प्लेटफॉर्म पर जा कर अपना मकसद यानी खरीदने या बेचने के ऑप्शन को चुनें। इसके बाद, व्हीकल की कैटेगरी (कार, बाइक, स्कूटर, प्लेन) को सेलेक्ट करें। फिर विभिन्न पैरामिटर जैसे मॉडल, मॉडल का साल, मॉडल का वेरिएंट और मॉडल की कंडीशन को भरें। यह सब करने के बाद आपको व्हीकल का फेयर मार्केट वैल्यू पता चल जाएगा।

 

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किस-किस के लिए फायदेमंद

 

-बायर्स और सेलर्स को व्हीकल की सही कीमत का अंदाजा लग सकता है। ऐसे में बिचौलियों को दी जाने वाला मार्जिन का भी पता चल जाएगा। वहीं, मोल-भाव करना भी आसान हो जाएगा।

-कार डीलर्स के लिए भी यूज्ड व्हीकल की कीमत का पता आसान से चल जाएगा।

-बैंक और एनबीएफसी भी व्हीकल को साइट ऑफ करने से पहले इसका यूज कर सकते हैं।

-इंश्योरेंस कंपनियां किसी भी यूज्ड व्हीकल का सही एश्योर्ड डिक्लेयर वैल्यू (IDV) पता कर सकते हैं।

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