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जिस Jeep के सहारे भारत में जमाई थी धाक, उसी के साथ महिंद्रा की छिड़ गई जंग

Jeep और फिएट के साथ चल रही लड़ाई के वजह दांव पर लगी है महिंद्रा की इज्जत

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नई दिल्ली। साल 1948 में जब महिंद्रा एंड महिंद्रा का नामकरण हुआ तब कंपनी ने बड़ी मल्टी पर्पस व्हीकल्स को बनाने और बेचने के कारोबार में संभावनाएं तलाशी। नतीजा, महिंद्रा ने भारत में Willys Jeep के साथ एग्रीमेंट किया। इस एग्रीमेंट के तहत भारत में पहली बार Jeep को देखा गया। अब यही Jeep विदेश में महिंद्रा के लिए मुसीबत बन गई है और उससे कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ रही है।      

 

फिएट ने यूएस इंटरनेशनल ट्रेड कमीशन (USITC) के सामने दावा किया है कि महिंद्रा एंड महिंद्रा के Roxor कार का डिजाइन उसके Jeep ब्रांड से चुराया है। फिएट ने महिंद्रा पर इंटिलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है। वहीं, महिंद्रा ने फिएट के इस आरोप को आधारहीन बताया है। 

 

USITC ने अपने बयान में कहा है कि वह आरोप के लिए निश्चित तारीख तय करेगा। यह मामला अब महिंद्रा की साख के लिए बेहद अहम हो गया है। महिंद्रा ने अमेरिका में यूटिलिटी और कमर्शियल व्हीकल्स को 2004 में बेचना शुरू किया था। गौरतलब है कि Roxor एक ऑफ रोड यूटिलिटी व्हीकल है जिसे महिंद्रा ऑटोमोटिव नॉर्थ अमेरिका (MANA) द्वारा असेंबल किया जा रहा है। Roxor एक तरह से महिंद्रा थार का वर्जन है।  

 

क्या है मामला?

 

फिएट क्रिस्लर ने 1 अगस्त 2018 को USITC में अपनी शिकायत में दावा किया कि Roxor का लुक और डिजाइन कंपनी के आईकॉनिक ब्रांड जीप की कॉपी है। ब्लूमबर्ग के मुताबिक, दावों में कहा गया कि Roxor ने बॉक्सी बॉडी शेप के साथ फिएट वर्टिकल साइड्स और समान ऊंचाई तक जाने वाली रीयर बॉडी को कॉपी किया है। फिएट क्रिस्लर ने कहा कि यह करीब-करीब आईकॉनिक जीप डिजाइन जैसी दिख रही है। इतना ही नहीं, यह प्रोडक्ट 'ओरिजनल Willys Jeep’ पर बनाया गया है।  

 

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फिएट क्रिस्लर क्यों हो रही है परेशान?

 

फिएट क्रिस्लर को डर है कि Roxor की वजह से उनके अपने ब्रांड जीप को कड़ी चुनौती मिलेगी। उनका दावा है कि सस्ती Roxor से महिंद्रा को कीमत का फायदा मिलेगा क्योंकि महिंद्रा इसे भारत में  नोक्ड डाउन किट्स के तहत अमेरिका में इंपोर्ट कर रही है। भारत में मैन्युफैक्चरिंग की लागत कम है। 

 

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, फिएट क्रिस्लर अपने जीप प्रोडक्ट पर काफी निर्भर है। कंपनी ने जुलाई में जीप ब्रांड व्हीकल्स की सबसे ज्यादा सेल्स हासिल की है। जीप ब्रांड की सेल्स में 16 फीसदी का इजाफा दर्ज किया गया। फिएट ने अपनी शिकायत में कहा है कि महिंद्रा के इस कदम से कंपनी की साख और कारोबार को नुकसान पहुंचेगा। 

 

फिएट क्रिस्लर ने अपनी शिकायत में पैसों की मांग नहीं है बल्कि वह फिएट क्रिस्लर के इंटिलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स का उल्लंघन करने वाले किसी भी पार्ट्स या कॉम्पोनेंट्स को महिंद्रा ऑटोमोटिव द्वारा अमेरिका में इंपोर्ट करने से रोकना चाहती है।  

 

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महिंद्रा ने आरोप से इनकार

 

महिंद्रा ने फिएट क्रिस्लर की शिकायत को बेबुनियाद बताते हुए खारिज कर दिया है। उनका दावा है  दोनों कंपनियों का 1940 के दशक से एक लंबा लाइसेंसिंग रिश्ता है। इसके अलावा, लाइसेंसिंग रिश्ते  में Willys के साथ ओरिजन एग्रीमेंट और 2009 में क्रिस्लर ग्रुप LLC के साथ एग्रीमेंट शामिल हैं।  

 

महिंद्रा की नार्थ अमेरिकन यूनिट के स्पोक्सपर्सन रिच एनसेल ने कहा कि हमारा काम, प्रोडक्ट्स और प्रोडक्ट्स डिस्ट्रब्यूशन (Roxor भी शामिल)  रिश्तों की महानता का आदर करता है। FCA (और जीप ब्रांड) के साथ महिंद्रा का रिश्ता भारत और कई अन्य देशों में 25 साल से ज्यादा का है।   

 

महिंद्रा का पलटवार

 

महिंद्रा ने मिशेगन फेडरल कोर्ड में शिकायत दर्ज कराते हुए फिएट को USITC दावे में हिस्सा लेने से रोकने की मांग की है। उन्होंने USITC में एक पब्लिक इंटरेस्ट स्टेटमेंट दर्ज कराते हुए बताया है कि कैसे फिएट के खिलाफ और महिंद्रा के हक में ITC का आदेश लोगों की रुचि में रहेगा।   

 

महिंद्रा ने साफ तौर पर इससे इनकार किया है कि ROXOR कम क्लाविटी वाली 'नॉक-ऑफ किट कार’ है जिसे इंपोर्ट किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि साल 2009 में इस बात पर सहमति हुई थी कि अगर हम उनके अप्रूवड ग्रिल को यूज करेंगे तो वह कभी भी इस तरह का दावा नहीं करेंगे। हमाया यह भी तर्क है कि फिएट इस केस का इस्तेमाल हमारे ROXOR बिजनेस को नुकसान पहुंचाने के लिए कर रही है।

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