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बांस से कार चलाएगा ये पूरा राज्‍य, मोदी के इस सपने को करेगा साकार

चाय पैदा करने वाले आसाम में हर साल 6 करोड़ लीटर का इथेनॉल बनाने के लि‍ए एक ज्‍वाइंट कि‍या गया है।

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नई दि‍ल्‍ली। भारत का एक राज्‍य अपने चाय के बगानों के लि‍ए सबसे ज्‍यादा पॉपुलर है, लेकि‍न अब यह राज्‍य कि‍सी और वजह से भी प्रसि‍द्ध होने की तैयारी कर रहा है। यह राज्‍य अपने घनी हरि‍याली को नए इस्‍तेमाल में आना चाहता है। यहां एक ऑयल रि‍फाइनरी शुरू की जा रही है।

 

चाय पैदा करने वाले आसाम में हर साल 6 करोड़ लीटर का इथेनॉल बनाने के लि‍ए एक ज्‍वाइंट कि‍या गया है। ब्‍लूमबर्ग की रि‍पोर्ट के मुताबि‍क, नुमालि‍गढ़ रि‍फाइनरी लि. और फि‍नलैंड की टेक्‍नोलॉजी कंपनी चेम्‍पोलि‍स ओवाई मि‍लकर बांस से इथेनॉल बनाएंगी। यह ज्‍वाइंट वेंचर 20 करोड़ डॉलर का है।  

 

पूरे राज्‍य के काम आएगा

 

यह पूरे उत्‍तर पूर्व क्षेत्र में गैसोलि‍न के साथ सम्‍मिश्रण के लिए अनि‍वार्य जरूरतों को पूरा करने के लि‍ए पर्याप्‍त है। भारत के कुल बांस प्रोडक्‍शन में एक दूसरे से सटे इन आठ राज्‍यों की हि‍स्‍सेदारी करीब दो-ति‍हाई से ज्‍यादा है। कंपनि‍यों का कहना है कि‍ उत्‍तर पूर्वी राज्‍यों में बांस की मात्र सबसे ज्‍यादा है। यह हर जगह पैदा होते हैं। यह कदम हमारे लि‍ए और देश के लि‍ए गेम चेंजर साबि‍त होगा।    

 

क्‍या है मोदी का सपना

 

भारतीय ऑयल उपभोग में रि‍कॉर्ड ग्रोथ का मतलब है कि‍ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गटर के पानी से लेकर फसल के अवशेषों तक हर चीज से डीजल और गैसोलि‍न के साथ सम्‍मि‍श्रण कर रहे हैं। फ्यूल के लि‍ए देश में बढ़ती डि‍मांड के अलावा मोदी 2022 तक देश के एनर्जी इंपोर्ट को 10 फीसदी कम करने करने की कोशि‍श कर रहे हैं। इसकी वजह से 2020 तक सरकार के सपोर्ट से 15 अरब डॉलर मार्केट में बायोफ्यूल अहम भूमि‍का निभाएगा।  

 

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क्‍या कर रही हैं भारत की ऑयल कंपनि‍यां 

 

भारतीय ऑयल कंपनि‍यां बायोफ्यूल रि‍फाइनरीज में इन्‍वेस्‍टमेंट कर रही हैं ताकि‍ इथेनॉल प्रोडक्‍शन को बूस्‍ट कि‍या जा सके। कंपनि‍यां कृषि‍ अवशेषों से लेकर पेट्रोकैमि‍कल्‍स तक से इथेनॉल नि‍कालने का काम कर रही हैं। फि‍लहाल, केवल 2.1 फीसदी गैसोलि‍न को इथेनॉल से मि‍लाया जा रहा है जबकि‍ डीजल के साथ बायोडीजल को बेहद कम मि‍लाया रहा है। इस साल का लक्षय दोनों में 5 फीसदी मि‍श्रण का है।

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