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फॉक्‍सवैगन में एक और डीजल स्‍कैंडल की आशंका, इस बार ऑडी फंसी, जर्मनी में जांच शुरू

दुनिया के सबसे बड़े कारमेकर फॉक्‍सवैगन समूह में एक और डीजल स्‍कैंडल की आशंका है।

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बर्लिन. दुनिया के सबसे बड़े कार मैन्युफैक्चर्स फॉक्‍सवैगन समूह में एक और डीजल स्‍कैंडल की आशंका है। इस बार अनियमितता ग्रुप की कंपनी ऑडी में सामने आई है। फॉक्‍सवैगन की ऑडी यूनिट ने कहा है कि उसके कुछ डीजल मॉडल के नए इंजन सॉफ्टवेयर में अनियिमितता पता चली है। कंपनी ने डीलर्स को इन कारों की डिलिवरी रोक दी है। जर्मनी की फेडरल मोटर ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी ने जांच शुरू कर दी है।  

 

 

सीएनएन मनी की रिपोर्ट के अनुसार, जांच कर रहे जर्मन अधिकारियों की संदेह है कि कंपनी ने ऑडी के A6 लग्‍जरी सैलून और A7 स्‍पोर्टी हैचबैक के 6 सिलेंडर डीजल इंजन में इलीगल इमिशन सॉफ्टवेयर लगाए हैं। जर्मनी की ट्रांसपोर्ट मिनिस्‍ट्री ने एक बयान में कहा है कि मोटर व्‍हीकल अथॉरिटी ने इस मामले की ऑपचारिक जांच शुरू कर दी है।

 

2015 में हुआ था फॉक्‍सवैगन का डीजल स्‍कैंडल

बता दें 2015 में एक अमेरिकी एजेंसी ने फॉक्‍सवैगन की कारों में गड़बड़ी पकड़ी थी। कंपनी ने भी माना था कि पॉल्‍यूशन जांच को चकमा देने के इरादे से उसने 11 मिलियन कारों के सॉफ्टवेयर में गड़बड़ी की थी।  


60 हजार कारें में गड़बड़ी 
जर्मन ट्रांसपोर्ट मिनिस्‍ट्री का कहना है कि करीब 60 हजार कारों में यह गड़बड़ी है। इनमें से करीब 33 हजार कारें जर्मनी में है। अमेरिका में गड़बड़ी वाली कोई कार नहीं है। ऑडी का कहना है कि V6 इंजन में गड़बड़ी है। प्रभावित कारों की डिलिवरी तत्‍काल रोक दी गई और जिन कस्‍टमर्स ने इन मॉडल के लिए ऑर्डर दिए थे, उन्‍हें भी इसकी जानकारी दे गई है। ऑडी के सीईओ रुपर्ट स्‍टेडलर ने एक बयान में कहा कि हम अनियमितता की जानकारी अथॉरिटीज को दे दी क्‍योंकि यह हमारी शीर्ष प्राथमिकता है। इस मामले में हमने बिना किसी देरी यह कदम उठाया है। 
  
सॉफ्टवेयर के जरिए फॉक्‍सवैगन में गड़बड़ी! 
2015 में सामने आए फॉक्‍सवैगन स्‍कैंडल पर यूएस इन्‍वॉयनमेंटल प्रोटेक्शन एजेंसी ने कहा था कि इमिशन टेस्टिंग के लिए फॉक्सवैगन ने एक अलग डिवाइस बना रखी थी। यानी जब कभी फॉक्सवैगन की कारें इमिशन टेस्टिंग के लिए जाती थीं तो यह डिवाइस पॉल्यूशन को कंट्रोल कर लेती थी। इसके बाद जब भी यह कार नॉर्मल ड्राइविंग सिचुएशंस की टेस्टिंग पर जाती थी तो इमिशन कंट्रोल का सॉफ्टवेयर अपने आप बंद हो जाता था।

 

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