Home » Auto » Industry/ TrendsVolkswagen rigged gas experiment with monkeys to show Beetle produced safe level of emissions

खुलासा : बंदरों पर कार कंपनी कर रही थी ये सीक्रेट एक्‍सपेरि‍मेंट, दुनि‍याभर में हो रही बदनामी

दुनि‍या की नामी कार कंपनी ने एक ऐसा काम कि‍या, जिसको लेकर उसकी अब पूरी दुनि‍या में उसकी बदनामी हो रही है।

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नई दि‍ल्‍ली। दुनि‍या की नामी कार कंपनी ने एक ऐसा काम कि‍या, जिसको लेकर उसकी अब पूरी दुनि‍या में उसकी बदनामी हो रही है। जर्मनी की कार कंपनी फॉक्‍सवैगन (Volkswagen) लगातार एक बार फि‍र मीडि‍या की सुर्खियों में है और इस बार भी वजह कंपनी का स्‍कैंडल है। इससे पहले कंपनी पर दुनि‍या के कई शहरों में भारी जुर्माना लगाया गया था क्‍योंकि उसने अपनी गाड़ि‍यों में एक ऐसा उपकरण लगा दि‍या था, जो पदूषण चेक करने वाली मशीन को धोखा दे देता था। अमेरि‍का में इस कंपनी पर इस हरकत के लि‍ए 26 अरब डॉलर का जुर्माना लगाया गया है। आगे पढ़ें 

 

सुनवाई के दौरान हुआ खुलासा 
इसी मामले की अमेरि‍का में सुनवाई के दौरान यह सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि कंपनी ने अपनी गाड़ि‍यों को अच्‍छा सबि‍त करने के लि‍ए एक सीक्रेट एक्‍सपेरि‍मेंट किया था। इसमें 10 बंदरों को फॉक्‍सवैगन की गाड़ी बीटल का धुंए में सांस लेने पर मजबूर कि‍या गया। कंपनी ब्रिटि‍श अधि‍कारि‍यों को यह साबि‍त करना चाहती थी कि उनकी डीजल कार से नि‍कलने वाला धुआं जयादा हानि‍कारक नहीं है, हालांकि इस एक्‍सपेरि‍मेंट में भी एक बड़ा खेल कि‍या गया था। आगे पढ़ें क्‍या हुआ उस प्रयोग में 

क्‍या हुआ था एक्‍सपेरि‍मेंट में 
सन 2014 में अमेरि‍का की एक लैब में एक बड़ा ही अजीब परीक्षण कि‍या गया। दस बंदरों को एक एयरटाइट चैंबर में बंद कर दि‍या गया। उनके मनोरंजन के लि‍ए कार्टून चैनल लगा दि‍या गया और उस कमरे में फॉक्‍सवैगन बीटल के धुंआ छोड़ा गया। बंदर उसी धुएं में सांस लेते रहे। इस पूरे प्रयोग के लि‍ए पैसा भी कंपनी ने ही दि‍या था। इसका मकसद ये साबित करना था कि अब के डीजल वाहन पहले के वाहनों से कहीं ज्‍यादा सेफ हैं। आगे पढ़ें कंपनी ने यहां भी की चालाकी 

गाड़ी बदल दी 
मगर परीक्षण कर रहे अमेरि‍की वैज्ञानि‍कों को ये बात नहीं पता थी कि कंपनी ने उन्‍हें जो गाड़ी उपलब्‍ध कराई थी उसमें कुछ ऐसे बदलाव कर दि‍ए गए थे कि‍ कार बहुत कम प्रदूषण कर रही थी। यानी कंपनी ने लैब टेस्‍ट के लि‍ए खास गाड़ी दी थी। यह मामला अब जनवरी 2018 में सामने आया है, जि‍सके बाद कंपनी की बदनामी हो रही है। 

 

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