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इंडि‍यन ऑटोमोबाइल में चीन की बैकडोर एंट्री, मेक इन इंडि‍या के लि‍ए बड़ा खतरा

अब चीन भारत की ऑटोमोबाइल इंडस्‍ट्री में भी तेजी से एंट्री कर रहा है।

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नई दि‍ल्‍ली। चीन भले ही सीधे तौर पर इंडि‍यन ऑटोमोबाइल इंडस्‍ट्री में एंट्री नहीं कर पाया है लेकि‍न उसने इसका भी तोड़ नि‍काला है। आपको चीन की पॉपुलर ऑटोमोबाइल  कंपनि‍यां न दि‍खती हो लेकि‍न भारत में चलने वाली कारों, ट्रक्‍स और बसों में लगे टायर्स, पार्ट्स चीन के ही हैं। इतना ही नहीं, जो कंपनि‍यां भारत में पॉपुलर हो गई हैं, उन पर चीन की कंपनि‍यों का ही स्‍वामि‍त्‍व है। ऑटो कॉम्‍पोनेंट से लेकर टायर्स तक का इंपोर्ट चीन से बढ़ रहा है। इतना ही नहीं, कई बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनि‍यां, जो भारत में मौजूद हैं, उनमें चीन की हि‍स्‍सेदारी काफी बढ़ रही है। ऐसे में अप्रत्‍यक्ष रूप से भारतीय ऑटोमोबाइल इंडस्‍ट्री में चीन अपनी मौजदूगी को बढ़ा रहा है।

 

भारत की सबसे बड़े लग्‍जरी कार ब्रांड में चीन का हि‍स्‍सा

 

जर्मनी की ऑटोमोबाइल कंपनी डेमलर में चीन की मल्‍टीनेशनल ऑटोमोटि‍व कंपनी गेली ने 9.69 फीसदी हि‍स्‍सेदारी खरीदी है। गेली ने डेमलर के कार ब्रांड मर्सडीज-बेंज पर 9 अरब डॉलर दांव लगाया है। इस रकम के साथ गेली के चेयरमैन ली शूफू ग्रुप के सबसे बड़े स्‍टेकहोल्‍डर हो गए हैं।

 

भारत की नजर से देखें तो मर्सडीज-बेंज इंडि‍या देश की सबसे बड़ी लग्‍जरी कार कंपनी है जबकि‍ डेमलर इंडि‍या कमर्शि‍यल व्‍हीकल्‍स (DICV) भारत में भारत बेंज ट्रक्‍स और बसों के साथ कमर्शि‍यल सेगमेंट में मौजूद है।

 

इस मोटरसाइकि‍ल कंपनी में चीन का हाथ

 

साल 2005 में चीन के Qianjiang Group ने इटली की बाइक कंपनी बेनेली को खरीदा था और उसके कुछ साल बाद बेनेली बाइक्‍स को देश में बेचने के लि‍ए इस ग्रुप ने पूणे स्‍थि‍त डीएसके मोटोव्‍हील के साथ ज्‍वाइंट वेंचर कि‍या।

 

इलेक्‍ट्रि‍क बसों को बेच रही है चीन की कंपनी

 

इसी तरह, चीन की इलेक्‍ट्रि‍क बस कंपनी BYD ने 200 करोड़ रुपए के इन्‍वेस्‍टमेंट के साथ भारत में प्‍लांट खोला है। कंपनी ने हैदराबाद की कंपनी गोल्‍ड स्‍टोन ग्रुप के साथ पार्टनरशि‍प कर गोल्‍डस्‍टोन इंफ्राटेक नाम से इंडि‍यन कंपनी बनाई है। गोल्‍डस्‍टोन इंफ्राटेक ने हाल ही में हि‍माचल प्रदेश ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन को 25 इलेक्‍ट्रि‍क बसें सप्‍लाई की हैं। बसों में यूज होने वाले करीब 75 फीसदी चीन से आ रहे हैं।

 

भारत में आने वाली नई कार कंपनी में भी चीन का हि‍स्‍सा

 

चीन की SAIC मोटर कॉर्प की पूर्ण स्‍वामि‍त्‍व वाली कंपनी एमएजी मोटर इंडि‍या ने सोमवार को कहा है कि‍ वह भारत में अगले पांच से छह साल में 5,000 करोड़ रुपए से ज्‍यादा का इन्‍वेस्‍टमेंट करेगी। कंपनी भारत में 2019 से हर साल एक नए प्रोडक्‍ट को लॉन्‍च करने की तैयारी कर रही है।

 

ये थी भारत में चीन की पहली कार कंपनी!

 

गेली ने भारत में अप्रत्‍यक्ष रूप से तभी एंट्री कर ली थी जब उसने 2010 में स्‍वीडन पैसेंजर कार कंपनी वॉल्‍वो कार्स को खरीदा था। पि‍छले साल गेली ने 3.9 अरब डॉलर के इन्‍वेस्‍टमेंट के साथ वॉल्‍वो की सबसे बड़ी हि‍स्‍सेदारी हासि‍ल की थी। भारत में वॉल्‍वो ने आश्‍यर मोटर्स के साथ ज्‍वाइंट वेंचर कि‍या और वह हाई ऐंड ट्रक्‍स और बसों को स्‍वतंत्र रूप से बेच रही है।

 

असल कंपनी भारतीय कंपनी चीन की कंपनी का हि‍स्‍सा
टकाटा कॉर्प. टकाटा इंडि‍या Ningbo Joyson
डेमलर एजी मर्सडीज-बेंज इंडि‍या Geely
वॉल्‍वो कार्स वॉल्‍वो कार इंडि‍या Geely
वॉल्‍वो एबी वॉल्‍वो एबी इंडि‍या Geely
बेनेली डीएसके मोटव्‍हील Qianjiang Group
बीवाईडी गोल्‍डस्‍टोन बीवाईडी BYD
एसईजी ऑटोमोटि‍व एसईजी इंडि‍या Zhengzhou Coal Mining Machinery Group

 

एयरबैग और सेफ्टी पार्ट्स बनाने वाली कंपनी भी चीन के पास

 

एयरबैग और सेफ्टी पार्ट्स बनाने वाली कंपनी टकाटा को Ningbo Joyson Electronic Corp ने खरीदा है। इसके साथ ही, चीन ने इंडि‍यन ओईएम सप्‍लायर सेगमेंट में अपनी पकड़ मजबूत की है। टकाटा का पॉजि‍शन राजस्‍थान, तमि‍लनाडु और महाराष्‍ट्र में काफी मजबूत है।

 

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कार में लगे टायर्स भी चीन के

 

भारत में टायर मार्केट में भी चीन का हि‍स्‍सा बढ़ रहा है। भारत में टायर्स बेचने के लि‍ए मि‍ले 115 बीआईएस लाइसेंस में से 36 चीन की कंपनि‍यों के पास हैं। चीन से इंपोर्ट होने वाले ऑटोमोटि‍व टायर्स भी 2013-14 में 582.86 करोड़ रुपए से बढ़कर 2016-17 में 1,6501 करोड़ पहुंच गई। हालांकि‍, सरकार ने चीन के ट्रक्‍स और बस रेडि‍यल टायर्स पर एंटी डंपिंग ड्यूटी लगाई है।

 

चीन से आने वाले ऑटो काम्पोनेंट्स

 

ऑटो कॉम्‍पोनेंट्स के मामले चीन का इंपोर्ट लगातार बढ़ रहा है। अप्रैल-फरवरी 2018 में भारत में चीन से 3.95 अरब डॉलर के ऑटो पार्ट्स इंपोर्ट कि‍ए गए हैं। वहीं, भारत ने चीन में 29.5 करोड़ डॉलर के ही ऑटो पार्ट्स एक्‍सपोर्ट कि‍ए हैं। 2013-14 में चीन से होने वाला इंपोर्ट 2.6 अरब डॉलर था।

 

चीन से ऑटो पार्ट्स का इंपोर्ट

 

फाइनेंशि‍यल ईयर इंपोर्ट (डॉलर में) चीन की हि‍स्‍सेदारी
2013-14 2.5 अरब 18 फीसदी
2014-15 2.7 अरब 21 फीसदी
2015-16 3.2 अरब 24 फीसदी
2016-17 3.2 अरब 23 फीसदी
2017-18 3.6 अरब 26 फीसदी
 
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