शेयर बाजार में इन दो खातों से होती है ट्रेडिंग, जानिए कैसे खुलते हैं ये अकाउंट

MARKET TEAM

Oct 12,2014 01:33:00 PM IST
नई दिल्ली. शेयर बाज़ार में ख़रीद-फरोख्त दो तरह के अकाउंट से किया जा सकता है। पहला है डीमैट अकाउंट और दूसरा ट्रेडिंग अकाउंट। डीमैट अकाउंट वह अकाउंट होता है, जिसमें शेयर डीमैटरियलाइज़ फॉर्म में होते हैं। ट्रेडिंग अकाउंट के जरिए आप इंट्राडे में कारोबार कर सकते हैं।
कैसे खुलेगा खाता
=> डी-मैट खाता खुलवाने के लिए निवेशक के पास पैन कार्ड और उसका 18 वर्ष का होना जरूरी है।
=> बैंक खाता भी होना जरूरी है।
=> डीपी से प्राप्त फॉर्म भरने के साथ खाता खुलवाने वाले के लिए पहचान पत्र व पता के दस्तावेज (वोटर आईडी, पासपोर्ट, राशन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, आयकर रिटर्न, बिजली बिल, टेलिफोन बिल आदि) और फोटोग्राफ जमा करना होता है। इन दस्तावेजों को देने के बाद डीपी आपका खाता खोल देता है।
=> नए खाताधारक को एक बेनिफिशयरी ओनर नंबर (बीओआडी) मिलता है, जिसका इस्तेमाल कर शेयरों की खरीद बिक्री की जाती है। दूसर खातों की तरह इस खाते में भी नॉमिनी रखा जाता है।
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नोट- तस्वीरों का प्रयोग सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है।
कहां खुलवाएं डीमैट?
 
=> अच्छे ट्रैक रिकॉर्ड वाली ब्रोकिंग कंपनी में ही खाता खुलवाएं।
 
=> कंपनी के ब्रोकिंग चार्जेंज की तुलना दूसरी कंपनियों से ज़रूर कर लें।
 
=> ब्रोकिंग चार्जेंज दो तरह के होते हैं- इंट्राडे चार्जेज और डिलीवरी चार्जेज।
 
=> डीमैट किट साइन करने से पहले इसकी मुख्य शर्तों को अच्छी तरह पढ़ लें।
 
=> शर्तें स्पष्ट नहीं होने पर एजेंट से इसकी पूरी जानकारी ले लें।
 
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कितनी फीस ?
 
डी-मैट खाता खुलवाने वाले व्यक्ति से डीपी कई तरह के फीस वसूलता है। यह फीस कंपनी दर कंपनी अलग हो सकती है।
 
अकाउंट ओपनिंग फीस
 
खात खुलवाने के लिए वसूला जाने वाला फीस। कुछ कंपनियां (जैसे आईसीआईसीआई, एचडीएफसी, यूटीआई आदि) यह फीस नहीं लेती है, जबकि कुछ (एसबीआई और कार्वी कंसलटेंट्स आदि) इसे वसूलती हैं। वैसे कुछ कंपनियां इसे रिफंडेबल (खाता बंद कराने पर लौटा देती हैं) भी रखती हैं।
 
एनुअल मेंटेनेंस फीस
 
सालाना फीस जिसे फोलियो मेंटेनेंस चार्ज भी कहते हैं। आमतौर पर कंपनी यह फीस साल के शुरुआत में ही ले लेती है।
 
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कस्टोडियन फीस
 
कंपनी इसे हर महीने ले सकती है या फिर एक मुश्त। यह फीस आपके शेयरों की संख्या पर निर्भर करता है।
 
ट्रांजैक्शन फीस
 
डीपी चाहे तो इसे हर ट्रांजेक्शन पर चार्ज कर सकती है या फिर चाहे तो ट्रेडिंग की राशि पर (न्यूनतम फीस तय कर)।
इनके अलावा कंपनी री-मैट, डी-मैट, प्लेज चार्जेज, फील्ड इंस्ट्रक्शन चार्जेज आदि भी वसूल सकती हैं।
ट्रेडिंग अकाउंट
 
ट्रेडिंग अकाउंट के जरिए आप इंट्राडे में कारोबार कर सकते हैं। कारोबारी अकाउंट को ट्रेडिंग अकाउंट (Trading Account) भी कहते हैं यह वह अकाउंट (Trading Account) होता है, जो ब्रोकर के साथ मिलकर खुलवाया जाता है। ब्रोकर के साथ के इस ट्रेडिंग अकाउंट (Trading Account) में ऑनलाइन सुविधा होने पर आप एक साथ कई शेयर खरीद और बेच सकते हैं। ब्रोकर सिर्फ ब्रोकर नहीं, बल्कि एक कारोबारी संगठन के रूप में कार्य करते हैं। बड़े ब्रोकर्स की तो सामान्यतया कई शहरों में शाखाएं होती हैं, जहां से वे अपनी सेवाएं देते हैं। कई ब्रोकर कंपनियां शेयर बाजार में भी सूचीबद्ध होती हैं तथा अपने शेयरों की खरीद-बिक्री भी करती हैं।
 
कई ब्रोकर्स अपने पास समसामयिक विश्लेषण के लिए विशेषज्ञों की टीम भी रखते हैं, जो विभिन्न कंपनियों के बही-खातों और गतिविधियों का विश्लेषण कर समय-समय पर रिपोर्ट देते हैं। यह शेयर में निवेश के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। इसके अलावा कई ब्रोकर्स जो बतौर कंपनी काम कर रहे हैं, अपने रजिस्टर्ड ग्राहकों के लिए मासिक या साप्ताहिक रिव्यू भी प्रकाशित करते हैं, जो निवेशकों के लिए अत्यंत फायदेमंद होते हैं, इसलिए ब्रोकर के साथ यह ट्रेडिंग अकाउंट (Trading Account) आपके लिए जरूरी और आपके हित में होता है।
 
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कैसे खुलवाएं ट्रेडिंग अकाउंट
 
ट्रेडिंग अकाउंट (Trading Account) को खोलने के लिए आपको सबसे पहले केवाईसी (अपने ग्राहक को जानिए या KYC) फॉर्म भरना जरूरी होता है। यह शेयरों या फंड यूनिटों की खरीद-फरोख्त के लिए अनिवार्य है। इसमें आपसे संपर्क की जानकारियां तथा आपकी वित्तीय स्थिति की जानकारी होती है। सामान्य खातों के जरूरी पहचान पत्र जैसे पासपोर्ट, मतदाता पहचान पत्र, स्थाई पते के लिए राशन कार्ड, बिजली का बिल आदि पत्र जरूरी होते हैं। हां, एक महत्वपूर्ण बात यह है कि इसमें लगने वाली आपकी फोटो आपके बैंक से प्रमाणित की हुई होनी चाहिए।
 
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समझौता प्रमाण पत्र
 
ज्यादातर लोग निवेश के लिए ब्रोकर का सहारा लेते हैं, लेकिन इसके लिए जरूरी है कि आप निवेश से पहले ही ब्रोकर एग्रीमेंट (Broker Agreement) बनवा लें। यह सेबी द्वारा निर्धारित मानकों पर बीएसई तथा एनएसई बाजारों के लिए अलग-अलग साइन किया जाता है। ब्रोकर अपनी सुविधा या मर्जी से इसमें कोई बदलाव नहीं कर सकते हैं, इसलिए एक प्रकार से यह ब्रोकर द्वारा निवेश में आपसे धोखा किए जाने से सुरक्षा प्रदान करता है।
 
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भारत में मात्र दो डिपोजिट्री
 
नेशनल सिक्योरिटीज डिपोजिट्री लिमिटेड (एनएसडीएल) एवं सेंट्रल डिपोजिट्री सर्विसेज लिमिलटेड (सीएसडीएल)। इन डिपोजिट्रीज के करीब 500 से ज्यादा एजेंट हैं, जिन्हें डिपोजिट्री पार्टिसिपेंट्स (डीपी) कहा जाता है। यह जरूरी नहीं है कि डीपी कोई बैंक ही हो। दूसरी वित्तीय संस्थाएं (जैसे शेयर खान, रिलायंस मनी, इंडिया इनफोलाईन आदि) के पास भी डी-मैट अकाउंट खोला जा सकता है।
 
यह जानना जरूरी है कि जो व्यक्ति खुद शेयर खरीदते बेचते नहीं हैं, उनके ब्रोकर प्रतिनिधि के रूप में खाते का इस्तेमाल कर सकते हैं।
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