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रतन टाटा और Sergio Marchionne की दोस्‍ती Jeep Compass को ले आई भारत

बुधवार को Sergio Marchionne का 66 साल की उम्र में नि‍धन हो गया।

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नई दि‍ल्‍ली। Jeep Compass भारत नहीं आने वाली थी। कम से कम Jeep के डि‍जाइन स्‍टूडि‍यो के डायरेक्‍टर मार्क टी. ऐलन को ऐसा नहीं लगता था, जब उन्‍होंने उभरती हुई मार्केट्स के लि‍ए साल 2012 में इस कार को डि‍जाइन कि‍या था। उस वक्‍त यह कोई नहीं जानता था कि‍ जीप कम्‍पास भारत में बनेगी और यहां से राइट हैंड ड्राइव मॉडल्‍स को एक्‍सपोर्ट भी होगी। अंग्रेजी अखबार मिंट की रि‍पोर्ट के मुताबि‍क, ऐलन ने पि‍छले साल गोवा में बताया कि‍ यह हमारे चेयरमैन (उस वक्‍त Sergio Marchionne) और रतन टाटा के बीच का असल रि‍श्‍ता है। इसलि‍ए ऐसा हुआ है। इसलि‍ए शायद हम इस कार को भारत में लेकर आए। 

 

मात्र पांच साल पहले प्रत्‍येक बनने वाली जीप केवल अमेरि‍का में ही मैन्‍युफैक्‍चर होती थी। इससे पता चलता है कि‍ Sergio Marchionne भारत और रतन टाटा को कि‍तना चाहते थे। बुधवार को Sergio Marchionne  का 66 साल की उम्र में नि‍धन हो गया। वह गंभीर बीमारी से लड़ रहे थे और अस्‍पताल में सर्जरी के दौरान हुई दि‍क्‍कत के बाद उनकी मौत हो गई।   

 

2006 में फि‍एट ने भारत पर लगाया था दांव

 

साल 2006 में जब Marchionne फि‍एट को मुश्‍कि‍ल दौर से नि‍कालने के लि‍ए लड़ रहे थे, उस वक्‍त उन्‍होंने भारत पर दांव लगाया था। दि‍ल्‍ली ऑटो एक्‍सपो में रतन टाटा के साथ अपने ट्रेडमार्क ब्‍लैक सूट पहने Sergio Marchionne ने कार बनाने और डि‍स्‍ट्रि‍ब्‍यूट करने के लि‍ए अलायंस कि‍या था। यह कदम इटैलियन कंपनी के लि‍ए बेहद खराब साबि‍त हुआ और फि‍एट ब्रांड का ऑपरेशन बंद करना पड़ा। वहीं, जीप को भारत में पेश कि‍या गया। 

 

इसके बाद जीप की सफलता के बारे में आज सब जानते हैं। आज जीप कम्‍पास देश में सबसे तेजी से बढ़ने वाला एसयूवी ब्रांड बन गया है और इसने फि‍एट क्रि‍स्‍लर को दुनि‍या की सबसे तेजी से बढ़ने वाली ऑटो मार्केट में नई दि‍शा दी है। 

 

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क्‍या टाटा के साथ जुड़े रहे Marchionne

 

नैनो के मामले में टाटा ने एक उदाहरण बनाया है। Marchionne ने साल 2008 में बि‍जनेसलाइन को बताया था कि‍ उनका (टाटा का) ग्‍लोबलाइजेशन को लेकर अप्रोच बेहद मजेदार है और टाटा के बारे में मैंने जो एक महान चीज पाई है, वो है उनका भारत में एक राष्‍ट्र बनाने की सोच और प्रति‍बद्धता, जि‍से बाकी दुनि‍या भूल चुकी है। उन्‍होंने कहा कि‍ बेशक हमारे वि‍चार में वि‍भि‍न्‍नताएं थीं जि‍सका समाधान जल्‍द ही हो गया लेकि‍न सैद्धांति‍क असहमति‍ कभी नहीं थी। एक समय था जब मैं रतन के साथ अजीबो-गरीब चीजों पर चर्चा करता था, लेकि‍न हम ऐसे ही थे। हम पहले दोस्‍त थे और बाद में बि‍जनेसमैन। 

 

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फि‍एट को थी नई जिंदगी 

 

Marchionne को फि‍एट की कमान साल 2003 में दी गई, उस वक्‍त कंपनी को 6 अरब यूरो (करीब 7 अरब डॉलर) से ज्‍यादा का नुकसान हुआ था। लेकि‍न 2005 में उन्‍होंने जनरल मोटर्स के साथ अलायंस, हजारों वर्कर्स की छंटनी, नए मॉडल्‍स को पेश करने और नई कार को लॉन्‍च के वक्‍त को 4 साल से घटाकर 18 महीने करते हुए कंपनी को मुनाफे में पहुंचा दि‍या।  

 

साल 2009 में अमेरि‍का के राष्‍ट्रपति‍ बराक ओबामा के प्रशासन ने फि‍एट को क्रि‍स्‍लर एलएलसी का कंट्रोल दि‍ए जाने का ऐलान कि‍या। जि‍सकी वजह से अमेरि‍कन ऑटोमोबाइल कंपनी क्रि‍स्‍लर दि‍वालि‍या होने से बच गई।

 

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