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अब सरकार वाहन रजिस्ट्रेशन डाटा बेचकर करेगी कमाई, लेकिन खतरे में पड़ सकती है लोगों की प्राइवेसी?

केंद्र सरकार ने थोक डाटा शेयरिंग पॉलिसी को मंजूरी दी है।

Govt policy to sell vehicle registration data

Govt policy to sell vehicle registration data: केंद्र सरकार ने थोक डाटा शेयरिंग पॉलिसी को मंजूरी दी है। इसके तहत सरकार व्हीकल के रजिस्ट्रेशन ( ड्राइविंग लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट) सर्टिफिकेट को बेचकर कमाई करेगी। 

नई दिल्ली. केंद्र सरकार ने थोक डाटा शेयरिंग पॉलिसी को मंजूरी दी है। इसके तहत सरकार व्हीकल के रजिस्ट्रेशन ( ड्राइविंग लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट) सर्टिफिकेट को बेचकर कमाई करेगी। हालांकि सरकार की इस पॉलिसी को लेकर लोगों की प्राइवेसी को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।  

पहले कुछ निश्चित संस्थानों को दिया जाता था डाटा

एक्सपर्ट के मुताबिक बिना किसी बाध्यकारी नियम के करोड़ों भारतीयों की पर्सनल जानकारी बेच देना निजता के अधिकार का हनन है, जिसमें लोगों का फोन नंबर, आधार नंबर, पता समेत गोपनीय जानकारियां होती हैं। बता दें कि सड़क परिवहन मंत्रलाय सभी व्हीकल्स के रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC),  ड्राइविंग लाइसेंस (DL) की कॉपी कलेक्ट करती है। मौजूदा वक्त में मंत्रालय वाहनों के डाटा को लॉ एनफोर्समेंट एजेंसी के साथ शेयर करती है। साथ ही ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री, बैंक, फाइनेंस कंपनी को उचित दर पर डाटा उपलब्ध कराती है। 

इन शर्तों का करना होगा पालन

यह डाटा कोई भी व्यक्ति या कंपनी हासिल कर सकेगी। बशर्ते कंपनी भारत में रजिस्टर्ड हो और कंपनी में 50 फीसदी स्वामित्व भारतीयों का होना चाहिए। इस डाटा को भारत के डेटा सेंटर में स्टोर किया जा सकेगा।लेकिन इसे देश के बाहर के सर्वर पर ट्रांसफर और स्टोर नहीं कर सकेंगे। इसे इंस्क्रिप्ट फॉर्मेट में उपलब्ध कराया जाएगा। हालांकि इस बारे में जानकारी नहीं दी गई है कि लोगों के पर्सनल डाटा को साझा किया जाएगा या फिर नहीं।  

देने होंगे 3 करोड़ रुपए सालाना

सरकार साल में 4 बार 1 जनवरी, 1 अप्रैल, 1 जुलाई और 1 अक्टूबर को डाटा जारी करेगी। लेकिन इसके लिए कमर्शियल ऑर्गेनाइजेशन को 3 करोड़ रुपए सालाना देने होंगे, जबकि शैक्षणिक संस्थानों के रिसर्च के लिए 5 लाख रुपए देने होंगे। इस रकम में सालाना 5 फीसदी की दर से इजाफा होगा। अभी तक बैंक, इंश्योरेंस कंपनी और व्हीकल मैन्युफैक्चर्स और ट्रांसपोर्ट कंपनी के साथ सरकार डाटा शेयर करती थी। इसके लिए प्रति रिकॉर्ड 50 रुपए से 100 चार्ज किया जाता था। 

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