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मार्केट में बिक रही हैं 3 तरह की ऑटोमैटिक कारें, चेक करें आपके लिए कौन सी बेस्ट

AMT vs CVT vs DCT: इन तीनों को लेकर कंफ्यूज हो जाते हैं कस्टमर्स

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नई दिल्ली। भारत में ऑटोमैटिक गियरबॉक्स या ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन कारों की डिमांड तेजी से बढ़ रही है। पहले यह ट्रांसमिशन केवल हाई ऐंड कारों में ही मिलता था लेकिन अब कार कंपनियों ने इस टेक्नोलॉजी को हैचबैक, कॉम्पैक्ट एसयूवी, कॉम्पैक्ट सेडान में भी देना शुरू कर दिया है। मौजूदा समय में तीन तरह के ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन - AMT, CVT और DCT पॉपुलर हैं, लेकिन लोगों के बीच यह कंफ्यूजन रहती है कि उनके लिए कौन सी ट्रांसमिशन वाली कार बेस्ट है। यहां आपको बता रहे हैं कि इन तीनों ट्रांसमिशन का काम क्या है और यह किस तरह की ड्राइविंग करने वालों के लिए बेस्ट हो सकता हैं।

 

ऑटोमैटिक मैनुअल ट्रांसमिशन (AMT)

 

इस वक्त ऑटोमैटिक मैनुअल ट्रांसमिशन (AMT) जिसे सेमी ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन भी कहा जाता है, की डिमांड तेजी से बढ़ी है। AMT दरअसल ऑटोमैटिक या क्लच-लेस गियरबॉक्स नहीं है बल्कि यह एक मैनुअल ट्रांसमिशन है जो बिना क्लच दबाए गियर बदलने की सुविधा देता है। इस तरह के ट्रांसमिशन यूनिट में दो मुख्य चीजों - हाइड्रोलिक एक्यूटर सिस्टम और इलेक्ट्रिक कंट्रोल यूनिट का इस्तेमाल होता है। असल में यह एक किट है जिसे किसी भी रेग्युलर मैनुअल ट्रांसमिशन में जोड़ा जा सकता है जोकि इसे कार कंपनियों के लिए बेहद कम लागत वाला सॉल्यूशन बनाता है।

 

सरल भाषा में ऐसे समझें...

 

इस तरह के ट्रांसमिशन का क्लच अपने आप काम करता है और यह सर्वो मोटर से ऑपरेट होता है, जोकि इसे ऑटोमैटिक बनाता है। आसान भाषा में कहें तो आपके स्पीडों मीटर में स्पीड के हिसाब से गियर चेंज होता दिखाई देता है। गियर चेंज करने के लिए आपको क्लच या गियरबॉक्स का इस्तेमाल नहीं करना पड़ता।

 

AMT को पेट्रोल और डीजल दोनों इंजन ऑप्शन में उपलब्ध कराया जाता है। फ्यूल एफिशियंसी के मामले में भी AMT मॉडल्स मैनुअल ट्रांसमिशन की तुलना में 5 से 10 फीसदी कम या करीब-करीब बराबर ही रहता है। इसके अलावा, इसका मैनटेनेंस कॉस्ट भी काफी किफायती है। इस वक्त स्मॉल हैचबैक जैसे क्विड, सेलेरियो से लेकर टाटा नेक्सॉन, फोर्ड ईकोस्पोर्ट आदि कारों में एएमटी वर्जन मिल जाता है।

 

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Continuously Variable Transmission (CVT)

 

Continuously Variable Transmission (CVT) टेक्नोलॉजिकली ज्यादा एंडवास गियरबॉक्स है और यह एक्सलेरेशन के लिए सिंगल गियर स्पीड का इस्तेमाल करता है। इसमें भी ड्राइविंग के लिए क्लचलेस सिस्टम लगा हुआ है। गियर रेश्यो जेनरेट करने के लिए CVT में स्टील पुली और बेल्ट का यूज किया जाता है। सीवीटी में कोई गियर नहीं होता है और इसमें गियर चेंज भी नहीं होता है, बल्कि केवल रेश्यो बदलता है।

 

इस तरह के ट्रांसमिशन बेहद कम आवाज करते हैं और इसका यूज भारत में ऑटोमैटिक स्कूटर्स में काफी ज्यादा किया जाता है। हालांकि, सीवीटी ट्रांसमिशन में स्पीड बढ़ाने या कार को ओवरटेक करने में ज्यादा आरपीएस का यूज होता है जिससे इसकी आवाज बढ़ जाती है। सीवीटी मॉडल करीब-करीब उतना ही माइलेज देता है जितना मैनुअल ट्रांसमिशन वाली कार देती है। आपको निसान माइक्रो और मारुति बलेनो जैसे किफायती कारों में भी सीवीटी का ऑप्शन मिल जाएगा।

 

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डुअल क्लच ट्रांसमिशन (DCT)

 

डुअल क्लच ट्रांसमिशन (DCT) – इस तरह के ट्रांसमिशन पहले बताए गए दोनों ट्रांसमिशन से ज्यादा एडवांस है। डुअल क्लच ट्रांसमिशन में ज्यादा तेजी से गियर शिफ्ट करने के लिए ट्वीन क्लच सिस्टम लगाया जाता है। दो क्लच ऑड और ईवन गियर नंबर्स को अलग-अलग तरीके से चेंज करते हैं जबकि गियर सिस्टम वैसा ही रहता है जैसा मैनुअल ट्रांसमिशन रहता है। हाई ऐंड कार कंपनियां इस तरह के ट्रांसमिशन का इस्तेमाल ज्यादा करती हैं। लेकिन आपको कई किफायती कारों जैसे फॉक्सवैगन पोलो जीटी टीएसआई, फोर्ड फिगो और फॉक्सवैगन अमियो, स्कोडा रेपिड डीजल आदि में भी ट्वीन क्लच ट्रांसमिशन मिलेगा।

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