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Home » Auto » Industry/ TrendsStories of Indians who took revenge from Britishers

विदेश में हुए ‘अपमान’ का इन 3 भारतीयों ने ऐसे लिया बदला, माफी मांगने को मजबूर हुए थे अंग्रेज

गणतंत्र दिवस के मौके पर पढ़िए इन भारतीयों की कहानी

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नई दिल्ली. भारत आज अपना 70वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। इस मौके पर हम आपको तीन ऐसे भारतीयों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्होंने विदेश में अपने साथ हुए अपमान का बदला कुछ इस अंदाज में लिया था कि अंग्रेजों को शर्मिंदा होना पड़ा और बाद में उन्हें माफी मांगकर अपनी गलती स्वीकार की थी। 

 

  • रतन टाटा 

बात लगभग 19 साल पहले यानी 1999 की है, जब टाटा ग्रुप के रतन टाटा (Ratan Tata) और उनकी टीम को विदेश में 'अपमान' का सामना करना पड़ा था। यह घटना तब हुई थी, जब रतन टाटा (Ratan Tata) अपने ऑटो बिजनेस को बेचने के लिए फोर्ड के पास गए थे। लेकिन वक्त ने ऐसी पलटी खाई और नौ साल बाद उन्हें बदला लेने का मौका मिला। टाटा समूह (Tata Group) ने इस अमेरिकी कंपनी के प्रमुख ब्रांड जगुआर और लैंड रोवर (JLR) को खरीद लिया। दिलचस्प बात रही कि फोर्ट ने इसे टाटा का अपने ऊपर अहसान माना। टाटा ग्रुप के एक अन्य अधिकारी प्रवीण काडले ने वर्ष 2014 में हुए एक कार्यक्रम के दौरान रतन टाटा के अपमान का किस्सा सुनाया।

 

फोर्ड को मानना पड़ा अहसान


टाटा के JLR को खरीदने के बाद उस समय फोर्ड के चेयरमैन बिल बोर्ड ने टाटा को धन्यवाद दिया और कहा कि जेएलआर को खरीदकर आपने हम पर बड़ा अहसान किया है। काडले के मुताबिक, उनकी इस बात पर खूब तालियां बजी थी।

 

  • रूबेन सिंह (AlldayPA के सीईओ )


लंदन में एक सि‍ख अरबपति‍ ने अंग्रेजों से अपनी बेइज्‍जती का बदला अनोखे अंदाज में लि‍या। AlldayPA के सीईओ रूबेन सिंह ने यूके में अपनी रॉल्‍स रॉयस को पगड़ी के अलग-अलग कलर के साथ मैच करते हुए एक चैलेंज को जीत कर दि‍खाया और उनका यह चैलेंज सोशल मीडि‍या पर वायरल हो गया। उन्‍होंने ट्वि‍टर को अपना हथि‍यार बनाते हुए लोगों को बताया कि‍ वह अंग्रेजों को दि‍ए चैलेंज को कैसे पूरा कर रहे हैं।


क्‍या था मामला   

दरअसल, रूबेन सिंह की पगड़ी को एक अंग्रेज ने 'बैंडेज' बता दि‍या और उनकी और उनकी पगड़ी की बेइज्‍जती करने की कोशि‍श की। रूबेन ने ट्वि‍टर पर लि‍खा, 'हाल ही में कि‍सी ने मेरी टर्बन को 'बैंडेज' कहा। टर्बन मेरा ताज है और मेरा गर्व। उन्‍होंने अंग्रेज को चैलेंज कि‍या कि‍ वह अपनी टर्बन को अपनी रॉल्‍स रॉयस कारों के साथ मैच करेंगे और वो ही पूरे हफ्ते। अंग्रेज ने शर्त लगाई थी कि‍ रूबेन सिंह अपनी टर्बन को अपनी कार के रंग के समान सात दि‍नों तक नहीं रखते। लेकि‍न रूबेन ने अंग्रेज को अपने अंदाज में करार जवाब दि‍या। 

 

 

  • अलवर के राजा जय सिंह 

अलवर के राजा ने रॉल्स राय कंपनी की ओर से बेज्जती का बदला एक दिलचस्प तरीके से लिया था। उन्होंने कंपनी की महंगी गाड़ियों से नगरपालिका को सौंप कर उससे कचरा उठवाया था। जब यह बात पूरे विश्व में फैली की विश्व की नं. 1 कार रोल्स रॉयस की साख मिट्टी में मिल गई। इस तरह रोल्स रॉयस की ब्रांड वैल्यू गिरने से कार की खरीद कमजोर होने लगी जिसकी वजह से कंपनी के मालिक की आमदनी कमजोर पड़ने लगी।

 

कंपनी को मांगनी पड़ी थी माफी 

इसके चलते कंपनी ने भारत में राजा को टेलीग्राम में माफी लिखकर भेजी और विनती की कि रोयस रॉयल कार से कचरा न उठवाएं यही नहीं,  कंपनी ने राजा को 6 कारें भेंट स्वरूप फ्री में भेजीं। जब राजा जयसिंह को यह पता लगा कि रोल्स रॉयस वालों को उनकी गलती का सबक मिल चुका है तब जाकर राजा ने उन कारों से कचरा साफ करना बंद करवाया।

 

क्या था मामला 

एक दिन लंदन भ्रमण के दौरान अलवर के राजा जयसिंह सीदे-सादे कपड़ों में लंदन की बांड स्ट्रीट की सैर कर रहे थे। इसी बीच उनकी नजर रोल्स रॉयस कार के शोरूम पर पड़ी। कार उन्हें देखने में आकर्षक लगी जिसके चलते कार की कीमत को पूछने के लिए वे शोरूम में घुस गए। राजा को अन्य भारतीयों की तरह मानते हुए शोरूम के सेल्समैन ने उन्हें बुरी तरह झिड़का और बेइज्जती करके उनको वहां से भगा दिया। उनकी बेइज्जती के बाद राजा जयसिंह अपने होटल के कमरे में वापस आए और अपने नौकर से कहा कि शोरूम के मालिक को फोन करके बताओ ‍‍कि अल्वर के राजा उनकी कार खरीदने के इच्छुक हैं। कुछ घंटों बाद राजा फिर से शोरूम पहुंच गए पर इस बार वे साधारण कपड़ों में नहीं थे बल्कि पूरे राजसी ठाठ में पहुंचे। इस बार उनके पहुंचने के पहले ही खूबसूरत लाल कारपेट जमीन पर बिछ चुकी थी और सारे सेल्समैन बड़े सम्मान से सिर झुकाकर उनका अभिवादन ले रहे थे। राजा ने शोरूम में मौजूद सभी 6 कारें खरीद लीं।

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